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दिल्ली में अरबों की लागत से बनेंगे 6 एक्सप्रेसवे, टनल और एलिवेटेड कॉरिडोर, NCR को मिलेगी जाम से राहत

दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार मिलकर राजधानी और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सड़क परियोजनाएं शुरू करने जा रही हैं। कुल छह प्रमुख प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, जिनमें नए एक्सप्रेसवे, एलिवेटेड कॉरिडोर, टनल और सर्विस रोड शामिल हैं।

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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार मिलकर राजधानी और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सड़क परियोजनाएं शुरू करने जा रही हैं। कुल छह प्रमुख प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, जिनमें नए एक्सप्रेसवे, एलिवेटेड कॉरिडोर, टनल और सर्विस रोड शामिल हैं। इनकी कुल लागत हजारों करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं का मकसद दिल्ली-एनसीआर में यातायात को सुगम बनाना और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी देना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले की जानकारी दी है।

दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक समस्या और नई पहल

दिल्ली और आसपास के शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में रोजाना ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और दिल्ली सरकार के बीच हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। बैठक में NCR की सड़कों पर भीड़ घटाने की योजनाओं पर चर्चा हुई थी। अब इन छह प्रोजेक्ट्स को अमल में लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली को विश्व स्तर का शहर बनाने और जाम से मुक्त करने का लक्ष्य है। ये सभी प्रोजेक्ट भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे।

1. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे लिंक प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 17 किलोमीटर लंबा छह लेन का कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को गाजियाबाद में ट्रॉनिका सिटी के पास Urban Extension Road-II (UER-II) से जोड़ेगा। अनुमानित लागत 3,500 करोड़ रुपये है।

यह लिंक IGI एयरपोर्ट, बारापुल्ला कॉरिडोर, मुकरबा चौक, सिंघु बॉर्डर और आश्रम-बदरपुर इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम करेगा। प्रोजेक्ट अभी अलाइनमेंट फाइनल करने के चरण में है। निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य है।

UER-II को दिल्ली की तीसरी रिंग रोड भी कहा जाता है। यह 75.7 किलोमीटर लंबी सड़क दिल्ली के पश्चिमी हिस्से को हाफ सर्किल में जोड़ती है। अलीपुर से शुरू होकर रोहिणी, मुंडका, नजफगढ़, द्वारका होते हुए महिपालपुर तक जाती है।

2. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, नोएडा-फरीदाबाद कनेक्टिविटी कॉरिडोर

यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है जिसमें 65 किलोमीटर लंबी छह लेन की सड़क बनेगी। अनुमानित लागत 7,500 करोड़ रुपये है।

यह कॉरिडोर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, DND, फरीदाबाद और यमुना एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ेगा। इससे लोनी, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा और फरीदाबाद के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। कालिंदी कुंज, सराय काले खां और आउटर रिंग रोड पर जाम कम होने की उम्मीद है।

निर्माण दिसंबर 2026 तक शुरू करने की योजना है। यह प्रोजेक्ट NCR के अलग-अलग हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद करेगा।

3. दिल्ली-अमृतसर कटरा कॉरिडोर, अर्बन एक्सटेंशन रोड-II

इस प्रोजेक्ट के जरिए दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे से आने वाले ट्रैफिक को UER-II और द्वारका एक्सप्रेसवे के रास्ते दिल्ली, गुरुग्राम और IGI एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच मिलेगी।

17 किलोमीटर लंबा छह लेन का यह कॉरिडोर 1,500 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा। मार्च 2027 तक काम शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह उत्तरी भारत के तीर्थ स्थलों और अन्य इलाकों से आने वाले वाहनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

4. एम्स-महिपालपुर-गुरुग्राम एलिवेटेड कॉरिडोर

20 किलोमीटर लंबा छह लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसकी लागत करीब 5,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। निर्माण अप्रैल 2027 तक शुरू होगा।

यह प्रोजेक्ट AIIMS, INA, हौज खास और वसंत कुंज को हरियाणा के गुरुग्राम से जोड़ेगा। सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलने से दिल्ली और गुरुग्राम के बीच ट्रैफिक में राहत मिलेगी। दक्षिण दिल्ली के एरोसिटी, रंगपुरी, छतरपुर और घिटोरनी इलाकों की पहुंच भी आसान होगी।

5. अर्बन एक्सटेंशन रोड-II के साथ सर्विस रोड

UER-II के साथ-साथ सर्विस रोड बनाने का प्रोजेक्ट भी शामिल है। यह 26 किलोमीटर तक फैलेगा। अनुमानित लागत 6,500 करोड़ रुपये है।

दोनों तरफ सेकेंडरी सर्विस रोड बनाए जाएंगे। इससे स्थानीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी और बाहरी दिल्ली में प्लान्ड शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह प्रोजेक्ट रोजाना आने-जाने वाले लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होगा।

6. शिव मूर्ति-नेल्सन मंडेला मार्ग टनल प्रोजेक्ट

यह 8 किलोमीटर लंबी छह लेन वाली अंडरग्राउंड टनल होगी। अनुमानित लागत 7,000 करोड़ रुपये है।

टनल द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज से जोड़ेगी। इससे बाहरी दिल्ली के इलाकों में सिग्नल-फ्री यात्रा संभव होगी। महिपालपुर, रंगपुरी और धौला कुआं जैसे क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम घटेगा।

ओखला बैराज के पास इंटरचेंज

कालिंदी कुंज में जाम कम करने के लिए ओखला बैराज के पास इंटरचेंज बनाने की योजना है। 300 करोड़ रुपये की लागत से 500 मीटर लंबा छह लेन का इंटरचेंज और फ्लाईओवर बनेगा।

यह दिल्ली-नोएडा-फरीदाबाद कॉरिडोर पर ट्रैफिक फ्लो सुधार देगा। नोएडा, जसोला, सरिता विहार और फरीदाबाद के बीच सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी।

इन प्रोजेक्ट्स का कुल असर

ये सभी प्रोजेक्ट मिलकर दिल्ली-एनसीआर को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाएंगे। एक्सप्रेसवे और टनल से यात्रा का समय बचेगा। लोगों को रोजमर्रा की सफर में सुविधा मिलेगी। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से ये काम समय पर पूरे करने का लक्ष्य है।

इन परियोजनाओं से आर्थिक विकास भी बढ़ेगा क्योंकि बेहतर सड़कें व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देती हैं। दिल्ली सरकार का कहना है कि सभी प्रोजेक्ट पर्यावरण के ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाएंगे।

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