भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर जिले के ग्राम नैनोद में 2360 करोड़ रुपये की लागत वाले इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण का भूमिपूजन किया। यह परियोजना इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन एरिया के विकास को नई गति देगी। किसानों की सहमति से बन रहे इस कॉरिडोर में उन्हें 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस दी जाएगी और चार गुना मुआवजा मिलेगा।
लगभग 20 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट से करीब 6 लाख नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। इंदौर के 17 गांवों के किसान इस विकास का सबसे बड़ा लाभार्थी बनेंगे। यह कॉरिडोर पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्र को इंदौर की व्यावसायिक क्षमता से जोड़ेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: परियोजना की मुख्य जानकारी
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर (फेज-1) की कुल लागत 2360 करोड़ रुपये है। इसकी लंबाई करीब 20 किलोमीटर और चौड़ाई 675 मीटर रखी गई है। सड़कों की चौड़ाई 75 मीटर होगी। परियोजना का क्षेत्रफल लगभग 1300 हेक्टेयर है। इसमें आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, विद्युत आपूर्ति, जल संरचनाएं और 60 से ज्यादा बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर से जुड़ेगा और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ कनेक्टिविटी बनाएगा।
प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र सिंह के अनुसार, इस क्षेत्र में इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, ग्रीन इंडस्ट्रीज और नॉलेज बेस्ड सेक्टर विकसित होंगे। लगभग 250 मेगावाट ऊर्जा क्षमता, रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग कनेक्टिविटी भी शामिल है। इस परियोजना से 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का भूमिपूजन कार्यक्रम
रविवार को इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विकास एक क्रमिक प्रक्रिया है। प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, उत्पादन बढ़ाना और निर्यात वृद्धि सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने इस कॉरिडोर को नये मध्यप्रदेश के निर्माण में मील का पत्थर बताया। मालवा के किसानों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वे हमेशा कमाल करते हैं।
डॉ. यादव ने बताया कि यह कॉरिडोर इंदौर को सेंट्रल ग्रोथ हब बनाएगा। इससे उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उत्पादन लागत कम होगी। पहले चरण में सड़क, परिवहन और औद्योगिक ढांचे को मजबूत किया जाएगा। स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
किसानों की भागीदारी: 60% विकसित भूमि और चार गुना मुआवजा
इस परियोजना की खासियत किसानों के साथ किए गए ऐतिहासिक समझौते में है। सरकार ने 60 प्रतिशत विकसित भूमि किसानों को वापस देने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों ने स्वेच्छा से सहमति पत्र दिए। उन्हें 650 करोड़ रुपये के विकसित प्लॉट आवंटित किए गए।
डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि किसानों को कोई कष्ट नहीं होने दिया जाएगा। अब उन्हें चार गुना मुआवजा मिलेगा। कार्यक्रम में किसानों ने मुख्यमंत्री का साफा पहनाकर और गजमाला पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने कृषि देवता भगवान बलराम का चित्र और हल भेंट किया। किसानों ने सहमति पत्र सौंपे और उन्हें अलॉटमेंट लेटर दिए गए।
यह फैसला किसानों को विकास का भागीदार बनाता है। वे अब उद्यमी भी बन सकेंगे। इंदौर के 17 गांवों के किसानों का जीवन इससे बदलने वाला है।

रोजगार सृजन और आर्थिक प्रभाव
इस कॉरिडोर से करीब 5 लाख प्रत्यक्ष और 1 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, कुल 6 लाख नए अवसर। युवाओं, उद्योगपतियों, उद्यमियों और लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं को फायदा होगा। इंदौर की व्यावसायिक क्षमता और पीथमपुर की औद्योगिक ताकत को जोड़ने से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और बाजार में तेजी आएगी।
यह क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेश आकर्षित करेगा। पीथमपुर तक विस्तार से इंदौर का नया विकसित रूप सामने आएगा। गुजरात और मुंबई से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
मंत्रीगणों और सांसदों के विचार
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह परियोजना देश की सर्वश्रेष्ठ योजनाओं में शामिल होगी। किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है। इससे लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा और आईटी तथा ग्रीन इंडस्ट्री का विस्तार होगा।
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत संकल्प से जोड़ा। उन्होंने उद्योग वर्ष मनाने का जिक्र किया और मुख्यमंत्री के किसान हितैषी फैसलों की सराहना की।
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि यह इंदौर और मध्यप्रदेश की जीडीपी बढ़ाएगा। विधायक मधु वर्मा ने जन सहभागिता का उदाहरण बताया।
मध्यप्रदेश में व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 1700 किमी लंबे 6 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर काम चल रहा है। 3368 किमी के 6 बड़े एक्सप्रेस-वे, प्रगति पथ और 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित हो रहे हैं। 5 ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं, जिनमें नर्मदा प्रगति पथ, विंध्य एक्सप्रेस-वे, मालवा-निमाड़ विकास पथ आदि शामिल हैं।
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क 1 लाख 46 हजार 200 किमी से ज्यादा हो चुका है। मध्यप्रदेश भी सड़क नेटवर्क में मजबूत स्थिति में है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन सड़कों से श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी।
किसानों के अन्य हित और सरकारी योजनाएं
मुख्यमंत्री ने गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन बताया। किसानों को दिन में बिजली देने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह किसानों की सरकार है। पीएम मित्र पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स में बड़े निवेश और रोजगार सृजन हो रहा है। एटॉमिक एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में भी निवेश बढ़ रहा है।
भावी संभावनाएं और क्षेत्रीय प्रभाव
यह कॉरिडोर इंदौर, धार, उज्जैन, देवास और शाजापुर को मिलाकर मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास का ‘पेंटागन’ बनाएगा। मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क से जुड़कर प्रदेश ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनेगा। किसान, ग्रामीण, युवा, उद्योगपति सभी को लाभ मिलेगा।
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