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Sunday, April 21, 2024

CM शिवराज की कलाकारी पर भारी पड़ रही Kamal Nath की गंभीरता वाली राजनीति

बालाघाट/ रहीम खान : मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव (MP assembly elections) जो कि नवम्बर माह में सम्पन्न होगें इसकी तैयारियों में सत्ताधारी भाजपा एवं प्रमुख विपक्षी कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। दोनो ओर से जमीनी स्तर पर बूथ, मण्डलम, सेक्टर, बीएलओ व्यवस्था को सुचारू बनाकर जीत का मार्ग प्रशस्त करने के लिये वह सभी प्रयास किये जा रहे जो जरूरी है। इस बात में कोई दो मत नहीं है कि मध्यप्रदेश की सत्ता में 2003 में वापस आने वाली भाजपा अपने वर्चस्व को बनाये रखने के लिये सभी जरूरी कदम उठा रही है। वहीं दूसरी ओर 2003, 2008, 2013 में बुरी तरह चुनाव हारने वाली कांग्रेस पार्टी ने 2018 में पार्टी के वरिष्ठ नेता  कमलनाथ (Kamal Nath) के मई,2018 में प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश की सत्ता में 2018 में वापसी की थी।

CM शिवराज की कलाकारी पर भारी पड़ रही Kamal Nath की गंभीरता वाली राजनीति

ये अलग बात है कि 15 माह बाद घर का भेदी लंका ढाहे कहावत को चरितार्थ करते हुए कांग्रेस के ही कुछ विधायकों की वगावत के कारण सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई। इस घटनाक्रम से दो चीजें साफ हो गई कि जिस तरह से भाजपा ने कांग्रेस की सरकार को गिराया, प्रदेश की जनता में उसका नकारात्मक प्रभाव गया है लोगों का मत था कि कमलनाथ को उनका कार्यकाल पूरा करने का अवसर दिया जाना था। किंतु सत्ता के मद में चूर भाजपा की तिकडमी राजनीति ने ऐसा नहीं करने दिया। यही कारण है कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जनता की अदालत में या कहे जनता के बीच में कमलनाथ व कांग्रेस दोनों के लिये एक हमदर्दी वाली भावना साफ देखी जा सकती है। वहीं भाजपा ने जो कदम उठाये एवं कांग्रेस के जिन लोगों ने बगावत की उनके लिये भविष्य का चुनाव हर कदम पर एक नई मुश्किल लेकर आ रहा है। मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान जो अब तक चार लोकसभा विदिशा सीट पर और पांच विधानसभा चुनाव बुधनी सीट पर जीत चुके है, उन्होंने 29 नवम्बर,2005 को मुख्यमंत्री के रूप में प्रभार संभाला था उसके बाद 18 वर्षो से वह इस पद पर काबिज है। किंतु वर्तमान समय जनता के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी के साथ घट रही है। नई-नई घोषणायें मंच पर नये नये तरह से भाषणबाजी और जनता को प्रभावित करने मुख्यमंत्री पद की गरिमा को तार-तार करने वाली उनकी कार्यप्रणाली ने व्यक्तिगत रूप से उनकी साख को कमजोर किया है। यह बात बताने की जरूरत नहीं है सब लोक इस बात को महसूस कर रहे है देख रहे है। भ्रष्ट नौकरशाही से मुख्यमंत्री पूरी तरह घिर गये है जो उनको कहीं न कहीं नुकसान पहुंचा रहे है।
ठीक इसके विपरीत छिंदवाड़ा से नौ बार सांसद केन्द्र सरकार में तीन बार केन्द्रिय मंत्री रहे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) की कार्यप्रणाली हमेशा कलाकारी की राजनीति से दूर सामान्य सादगी भरी रही है, तिकडमी राजनीति तिकडमी बातें करने में कमलनाथ पिछड़ जाते है। उनकी यही कार्यप्रणाली आज आम जनता में उनको प्रभावशील बना रही है। मध्यप्रदेश की राजनीति में 43 वर्षो से सक्रिय कमलनाथ को घेरने के लिये भाजपा जो भी तौर तरीक अपना रही है उसमें उसको सफलता नहीं मिल पा रही है। इसे संयोग कहे या सौभाग्य की कमलनाथ का जिला छिंदवाड़ा कांग्रेस का गढ माना जाता है जहां पर उनके साथ उनकी पत्नी श्रीमती अलका नाथ 1996, एवं उनके पुत्र 2019 में सांसद निर्वाचित हुए है। छिंदवाड़ा जिले की सभी सात सीटों पर कांग्रेस के विधायक होने के साथ जिले के सांसद भी कांग्रेस के ही है। जो प्रदेश में अकेले कांग्रेस के सांसद है। इस तरह शिवराज एवं कमलनाथ की राजनीतिक प्रोफाइल पर नजर दौडाए तो हम पाते है कि दोनों की अपनी अपनी जगह प्रभावशील है परन्तु बहुत ज्यादा बोलने के आदि एवं कलाकारी की राजनीति करने में माहिर शिवराज आज जनता के बीच अपनी उस साख को बरकरार नहीं रख पा रहे है जो मतदाता को प्रभावित करें। भाजपा की मजबूरी यह है कि नहीं चाहते हुए भी उन्हें शिवराज को मुख्यमंत्री के रूप में बनाये रखना पड़ रहा है क्योंकि उनको अगर हटाते है जो भी नया चेहरा आयेगा उसको जनता के बीच अपनी स्वीकृति बनाने में समय लगेगा और चुनाव हर पर आ जायेगा। मुख्यमंत्री शिवराज के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है, कानूनी व्यवस्था की कमजोर हालत है, प्रशासनिक मनमानियां चरम सीमा पर है, आम आदमी के दर्द को दूर करने के जो दावे किये जाते है, वैसा कुछ धरातल होते हुए नहीं दिख रहा है। चुनाव में सभी वर्गो को प्रभावित करने के लिये जिस तरह की रेवाड़िया शिवराज बांट रहे है इसके बाद भी जनता में उस तरह का प्रभाव देखने नहीं मिल रहा है जिसके दावे किये जाते है। ठीक इसके विपरीत कांग्रेस के कमलनाथ जिनके 15 माह के मुख्यमंत्री कार्यकाल को जनता स्वीकारती है क्योंकि उन्होंने जो बादे किये थे उसे पूर्ण करने के लिये मुख्यमंत्री बनने के दो घंटे बाद ही शुरू हो गये थे। प्रदेश में 27 लाख किसानों के कर्जे माफ हुए, बिजली बिल में राहत मिली और ऐसे अनेक फैसले थे जो जनता को प्रभावित कर रहे थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कमलनाथ ने सरकार गिरने के बाद राज्य की राजनीति से अपने आप को दूर नहीं किया बल्कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने अपनी सक्रियता को बनाये रखा और आज कांग्रेस का संगठन और कांग्रेस का कार्यकर्ता उत्साहित है। जो कहीं न कहीं राजनीतिक लाभ पार्टी को अवश्य देगा।

