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लुप्त होती लोक परंपराओं, लोकगीतों और लोक संस्कृति को बचा रहे शरद मिश्रा

एक शिक्षक, साहित्यकार, गीतकार एवं सांस्कृतिक आयोजक के रूप में उन्होंने समाज में भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं के संरक्षण हेतु उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

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प्रयागराज/ खुशबू पाण्डेय। प्रयागराज की सांस्कृतिक धरती से जुड़े शरद कुमार मिश्रा आज उन विशिष्ट व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं, जिन्होंने शिक्षा, साहित्य, लोक संस्कृति और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान स्थापित की है। एक शिक्षक, साहित्यकार, गीतकार एवं सांस्कृतिक आयोजक के रूप में उन्होंने समाज में भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं के संरक्षण हेतु उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत उन्होंने पी.जी., बी.टी.सी., टीईटी एवं सीटीईटी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं उत्तीर्ण कर उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं प्रारंभ कीं। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान केवल अध्यापन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने विद्यार्थियों में भारतीय संस्कार, साहित्यिक चेतना और सामाजिक मूल्यों के संवर्धन का सतत प्रयास किया।


वर्तमान में लोक संस्कृति विकास संस्थान के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत शरद कुमार मिश्रा लोक कला, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में संस्था ने लुप्त होती लोक परंपराओं, लोकगीतों और पारंपरिक सांगीतिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं। ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना तथा नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना उनके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
साहित्यिक क्षेत्र में भी शरद कुमार मिश्रा ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनके चर्चित उपन्यास ‘शत्रु’, ‘रिस्क’ एवं ‘अनुभूति’ सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विविध आयामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं। उनकी लेखनी पाठकों को समाज और जीवन की गहराइयों से परिचित कराती है।

एक कुशल कवि एवं गीतकार भी हैं

उपन्यासकार होने के साथ-साथ वे एक कुशल कवि एवं गीतकार भी हैं। उनके लिखे गीतों को कई प्रतिष्ठित गायकों और कलाकारों ने स्वर दिया है। उनकी रचनाओं में भारतीय मिट्टी की सुगंध, लोकजीवन की सहजता और आधुनिक संवेदनाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
शरद कुमार मिश्रा अनेक भव्य सांस्कृतिक आयोजनों के संस्थापक एवं संयोजक भी रहे हैं, जिनमें नवरंग डांडिया, सारंग महोत्सव, बड़ा महोत्सव, नैनी महोत्सव, महाकाल महोत्सव एवं अंतरयात्रा जैसे कार्यक्रम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

नवोदित कलाकारों को सशक्त मंच प्रदान किया

इन आयोजनों के माध्यम से उन्होंने कला और संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ नवोदित कलाकारों को सशक्त मंच प्रदान किया है।
शरद कुमार मिश्रा का व्यक्तित्व शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा का एक प्रेरणादायी संगम है। भारतीय लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु उनके सतत प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

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