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Monday, October 25, 2021
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प्रधानमंत्री मोदी एक श्रद्वालु की तरह पहुंचे गुरुद्वारा श्री शीशगंज साहिब

–लाइन में लगकर लिया प्रसाद, भेंट किए रूमाला साहिब एवं पुष्प
–करीब 7 मिनट किया अरदास, शहीदी स्थल पर टेका माथा
–पीएम को अचानक देख दंग रह गए श्रद्वालु, बच्चों ने ली सेल्फी
-गुरु तेग बहादुर के सर्वोच्च बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता : मोदी

नई दिल्ली /खुशबू पाण्डेय : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री गुरु तेगबहादुर जी के 400वें प्रकाश परब पर उनको नमन किया। इसके लिए पीएम मोदी चांदनी चौक स्थित गुरुद्वारा श्री शीशगंज साहिब जी गए और वहां अरदास की। अरदास करने के उपरांत पीएम ने ट्वीट किया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के सर्वोच्च बलिदान एवं आर्दशों को जीवन में कभी भुलाया नहीं जा सकता। मैं उनको 400वें प्रकाश पर्व पर शीश झुकाता हूं। गुरु जी के साहस और दबे कुचले लोगों की मदद करने के लिए उनका सम्मान किया जाता है। वह अत्याचार और अन्याय के आगे कभी नहीं झुके। उनका सर्वोच्च त्याग सबकुछ शक्ति और प्रेरणा देता है।

बता दें कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का गुरुद्वारा श्री शीशगंज साहिब में ही शहीदी स्थल है। यहां पर औरंगजेब के आदेश पर गुरु साहिब का शीश धड़ से अलग किया गया था।


प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को सुबह करीब 7.10 बजे गुरुद्वारा श्री शीशगंज साहिब पहुंचे और साढे 7 बजे तक वहीं रहे। पीएम ने सबसे पहले पहुंचते ही फूल-माला और रूमाला साहिब लिया। इसके बाद लाइन में लगकर प्रसाद लिया। फिर अंदर जाकर मत्था टेका। सूत्रों के मुताबिक करीब 7 मिनट तक वह प्रार्थना करते रहे। इसके बाद श्री गुरुग्रंथ साहिब पर रूमाला साहिब एवं फूल-माला भेंट किया। यह सब कुछ प्रधानमंत्री सामान्य श्रद्वालु की तरह कतार में खड़े होकर किया। बाद में श्री गुरु तेग बहादुर के शहादत की जगह पर मत्था टेका। फिर श्रदधालु की तरह प्रसाद ग्रहण किया और गुरुद्वारे से बाहर निकले। इस दौरान गुरुद्वारा में मत्था टेकने गए कुछ बच्चों ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेल्फी भी ली। पीएम के साथ केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भाजपा के राष्ट्रीय नेता सरदार आरपी सिंह एवं दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता भी मौजूद रहे।


सूत्रों की माने तो प्रधानमंत्री के दौरे की खबर किसी को नहीं थी। गुरुद्वारा साहिब में सुबह कुछ श्रद्वालु दूरी बनाकर अंदर प्रार्थना कर रहे थे, इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी वहां पहुंच गए। शुरू में तो किसी को यकीन भी नहीं हुआ, लेकिन बाद में जब वह काफी देर तक अरदास एवं प्रार्थना करते रहे तब लोगों को यकीन हुआ। इसकी भनक दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को भी नहीं थी। यही कारण है कि कमेटी की तरफ से कोई भी जिम्मेदार प्रतिनिधि वहां नहीं पहुंचा।

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