नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई केंद्रीय टीम का ऐलान करते हुए हरियाणा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय भाटिया को पार्टी का नया राष्ट्रीय महासचिव (महामंत्री) नियुक्त किया है। जमीनी स्तर से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले भाटिया को यह बड़ी जिम्मेदारी उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव, बेजोड़ चुनावी प्रबंधन और कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत जुड़ाव के प्रतिफल के रूप में सौंपी गई है। नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल आठ महामंत्रियों में स्थान पाकर संजय भाटिया अब देशव्यापी स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के संगठन को विस्तार देने और आगामी चुनावी रणनीतियों को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जमीनी राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का प्रेरणादायी सफर
संजय भाटिया की यह पदोन्नति भाजपा की उस कार्यकर्ता-केंद्रित व्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसमें निष्ठा और निरंतर परिश्रम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपने छात्र जीवन की शुरुआत करने वाले भाटिया ने पिछले चार दशकों में संगठन के हर छोटे-बड़े पद की जिम्मेदारी को कुशलतापूर्वक संभाला है।
1980 के दशक में स्थानीय मंडल स्तर से सक्रिय हुए भाटिया ने मंडल अध्यक्ष, युवा मोर्चा के विभिन्न पदों, जिला स्तरीय जिम्मेदारियों और प्रदेश स्तरीय संगठनात्मक दायित्वों को बखूबी अंजाम दिया। वर्ष 2015 से 2021 तक वे हरियाणा भाजपा के प्रदेश महासचिव रहे। इसके अलावा, उन्होंने हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया।
- जन्म तिथि व स्थान : 29 जुलाई 1967, पानीपत (हरियाणा)
- शुरुआती जुड़ाव : 1980 का दशक (ABVP व युवा मोर्चा)
- हरियाणा प्रदेश महासचिव: 2015 से 2021
- करनाल सीट जीत अंतर : 6,56,142 वोट (2019 लोकसभा चुनाव, रिकॉर्ड जीत)
- उच्च सदन में प्रवेश : अप्रैल 2026 (हरियाणा से राज्यसभा सांसद)
- वर्तमान जिम्मेदारी : राष्ट्रीय महामंत्री, भारतीय जनता पार्टी (2026)
करनाल की ऐतिहासिक जीत ने संसद में स्थापित किया कद
संजय भाटिया के राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव साबित हुआ। जब पार्टी ने उन्हें करनाल संसदीय क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा, तो उन्होंने इतिहास रच दिया।
भाटिया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार को रिकॉर्ड 6,56,142 वोटों के विशाल अंतर से शिकस्त दी। यह अंतर हरियाणा के संसदीय चुनावी इतिहास में दर्ज अब तक की सबसे बड़ी जीत मानी जाती है। यह विशाल जीत केवल एक चुनावी आंकड़ा भर नहीं थी, बल्कि उनकी मजबूत बूथ प्रबंधन रणनीति, व्यापक जनसंपर्क और कार्यकर्ताओं को एक सूत्र में पिरोने की असाधारण क्षमता का जीवंत उदाहरण थी। एक सांसद के रूप में उन्होंने करनाल और हरियाणा के बुनियादी ढांचे, सड़कों, रेलवे नेटवर्क, औद्योगिक विकास और युवाओं व किसानों के मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर पुरजोर ढंग से उठाया।
2024 में संगठन हित को प्राथमिकता और 2026 में राज्यसभा का सफर
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब भाजपा ने करनाल सीट से पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया, तो संजय भाटिया ने पूरी सहर्षता के साथ सांगठनिक भूमिका को सर्वोपरि रखा। बिना किसी पद की लालसा के उन्होंने पार्टी के चुनावी अभियानों और सांगठनिक तैयारियों में खुद को पूरी तरह झोंक दिया।
