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एआई शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ली बैठक

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में भारत के एआई पाठ्यक्रम को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप बनाने पर व्यापक चर्चा हुई। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें उद्योग-तैयार बनाना है।

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नई दिल्ली/ खुशबू पाण्डेय : केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में भारत के एआई पाठ्यक्रम को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप बनाने पर व्यापक चर्चा हुई। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें उद्योग-तैयार बनाना है। इस बैठक में उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों और NASSCOM के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। टास्कफोर्स ने बी.टेक कंप्यूटर साइंस और संबद्ध पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर कई महत्वपूर्ण सुधार सुझाए।

प्रमुख सुधार प्रस्ताव
1. अनुप्रयोग आधारित शिक्षण

पहले सेमेस्टर से ही छात्रों को वास्तविक उद्योग उपयोग मामलों (Use Cases) पर आधारित प्रशिक्षण देने की योजना है। पारंपरिक व्याख्यान-आधारित मॉडल की जगह प्रोजेक्ट और समस्या-समाधान आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।

2. एआई पाठ्यक्रम का संरचित एकीकरण

एआई विषयों को सेमेस्टर-वार क्रेडिट आधारित प्रणाली में शामिल किया जाएगा ताकि छात्रों की सीखने की प्रक्रिया क्रमबद्ध और व्यावहारिक बने।

3. प्रैक्टिकल अनुभव में भारी वृद्धि

वर्तमान 25–30% व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ाकर 40–75% तक करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह प्रतिशत पाठ्यक्रम और विशेषज्ञता के अनुसार तय होगा।

4. उद्योग-एकीकृत शिक्षण

छात्रों को कैपस्टोन प्रोजेक्ट्स, एआई समाधान इंजीनियरिंग और लो-कोड/नो-कोड प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से वास्तविक उद्योग अनुभव दिया जाएगा।

5. जिम्मेदार एआई और एआई गवर्नेंस

Responsible AI और AI Governance को अलग विषय के रूप में नहीं बल्कि पूरे पाठ्यक्रम में लगातार शामिल किया जाएगा, ताकि नैतिक और सुरक्षित एआई उपयोग की समझ विकसित हो।

6. मल्टीपल एंट्री-एग्जिट विकल्प

नई संरचना के तहत:

प्रथम वर्ष के बाद प्रमाणपत्र,
द्वितीय वर्ष के बाद डिप्लोमा,
तृतीय वर्ष के बाद एडवांस्ड डिप्लोमा
जैसे विकल्प उपलब्ध होंगे।
संकाय विकास पर विशेष फोकस

सरकार ने माना कि केवल पाठ्यक्रम बदलना पर्याप्त नहीं है, इसलिए शिक्षकों के प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत:

Train-the-Trainer कार्यक्रम,
मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली,
आधुनिक एआई लैब्स,
उद्योग विशेषज्ञों को सहायक संकाय के रूप में शामिल करना जैसे कदम प्रस्तावित किए गए हैं।

साझा एआई अवसंरचना का प्रस्ताव

बैठक में राष्ट्रीय स्तर पर साझा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का सुझाव भी दिया गया। इसमें उद्योग, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों की साझेदारी वाला “Triple Helix Model” अपनाया जाएगा।

इससे छात्रों और कॉलेजों को:

GPU कंप्यूट,
एज डिवाइसेस,
सॉफ्टवेयर स्टैक,
एआई प्लेटफॉर्म सदस्यता,जैसी सुविधाओं तक समान पहुंच मिल सकेगी।

आगे की कार्ययोजना

बैठक के अंत में चार प्रमुख कदम तय किए गए:

-देशभर में एआई शिक्षा से जुड़ी बुनियादी जरूरतों का आकलन।
-संशोधित पाठ्यक्रम लागू करने के लिए AICTE के साथ समन्वय।
-उद्योग-नेतृत्व वाले फैकल्टी ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करना।
-गैर-स्टेम छात्रों के लिए एआई जागरूकता और बेसिक एआई साक्षरता पाठ्यक्रम विकसित करना।

यह पहल भारत को एआई शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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