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Saturday, February 21, 2026

दिल्ली शब्दोत्सव 2026 का उद्घाटन: साहित्य और संस्कृति का तीन दिवसीय महोत्सव शुरू

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नई दिल्ली में शुक्रवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तीन दिवसीय साहित्यिक और सांस्कृतिक उत्सव ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ गीत से हुई। इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े प्रमुख लोग मौजूद रहे। यह उत्सव मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में 2 से 4 जनवरी तक चलेगा, जिसमें 100 से ज्यादा वक्ता भाग लेंगे।

उद्घाटन और मुख्य अतिथि

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और मंत्री कपिल मिश्रा समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। उत्सव में किताबों के लोकार्पण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कवि सम्मेलन जैसे आयोजन होंगे। प्रवेश मुफ्त है, लेकिन ऑनलाइन पंजीकरण जरूरी है।

हर्ष मल्होत्रा का संबोधन: भारत की संस्कृति पर जोर

केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि इस कार्यक्रम में भारत की संस्कृति का छोटा रूप देखने को मिल रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि हजारों साल पहले भारत विश्व गुरु था, जब दुनिया भर के लोग नालंदा और तक्षशिला में पढ़ने आते थे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई शिक्षा नीति से शिक्षा के साथ संस्कृति को भी बढ़ावा मिल रहा है। शिक्षा को कौशल से जोड़ा गया है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत विविधताओं में एकता वाला देश है, जो दुनिया में कहीं और नहीं दिखता। यहां 340 से ज्यादा जीवंत भाषाएं और 1600 से अधिक बोलियां हैं। यह भारत की समृद्ध संस्कृति को दिखाता है।

कपिल मिश्रा का बयान: संस्कृति को नई दिशा

दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्रीराम’ के नारों से अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में दिल्ली को वैचारिक आतंकवाद का केंद्र बनाने की कोशिश हुई। कला और संस्कृति या तो खत्म हो गई थी या गलत दिशा में जा रही थी। अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में इसे बदलने का काम हो रहा है।

पिछले 10 महीनों में कला एवं संस्कृति विभाग ने कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए, जो पहले नहीं होते थे। शब्दोत्सव इसी कड़ी का हिस्सा है। दिल्ली को नक्सली विचारधारा और गलत इतिहास से मुक्त करने का संकल्प लिया गया है।

कपिल मिश्रा ने कहा कि जब पत्थर पुलिस, सेना या मंदिर पर फेंका जाता है, तो वह पहले दिमाग में आता है, फिर हाथ में। इसी तरह आतंकवादी विचार पहले दिमाग में आते हैं। इस उत्सव को वैचारिक आतंकवाद पर सर्जिकल स्ट्राइक बताया।

यह उत्सव भारत की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने और युवाओं में सकारात्मक विचार जगाने का प्रयास है। दिल्लीवासियों के लिए यह साहित्य और संस्कृति का बड़ा मौका है।

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