उनकी इस निष्ठा और समर्पण को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने मार्च 2026 में उन्हें हरियाणा से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया, जहां से वे निर्विरोध निर्वाचित हुए। अप्रैल 2026 में उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले भाटिया ने संसदीय विमर्श में सक्रिय भागीदारी निभाना शुरू किया। अब राज्यसभा सांसद के दायित्व के साथ-साथ राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिलना यह दर्शाता है कि भाजपा आलाकमान को उनकी कार्यकुशलता पर अटूट विश्वास है।
अंतरराज्यीय चुनावी प्रबंधन का विशाल अनुभव
संजय भाटिया की पहचान केवल हरियाणा के प्रादेशिक नेता तक सीमित नहीं रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने कठिन और संवेदनशील राज्यों में चुनावी प्रबंधन के लिए हमेशा भाटिया के संगठनात्मक कौशल पर भरोसा जताया है।
- पश्चिम बंगाल: चुनावी संघर्षों के दौरान उन्होंने ज़मीनी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और अभियानों का कुशल प्रबंधन करने में प्रमुख भूमिका निभाई।
- उत्तर प्रदेश और गुजरात: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कठिन चुनावी समीकरणों को साधने और गुजरात के सांगठनिक ढांचे को मजबूती देने का उन्हें गहरा अनुभव है।
- असम, जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक: चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों वाले इन राज्यों में भाटिया ने बूथ स्तर तक पार्टी को सक्रिय किया। कर्नाटक के तुमकुर जिले की गुब्बी विधानसभा सीट के प्रभार के दौरान भी उन्होंने अपने संगठनात्मक मॉडल की छाप छोड़ी।
संगठन के प्रति समर्पण की अद्वितीय मिसाल
संजय भाटिया की कार्यशैली का सबसे अनुकरणीय पहलू उनका ‘संगठन प्रथम’ का विचार है। वर्ष 2026 में पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान उनकी संगठन निष्ठा का एक चर्चित प्रसंग सामने आया था। जब उनके पुत्र का विवाह आयोजित होना था, तब भी वे शादी के कुछ ही दिन पहले तक बंगाल के चुनावी मोर्चे पर डटे रहे।
पारिवारिक कार्यक्रम संपन्न होते ही वे बिना विश्राम किए पुन: अपने सांगठनिक कर्तव्यों को पूरा करने के लिए मैदान में लौट आए। निजी प्राथमिकताओं के ऊपर संगठनात्मक दायित्वों को तरजीह देने की उनकी इसी सोच ने उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच अत्यंत विश्वसनीय बनाया है।
बूथ प्रबंधन और ‘कार्यकर्ता-प्रथम’ की कार्यशैली
संजय भाटिया की कार्यप्रणाली की सबसे बड़ी ताकत कार्यकर्ताओं के साथ उनका आत्मीय और निरंतर संवाद है। वे लो-प्रोफाइल रहकर मंचों के बजाय धरातल पर काम करने को प्राथमिकता देते हैं।
- स्पष्ट रणनीति: वे शीर्ष नेतृत्व द्वारा दिए गए बड़े से बड़े लक्ष्यों को आसान रणनीतिक चरणों में बांटकर कार्यकर्ताओं को सौंपते हैं।
- अनुशासन और समयबद्धता: हर ज़िम्मेदारी को निर्धारित समय सीमा के भीतर परिणाम में बदलना उनकी सबसे बड़ी पहचान है।
- सहज उपलब्धता: पानीपत और करनाल के अपने शुरुआती दिनों से लेकर राष्ट्रीय पटल तक पहुंचने के बावजूद, वे आम कार्यकर्ताओं और आम जनता के लिए हमेशा सहज सुलभ रहते हैं।
हरियाणा के लिए राष्ट्रीय पटल पर बढ़ा गौरव
संजय भाटिया को केंद्रीय टीम में राष्ट्रीय महासचिव की बड़ी कमान मिलने से हरियाणा भाजपा के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। यह नियुक्ति इस बात का संकेत है कि हरियाणा के संगठनात्मक मॉडल और चुनावी रणनीतियों को अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा।
एक ओर जहां वे राज्यसभा सदस्य के रूप में देश के नीतिगत विषयों पर अपनी छाप छोड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में वे विभिन्न राज्यों का प्रवास कर पार्टी के संगठन को अभेद्य बनाने की दिशा में काम करेंगे। संजय भाटिया की यह नई भूमिका न केवल उनके राजनीतिक जीवन का स्वर्णिम अध्याय है, बल्कि हरियाणा के राजनीतिक परिदृश्य के लिए भी एक मील का पत्थर है।
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