MP सरकार को हर मोर्चे पर चुनौती देने के लिये तैयार कांग्रेस

कांग्रेस कमलनाथ के नेतृत्व में सत्ताधारी भाजपा सरकार को राजनीति के हर मोर्चे पर चुनौती देने के लिये कमर कस कर खड़ी है। पिछले वर्ष प्रदेश में सम्पन्न नगर निगम, नगर पालिका, नगर पारिषद, जिला पंचायत, जनपद पंचायत जैसे स्थानीय चुनाव में कांग्रेस के सम्मानजनक प्रदर्शन ने संकेत दिया है कि कांग्रेस 2018 से ज्यादा 2023 में मजबूत है जिसका श्रेय कमलनाथ के गंभीर राजनीतिक नेतृत्व को जाता है जिन्होने प्रतिकूल राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस को एक उत्साहवर्धन नेतृत्व देने का कार्य किया है। 2023 के राजनीतिक परिदृश्य पर यही कहा जा सकता है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज की कलाकारी की राजनीति पर कमलनाथ की सादगी और गंभीरता वाली राजनीति भारी दिख रही है। चुनावी सर्वे में भी बताया जा रहा है कि प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस लौट रही है। वर्तमान समय भीतरी तौर जितना बिखराव का खीचातानी भाजपा के भीतर है उनकी कांग्रेस में नहीं दिख रही है और यही एक संगठित होना कांग्रेस को जनता के बीच में मजबूत कर रहा है।

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