जेवर (ग्रेटर नोएडा)। उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की नई शुरुआत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 फरवरी 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एचसीएल ग्रुप और फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप के संयुक्त उद्यम इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की डीडीआईसी ओएसएटी यूनिट का शिलान्यास किया। यह ₹3,700 करोड़ से ज्यादा का निवेश है, जो 2028 तक चालू होने की उम्मीद है।
यूनिट डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स (DDIC) बनाएगी, जो स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी, ऑटोमोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होती हैं। महीने में 20,000 वेफर्स प्रोसेस करने की क्षमता वाली यह सुविधा भारत की बढ़ती चिप मांग को पूरा करेगी, आयात कम करेगी और आत्मनिर्भरता बढ़ाएगी। इससे 3,500 से ज्यादा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष नौकरियां बनेंगी और सालाना करीब ₹45,000 करोड़ का जीडीपी योगदान होने का अनुमान है। जेवर इलाका अब हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह पर है।
यूपी में पहली डिस्प्ले ड्राइवर चिप यूनिट की शुरुआत
जेवर, 21 फरवरी 2026। यमुना एक्सप्रेसवे के पास यीडा क्षेत्र आज भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए खास दिन बन गया। यहां इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की ओएसएटी (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) यूनिट का शिलान्यास हुआ। यह यूनिट देश की पहली डिस्प्ले ड्राइवर इंटीग्रेटेड सर्किट (डीडीआईसी) ओएसएटी सुविधा है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्चुअल तरीके से इसकी शुरुआत की और कहा कि मेड इन इंडिया चिप्स विकसित भारत के लिए बहुत जरूरी हैं।
एचसीएल और फॉक्सकॉन का ₹3,700 करोड़ का जॉइंट वेंचर
इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड एचसीएल ग्रुप (60%) और फॉक्सकॉन (40%) का संयुक्त उद्यम है। इस परियोजना में ₹3,700 करोड़ से ज्यादा का निवेश होगा। यूनिट 48 एकड़ में सेक्टर 28, यीडा में बनेगी। यह भारत की सेमीकंडक्टर मिशन के तहत छठी मंजूर यूनिट है और यूपी की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट है। 2028 तक यह पूरी तरह चालू हो जाएगी।
क्या बनेगा इस प्लांट में?
यह ओएसएटी यूनिट डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स (DDIC) बनाएगी। ये चिप्स मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी, कारों के डिस्प्ले और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होती हैं। प्लांट की क्षमता महीने में 20,000 वेफर्स प्रोसेस करने की है। पीक पर यह सालाना करोड़ों चिप्स बना सकता है। इससे भारत में डिस्प्ले चिप्स की घरेलू मांग पूरी होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
रोजगार और आर्थिक फायदा
इस प्रोजेक्ट से 3,500 से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। लोकल युवाओं को हाई-टेक जॉब्स मिलेंगी। साथ ही सालाना लगभग ₹45,000 करोड़ का जीडीपी में योगदान होने का अनुमान है। लोकल सप्लाई चेन मजबूत होगी और ग्लोबल पार्टनर्स भी आकर्षित होंगे।
यीडा क्षेत्र बनेगा टेक्नोलॉजी हब
यमुना एक्सप्रेसवे इलाका पहले से लॉजिस्टिक्स, एयरोस्पेस और अब सेमीकंडक्टर में निवेश के लिए जाना जाता है। जेवर एयरपोर्ट के पास होने से लॉजिस्टिक्स आसान होगा। यह यूनिट यूपी को सेमीकंडक्टर गंतव्य बनाने में मदद करेगी। एचसीएल और फॉक्सकॉन की साझेदारी से नवाचार और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स पर मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी।
कौशल विकास और ट्रेनिंग
यूनिट में उत्कृष्टता केंद्र, रिसर्च लैब और सिमुलेशन लैब बनेंगी। लोकल यूनिवर्सिटी और टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स के साथ मिलकर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलेंगे। इससे चिप डिजाइन, टेस्टिंग और सेमीकंडक्टर में स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार होगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
यह प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को हकीकत में बदलने का अच्छा उदाहरण है। सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता आर्थिक के साथ सामरिक रूप से भी अहम है। यूपी अब देश के टॉप सेमीकंडक्टर हब बनने की ओर बढ़ रहा है। ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के लिए यह शिलान्यास बड़ा कदम है।
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