नई दिल्ली /खुशबू पाण्डेय : सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने दिल्ली के कृपाल बाग में 30वें विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन का उद्घाटन किया। आठ दिनों तक चलने वाले इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ने तीन दशकों से भी ज्यादा समय से शांति, आध्यात्मिकता और मानवीय एकता को बढ़ावा देने के लिए आध्यात्मिक और चिभिन्न धर्म गुरुओं को एक मंच पर इकट्ठा किया है।
उद्घाटन अवसर पर संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने एक विशाल जनसमूह को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने ईश्वरीय प्रेम और करुणा के महत्व पर जोर दिया और लोगों से आध्यात्मिकता के रास्ते पर चलने का आह्वान किया। इस मौके पर देश-विदेश से हजारों जिज्ञासु शामिल हुए।
13 सितंबर को एक आध्यात्मिक ‘तरही मुशायरे’ का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत माता रीटा जी ने महान सूफ़ी-संत शायर संत दर्शन सिंह जी महाराज की लिखी एक गजल गाकर की। इसके बाद देशभर के जाने-माने उर्दू शायरों ने प्रेम और आध्यात्मिकता पर आधारित दिल को छू लेने वाली अपनी रचनाएँ पेश कीं।
—सावन कृपाल रूहानी मिशन की अगुवाई में दिल्ली के कृपाल बाग में 30वें विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन
अगले दिन, 14 सितंबर को संत दर्शन सिंह जी महाराज की 105वां प्रकाश दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने मानवता के प्रति महान संत-कवि के असीम प्रेम के बारे में बात की। ’दर्शन-असीम प्रेम और करुणा के सागर‘ विषय आधारित सेमिनार में मुख्य भाषण देते हुए, उन्होंने संत दर्शन सिंह जी महाराज को करुणा, प्रेम और दयालुता की प्रतिमूर्ति बताया, जिन्होंने लाखों लोगों को ईश्वर के प्रेम का अनुभव करने में मदद की।

संतों के ईश्वरीय प्रेम के बारे में बात करते हुए, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि, संत दर्शन सिंह जी महाराज ने ईश्वरीय प्रेम के माध्यम से मानवता को ईश्वर की ओर लौटने का रास्ता दिखाया। उनकी कविता एक ईश्वरीय उपहार थी, जिसने लोगों को जीवन के रहस्यों को समझने और मानव जीवन के सच्चे उद्देश्य-खुद को जानना और ईश्वर को पाना,के प्रति जागरूक करने में मदद की।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि, “हम सभी आत्माएँ हैं जिनके भीतर ईश्वर का प्रेम और प्रकाश समाया हुआ है, और ध्यान-अभ्यास के माध्यम से हम आंतरिक आध्यात्मिक यात्रा करते हैं और अंततः हमारी आत्मा का मिलाप परमात्मा से हो जाता है।

आध्यात्मिक गुरु ने एक प्रार्थना के साथ समापन किया, जिसमें उन्होंने कामना की कि हर कोई संत दर्शन सिंह जी महाराज की शिक्षाओं को अपने जीवन में ढाले और अपने भीतर ईश्वर के प्रेम का अनुभव करे। कार्यक्रम की शुरुआत माता रीटा जी और पश्चिमी देशों से आए प्रतिनिधियों के एक समूह ने गुरु अर्जन देव जी महाराज के लिखे भजन “गुरु दिखायो लोयना‘ (गुरु ने उन्हें मेरी आँखों के सामने प्रकट किया है) का गायन किया।
13 सितंबर को सावन कृपाल रूहानी मिशन ने कृपाल बाग में 43वें मुफ्त नेत्र जाँच और मोतियाबिन्द सर्जरी कैम्प का आयोजन किया। कुल 1,987 मरीजों की जाँच की गई, जिनमें से 1,000 को मोतियाबिन्द के ऑपरेशन के लिए चुना गया। ये ऑपरेशन नोएडा के प्.ब्।त्म् हॉस्पिटल के डॉक्टरों के साथ मिलकर अमेरिका से आए डॉक्टरों द्वारा किए जाने हैं।
147 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया
12 सितंबर को 68वें रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें 147 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।
सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर आमंत्रित वक्ताओं में हरिद्वार के एम.एम. डॉ. स्वामी प्रेमानंद जी ने बताया कि कैसे संत दर्शन सिंह जी महाराज जैसे संत ईश्वर के प्रेम के धागे से सभी तरह के लोगों को जोड़ते हैं। ऋषिकेश के महंत श्री रवि प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि मानवता के प्रति संत राजिन्दर सिंह जी महाराज का प्रेम और निस्वार्थ सेवा अनगिनत आत्माओं को ईश्वरीय मार्ग पर चलने में मदद कर रही है।
इलाहाबाद के जगत गुरु विश्वकर्मा शंकराचार्य स्वामी दिलीप योगीराज जी ने कहा कि सच्चे गुरु का प्रेम नदी की तरह बहता है, जो काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को धोने में मदद करता है।
संत दर्शन सिंह जी हर जीव में ईश्वर का प्रकाश देखते थे
दिल्ली के सम्मानित डॉ. फादर नॉर्बर्ट हरमन ने कहा कि सच्चे प्रेम और करुणा का अर्थ है दूसरों के बारे में सोचना और उनके दर्द को कम करना। उन्होंने कहा कि संत दर्शन सिंह जी महाराज ने अपना जीवन इसी तरह जिया।
अमेरिका के जोनाथन क्रूगर और ऑस्ट्रिया की मार्गरेट जर्नी जैसे अंतर्राष्ट्रीय वक्ताओं ने संत दर्शन सिंह जी महाराज के साथ अपने अनुभव साझा किए और उनके असीम प्रेम और दयालुता के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि वे हर जीव में ईश्वर का प्रकाश देखते थे।
बाद में, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने संत दर्शन सिंह जी महाराज द्वारा विभिन्न भाषाओं में लिखी गई चार पुस्तकों का विमोचन किया।
150 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया
इस सम्मेलन में पूरे भारत से 50,000 से अधिक लोगों और 150 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 30वें विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन का समापन सत्र 20 सितंबर, 2026 को संत दर्शन धाम, बुराड़ी, दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
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