लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी वित्तीय क्षमता को मजबूत करते हुए बिना किसी बैंक कर्ज के गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना को पूरा किया है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर कुल 4200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उपलब्धि का जिक्र करते हुए सहकारी समितियों और पंचायत लेखा परीक्षा विभाग में नवचयनित 500 से अधिक कर्मियों को नियुक्ति पत्र सौंपे।
उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश ‘बीमारू’ राज्य की छवि से निकलकर रेवेन्यू सरप्लस राज्य बन गया है। वित्तीय अनुशासन और बेहतर प्रबंधन से अर्थव्यवस्था, बजट और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना बढ़ी है।
गंगा एक्सप्रेस-वे: आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश का उदाहरण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि उत्तर प्रदेश अब बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को अपने संसाधनों से पूरा करने की स्थिति में पहुंच गया है। देश के सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे में शामिल गंगा एक्सप्रेस-वे की लगभग 600 किलोमीटर लंबी परियोजना बिना बैंक कर्ज लिए पूरी की गई। इसमें 36,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुआ। एक्सप्रेस-वे के किनारे नौ इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक हब विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए करीब 7,000 एकड़ अतिरिक्त जमीन ली गई है। पूरे प्रोजेक्ट पर 42,000 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हो चुका है।
सीएम ने जोर दिया कि वर्ष 2017 से पहले ऐसी स्थिति नहीं थी। तब उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू’ राज्य माना जाता था और बैंक या वित्तीय संस्थान कर्ज देने को तैयार नहीं होते थे। अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

2017 में बैंक अधिकारी फोन तक नहीं उठाते थे
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पुरानी स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि 2017 में जब सरकार बनी तो खजाना खाली था। चुनावी वादों को पूरा करना था लेकिन बैंक के चेयरमैन या सीएमडी फोन उठाने को तैयार नहीं थे। प्रदेश की छवि इतनी खराब कर दी गई थी कि कोई कर्ज देने को तैयार नहीं था।
उस कठिन समय में सरकार ने फैसला किया कि बैंकों पर निर्भर रहने के बजाय अपने संसाधन बढ़ाए जाएंगे, वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया जाएगा और बेहतर प्रबंधन का उदाहरण पेश किया जाएगा। वित्त विभाग, स्थानीय लेखा परीक्षा और पंचायत लेखा परीक्षकों की टीम ने मिलकर मजबूत वित्तीय ढांचा तैयार किया। नतीजा यह रहा कि उत्तर प्रदेश रेवेन्यू सरप्लस राज्य बन गया। राज्य की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट तीन गुना बढ़ गया।
अब बैंक स्वयं लाइन लगाकर फंडिंग ऑफर कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने साफ कहा है कि उत्तर प्रदेश अब अपने दम पर बड़ी परियोजनाएं पूरा करने में सक्षम है। पिछली सरकारों के कर्ज को भी कम करने में सफलता मिली है।

जेपीएनआईसी प्रोजेक्ट: वित्तीय कुप्रबंधन का उदाहरण
सीएम योगी ने विपक्षी सरकार के समय की एक परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि लखनऊ में जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) प्रोजेक्ट 200 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुआ था। लेकिन खर्च बढ़कर 860 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और परियोजना आज भी अधूरी है। यह वित्तीय अनुशासनहीनता और कुप्रबंधन का स्पष्ट उदाहरण है। जनता के पैसे का दुरुपयोग हुआ और एक महापुरुष के नाम को अपमानित किया गया।
एक्साइज राजस्व में भारी बढ़ोतरी, लीकेज पर लगाम
2017 से पहले प्रदेश को एक्साइज विभाग से मात्र 12 हजार करोड़ रुपये की आय होती थी। अब यह बढ़कर 62-63 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी लीकेज रोकने से हुई है। पहले राजस्व में डकैती डाली जा रही थी, जो विकास कार्यों में लगना चाहिए था। अब हर क्षेत्र में सुधार हुआ है।
आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी है वित्तीय अनुशासन
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर बनने की पहली शर्त वित्तीय अनुशासन और प्रभावी प्रबंधन है। गांव और शहर दोनों स्तरों पर मजबूत वित्तीय व्यवस्था जरूरी है। ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगरपालिका, नगर निगम, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत विकास की आधारशिला हैं। इन सभी को वित्तीय प्रबंधन के गुण सिखाने होंगे। इंटरनल ऑडिट की भूमिका यहां बहुत महत्वपूर्ण है।

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, कोई सिफारिश नहीं
नवचयनित अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए सीएम ने बताया कि इन भर्तियों में किसी ने सिफारिश नहीं कराई। पूरी प्रक्रिया इतनी गोपनीय और पारदर्शी तरीके से चलाई गई कि खुद मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री या अपर मुख्य सचिव वित्त को भी जानकारी नहीं थी। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने यह काम बेहतरीन तरीके से किया।
2017 से पहले भर्तियों में चाचा-भतीजा संस्कृति हावी थी। पेपर लीक आम थे। 50 पदों पर 75 लोगों की भर्ती हो जाती थी, जिससे विवाद और अदालती मामले बढ़ते थे। युवाओं को नुकसान होता था। अब योग्यता के आधार पर बिना भेदभाव के चयन होता है। गोरखपुर का सिख युवक और लखनऊ की मुस्लिम युवती दोनों चयनित हुए हैं। सरकार की नीति भ्रष्टाचार और अपराध पर जीरो टॉलरेंस की है।
महिलाओं और युवाओं को बढ़ावा, लाखों रोजगार
इस भर्ती में सहकारी समितियों के लिए 371 पदों पर 78 महिलाएं चयनित हुईं। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा के 129 पदों पर 25 महिलाएं शामिल हुईं। प्रदेश में बेटियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
अब तक 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। एमएसएमई सेक्टर में करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, बीसी सखी, दुग्ध उत्पादन, पीएम स्टार्टअप, पीएम स्टैंडअप और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना जैसी योजनाओं से युवा और महिलाएं आगे बढ़ रहे हैं।
उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार, सचिव वित्त संदीप कौर, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत सहित कई अधिकारी मौजूद थे।
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