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Saturday, January 17, 2026

कौन हैं भारतीय सेना की मेजर स्वाति शांता कुमार? जिन्हें मिला UN का प्रतिष्ठित अवॉर्ड संयुक्त राष्ट्र महासचिव पुरस्कार 2025

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भारतीय सेना की अधिकारी मेजर स्वाति शांता कुमार ने संयुक्त राष्ट्र मिशन में अपने काम से देश का मान बढ़ाया है। बेंगलुरु की रहने वाली मेजर स्वाति इस समय दक्षिण सूडान में UNMISS के साथ तैनात हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासचिव का अवॉर्ड 2025 दिया गया है। यह सम्मान शांति स्थापना में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उनके योगदान के लिए मिला।

उनके प्रोजेक्ट “Equal Partners, Lasting Peace” ने UNMISS में महिलाओं की भूमिका को मजबूत किया। इस प्रोजेक्ट ने दुनिया भर के UN मिशनों से आए नामांकनों में से Gender Category में जीत हासिल की। मेजर स्वाति की अगुवाई में टीम ने पेट्रोलिंग और सामुदायिक गतिविधियों से दक्षिण सूडान में सुरक्षा और सहयोग बढ़ाया, जिससे 5,000 से ज्यादा महिलाओं को फायदा हुआ।

मेजर स्वाति शांता कुमार कौन हैं?

मेजर स्वाति शांता कुमार बेंगलुरु की रहने वाली हैं। वह कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME) में अधिकारी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बेंगलुरु में पूरी की और न्यू होराइजन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री ली। इसके बाद उन्हें भारतीय सेना में कमीशन मिल गया। वे पहले IBM कंपनी में काम करती थीं, लेकिन फिर उन्होंने सेना में शामिल होने का फैसला किया।

महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की सराहना

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अवॉर्ड की घोषणा करते हुए मेजर स्वाति शांता कुमार की पहल की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि “Equal Partners, Lasting Peace” प्रोजेक्ट UNMISS में लैंगिक समावेशी दृष्टिकोण को मजबूत करने का शानदार उदाहरण है। यह अवॉर्ड उन मुहिमों को दिया जाता है जो लैंगिक समानता और महिलाओं को शांति स्थापना में आगे बढ़ाने का काम करती हैं। गुटेरेस ने मेजर की मेहनत को सराहा और कहा कि इससे शांति मिशनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। मेजर स्वाति ने भारतीय एंगेजमेंट टीम को प्रभावी तरीके से तैनात किया, जिससे UN के लक्ष्यों को बल मिला।

कड़ी प्रतिस्पर्धा में हासिल की जीत

मेजर स्वाति शांता कुमार का प्रोजेक्ट दुनिया भर के UN मिशनों और एजेंसियों से आए नामांकनों में से चुना गया। Gender Category में यह चार फाइनलिस्टों में से सबसे ज्यादा वोट पाकर विजेता बना। वोटिंग में UN के दुनिया भर के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इस जीत से साफ होता है कि मेजर की मुहिम कितनी असरदार रही। उन्होंने टीम को एकजुट करके लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया। उनकी अगुवाई में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन हुए, जैसे लघु और लंबी दूरी की पेट्रोलिंग, संयुक्त नदी पेट्रोलिंग और दूरस्थ इलाकों में एयर पेट्रोलिंग। इनसे दक्षिण सूडान के संघर्ष वाले क्षेत्रों में शांति का माहौल बना।

UN मिशन में लाया बदलाव

मेजर स्वाति की टीम के प्रयासों से दक्षिण सूडान में बड़ा बदलाव आया। इन ऑपरेशनों से सुरक्षा बढ़ी और स्थानीय लोगों में सहयोग का भाव जागा। इससे 5,000 से अधिक महिलाओं को सामुदायिक गतिविधियों में हिस्सा लेने का मौका मिला। स्थानीय स्तर पर विश्वास और भरोसा बढ़ा, जो शांति स्थापना के लिए बहुत जरूरी है। UN ने कहा कि मेजर और उनकी टीम की प्रतिबद्धता ने भविष्य के शांति मिशनों के लिए एक मजबूत मिसाल कायम की है। यह दिखाता है कि लैंगिक समावेशी नेतृत्व कैसे नाजुक इलाकों में स्थायी शांति और स्थिरता ला सकता है। मेजर स्वाति ने भारतीय सेना की परंपरा को आगे बढ़ाया और महिलाओं को प्रेरणा दी।

भारतीय सेना का गौरव बढ़ाया

मेजर स्वाति शांता कुमार की यह उपलब्धि भारतीय सेना के लिए गर्व की बात है। दक्षिण सूडान जैसे चुनौतीपूर्ण मिशन में उन्होंने न सिर्फ शांति स्थापना में योगदान दिया, बल्कि लैंगिक समानता को भी मजबूत किया। UN का यह अवॉर्ड महिलाओं की भूमिका को मान्यता देता है। मेजर की कहानी बताती है कि मेहनत और समर्पण से कैसे बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। यह प्रोजेक्ट अन्य UN मिशनों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

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