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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया रिटायर्ड IAS शैलेंद्र जोशी की पुस्तक का विमोचन

—’एक प्रतिध्वनि: जन केंद्रित शासन की ओर’ का लोकार्पण —शैलेन्द्र जोशी की पुस्तक जन-जागरण का काम करेगी: राजनाथ सिंह नई दिल्ली/टीम डिजिटल : तेलंगाना सरकार में मुख्य सचिव की भूमिका से निवृत्त होने वाले रिटायर्ड आईएएस शैलेंद्र कुमार जोशी की पुस्तक ‘एक प्रतिध्वनि: जन केंद्रित शासन की ओर’ का लोकार्पण आज यहां रक्षा मंत्री राजनाथ […]

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—’एक प्रतिध्वनि: जन केंद्रित शासन की ओर’ का लोकार्पण
—शैलेन्द्र जोशी की पुस्तक जन-जागरण का काम करेगी: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली/टीम डिजिटल : तेलंगाना सरकार में मुख्य सचिव की भूमिका से निवृत्त होने वाले रिटायर्ड आईएएस शैलेंद्र कुमार जोशी की पुस्तक ‘एक प्रतिध्वनि: जन केंद्रित शासन की ओर’ का लोकार्पण आज यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लेखक जोशी की प्रसंशा करते हुए उन्हें ऐसे ही लिखते रहें ताकि जन जागरण होता रहे। कार्यक्रम का आयोजन रक्षा मंत्रालय के सेमिनार हॉल में किया गया। इस मौके पर कहा गया कि बेहतर शासन व्यवस्था के लिए विधायिका के साथ ही न्यायपालिका और कार्यपालिका की दुरुस्त व्यवस्था जरूरी है। इन संस्थाओं के भीतर आंतरिक दिक्कतों के चलते कई बार परेशानी आती है। जिसके लिए आत्मनिरीक्षण जरूरी है। एसके जोशी ने ब्यूरोक्रेसी के रोल को समझाते हुए किताब में लिखा है कि अफसरों का दायित्व अपने राजनीतिक आकाओं को बेहतर सलाह देना होता है।


सेवानिवृत्त वरिष्ठ नौकरशाह एसके जोशी ने किताब में दिल्ली प्रतिनियुक्ति को लेकर कई मजेदार वाकयों का उल्लेख किया है। जोशी खुद कुबूल करते हैं कि जहां उनके बैचमेट जिलों में अफसरशाही का लुत्फ उठा रहे थे, वहीं उन्होंने खुद से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनुरोध किया था। फलस्वरूप उन्हें दिल्ली भेजा गया। पोस्टिंग थी गंगा परियोजना निदेशालय में अंडर सेक्रेटरी की जिम्मेदारी। बेहद सौम्य स्वभाव जोशी साहब को इस बात का गुमां था कि जिले की ही तरह उनकी भव्य अगवानी होगी। मुगालते में कदम आगे बढ़े ही थे कि सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें रोक लिया।
देश के सामाजिक-आर्थिक स्थिति के एक प्रमुख विचारक और पर्यवेक्षक डॉ विकास सिंह का मानना है कि भारत को इस विषय पर कई और पुस्तकों की आवश्यकता है। उन्हें सबसे ज्यादा यह पसंद आया कि यह राष्ट्रीय भाषा में लिखा गया है और अधिक लोगों तक डॉ जोशी के अनुभव और अंतर्दृष्टि का फायदा पहुंचेगा। डॉ. विकास सिंह ने यह भी कहा कि यह पुस्तक सभी कार्यकारिणी के लिए एक टूलकिट के समान है और उस भूमिका के हर सम्भावित एवं इच्छुक व्यक्ति को इसे अवश्य पढ़ना चाहिए।

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