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Sunday, May 26, 2024

कृषि बिलों के खिलाफ अकाली दल-BSP ने संसद में किया धरना-प्रदर्शन

–कानूनों पर चर्चा, निरस्त करने के लिए स्थगन प्रस्ताव ठुकराने की निंदा की
–अकाली दल के साथ बसपा सांसदों ने भी जताया विरोध, देंगे आखिर तक साथ
-खेती कानूनों पर चर्चा के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होने की अपील

नई दिल्ली/ नेशनल ब्यूरो : केंद्र सरकार के तीन कृषि बिलों के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल ने संसद परिसर में धरना प्रदर्शन किया। उनके साथ बहुजन समाज पार्टी के सांसदों ने भी विरोध जताया। अकाली दल तीनों कृषि कानूनों पर चर्चा एवं निरस्त करने के लिए स्थगन प्रस्ताव ठुकराने की केंद्र सरकार की निंदा की। साथ ही खेती कानूनों पर चर्चा के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होने की अपील की। इसकी अगुवाई शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने की। उनके साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा भी मौजूद रहे।
इस मौके पर सुखबीर सिंह बादल ने ऐलान किया कि किसानों की मांग पर संसद में चर्चा करने और केंद्र सरकार द्वारा इस मांग को माने जाने तक शिअद-बसपा गठबंधन विरोध जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि आज देश के किसान समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए तीनों खेती कानूनों को रदद करने की मांग की। उनके साथ बहुजन समाज पार्टी तथा अन्यों ने मिलकर पार्टी द्वारा लाए गए स्थगत प्रस्ताव को ठुकराने के लिए एनडीए सरकार की निंदा की। सरदार सुखबीर सिंह बादल ने सभी राजनीतिक दलों से काले कानूनों पर चर्चा के लिए मजबूर करने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि हमें इस मुददे को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस समय इससे ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। किसान अपनी मांगों को लेकर पिछले आठ महीनों से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। इसमें 500 से अधिक किसान शहीद हुए हैं। हमने किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देने का प्रस्ताव पेश किया है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसद में किसानों की शहाहत का सम्मान नही किया जाता है।
अकाली दल के अध्यक्ष ने एनडीए सरकार से कहा है कि एक चुनी हुई सरकार को जिम्मेदारी निभाते हुए किसानों के प्रति संवेदनशील तरीके से काम करना चाहिए। किसानों की बात सुनने की बजाय केंद्र सरकार ने शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने तथा दमन करने की कोशिश की। बादल ने कहा कि अब तक किसानों से बातचीत करने तथा उनकी शिकायतों का समाधान करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। ऐसा रवैया लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि वे किसानों की मंागों को क्यों नहीं सुन रही है, यही कारण है कि किसानों ने सरकार पर से विश्वास खो दिया है।
शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि किसानों, खेत मजदूरों तथा खेत व्यापारियों की घोर अवहेलना कर काले कानून पारित किए गए हैं। कानून संविधान निर्माताओं द्वारा संघवाद का उल्लंघन किया जा रहा है। खेती कानून भारतीय खेती का निगमीकरण करने के लिए बनाए गए हैं, तथा इसके कारण अनाज की सुनिश्चित खरीद नहीं की जाएगी। किसानों को कारपोरेशन की दया पर छोड़ दिया जाएगा।
सरदार बादल ने कहा कि शिरोमणी अकाली दल तीनों खेती कानूनों को निरस्त करने तक तथा किसान समुदाय के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाना जारी रखेगा। साथ ही किसानों के अधिकारों का किसी भी कीमत पर हनन नहीं होनें देंगें।

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