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Saturday, February 21, 2026

उत्तर प्रदेश: ई-रिक्शा ट्रेनर मंशा देवी बनीं लखपति दीदी, 60 महिलाओं को दी ट्रेनिंग, 26 जनवरी को पीएम मोदी से मुलाकात

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लखनऊ। गोरखपुर की मंशा देवी ने स्वयं सहायता समूह और सेफ मोबिलिटी कार्यक्रम से जुड़कर एक साल में खुद को आत्मनिर्भर बनाया और लखपति दीदी बन गईं। वे अब ई-रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग दे रही हैं और जिले की 60 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ा है। उनकी मासिक कमाई 20 से 30 हजार रुपये तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही योजनाओं की बदौलत यह बदलाव आया है। अब मंशा देवी 26 जनवरी को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाली हैं।

स्वयं सहायता समूह ने बदली जिंदगी

मंशा देवी पहले स्वयं सहायता समूह में समूह सखी के तौर पर काम करती थीं। उनकी आय बहुत कम थी और परिवार चलाना मुश्किल होता था। फिर वे सेफ मोबिलिटी कार्यक्रम से जुड़ीं। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चल रहा है। मिशन की निदेशक दीपा रंजन के निर्देशन में डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के साथ मिलकर यह प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम ने महिलाओं को सुरक्षित परिवहन और स्वरोजगार के अवसर दिए।

ई-रिक्शा ट्रेनिंग से मिली नई पहचान

सेफ मोबिलिटी कार्यक्रम में ट्रेनिंग लेकर मंशा देवी खुद ई-रिक्शा चलाने लगीं। अब वे दिन-रात बिना डर के ई-रिक्शा चलाती हैं और अच्छी कमाई कर रही हैं। रोजाना 800 से 1000 रुपये तक की आमदनी हो रही है। इससे सालाना ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो जाती है। वे ब्रह्मपुर ब्लॉक सहित गोरखपुर जिले की अन्य महिलाओं को भी ड्राइविंग, लाइसेंस और उद्यमिता की ट्रेनिंग दे रही हैं। अब तक 60 से ज्यादा महिलाएं उनकी ट्रेनिंग लेकर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

सरकारी योजनाओं का मिला साथ

मंशा देवी को मुद्रा योजना से 1.25 लाख रुपये का लोन मिला। ब्लॉक स्तर से भी एक लाख रुपये की मदद मिली। इस पैसे से उन्होंने अपना काम आगे बढ़ाया। इन महिलाओं को सरकारी योजनाओं का फायदा मिला और सुरक्षित माहौल में वे ई-रिक्शा चला रही हैं। सड़कों पर आत्मविश्वास के साथ ई-रिक्शा चलाती ये महिलाएं उत्तर प्रदेश में बदलते माहौल की मिसाल हैं।

महिला सशक्तिकरण को नई रफ्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजनाओं से उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिली है। ग्रामीण महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं। वे स्वरोजगार अपना रही हैं और परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। मंशा देवी की कहानी दिखाती है कि सही ट्रेनिंग और सरकारी मदद से ग्रामीण महिलाएं खुद को और पूरे समाज को आगे ले जा सकती हैं।

पीएम मोदी से मुलाकात का इंतजार

एक साल में समूह सखी से ई-रिक्शा ट्रेनर बनने वाली मंशा देवी अब लखपति दीदी कहलाती हैं। उनकी मेहनत और सफलता को देखते हुए उन्हें 26 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला है। यह मुलाकात नई दिल्ली में होगी। यह उनके लिए और पूरे समूह के लिए बड़ा सम्मान है।

मंशा देवी जैसी महिलाओं की कहानियां बता रही हैं कि उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण अब हकीकत बन चुका है। स्वयं सहायता समूह और सेफ मोबिलिटी जैसे कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदल रहे हैं।

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