नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13वीं बार ऐतिहासिक लालकिले की प्राचीर से तिरंगा फहराया, जहाँ उनका पारंपरिक राजस्थानी ‘बंधेज’ साफा (पगड़ी) देश भर में सांस्कृतिक गौरव और फैशन की चर्चाओं के केंद्र में रहा। सफेद कुर्ता-पायजामा और जैकेट के साथ गहरे लाल रंग की सफेद बिंदियों वाली बंधेज पगड़ी पहनकर प्रधानमंत्री ने न केवल भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को नमन किया, बल्कि इसके माध्यम से स्वदेशी और ‘वोकल फॉर लोकल’ का सशक्त संदेश भी दिया।
बंधेज पगड़ी का सांस्कृतिक महत्व और ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वतंत्रता दिवस पर पहना जाने वाला परिधान हमेशा से केवल फैशन का प्रतीक न होकर देश की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का प्रतिबिंब रहा है। इस बार उन्होंने पारंपरिक टाई-एंड-डाई कला से तैयार राजस्थानी बंधेज पगड़ी को चुना, जो भारतीय बुनकरों और कारीगरों की कड़ी मेहनत व शिल्प कौशल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
राजस्थान और गुजरात की सांस्कृतिक परंपराओं में बंधेज कला को अत्यंत पवित्र, गौरवशाली और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, विवाह समारोह अथवा राष्ट्रीय पर्व पर इसे धारण करना सम्मान की बात मानी जाती है। प्रधानमंत्री ने इस परिधान के ज़रिए देश के पारंपरिक वस्त्र उद्योग, स्थानीय दस्तकारों और सूक्ष्म कारीगरों को वैश्विक मंच पर प्रमोट करने का काम किया।
पगड़ी का रंग और उसकी बारीक बनावट
लालकिले के समारोह में प्रधानमंत्री का साफा मुख्य आकर्षण बना रहा। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- रंग का प्रतीक: गहरे लाल रंग का आधार भारतीय संस्कृति में शक्ति, शुभता, ऊर्जा, उत्साह और विजय का प्रतीक माना जाता है।
- बंधेज प्रिंट: लाल पृष्ठभूमि पर बारीक सफेद रंग के बिंदुओं का संयोजन टाई-एंड-डाई तकनीक की पहचान प्रस्तुत करता है।
- संतुलित परिधान: सादे और स्वच्छ सफेद कुर्ते-पायजामे के साथ यह रंग-बिरंगी बंधेज पगड़ी एक अत्यंत संतुलित, भव्य और प्रभावी छवि प्रस्तुत कर रही थी।

2014 से 2026 तक: लालकिले से पीएम मोदी के साफों का ऐतिहासिक सफर
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण से लेकर लगातार 13वें वर्ष तक रंगीन साफा पहनने की अपनी परंपरा को जारी रखा है। पिछले वर्षों में उनके द्वारा पहने गए प्रमुख साफों का कालक्रमानुसार विवरण:
- वर्ष 2025 (79वां स्वतंत्रता दिवस): उन्होंने एकरंगी अंदाज अपनाते हुए पूरे केसरिया रंग का साफा धारण किया था, जिसे केसरिया वेस्टकोट और तिरंगे स्टोल के साथ मैच किया गया था।
- वर्ष 2024: चमकीले नारंगी, गहरे हरे और पीले रंग की मोटी धारियों वाला लहरिया साफा चुना था, जिसमें लंबी टेल बनी हुई थी।
- वर्ष 2023: पीले, हरे और लाल रंगों के सम्मिश्रण वाली क्लासिक राजस्थानी बांधनी प्रिंट की पगड़ी पहनी थी।
- वर्ष 2022: “हर घर तिरंगा” अभियान को समर्पित करते हुए सफेद रंग का साफा पहना था, जिस पर केसरिया और हरी पट्टियां बनी थीं।
- वर्ष 2021: लाल डिजाइन और गुलाबी टेल वाला केसरिया साफा धारण किया था।
- वर्ष 2020 (कोरोना काल): केसरिया और क्रीम रंग का साफा चुना, साथ में सफेद-केसरिया स्टोल था जो फेस मास्क का भी काम कर रहा था।
- वर्ष 2019: राजस्थान की कपड़ा विरासत को नमन करते हुए बहुरंगी लहरिया साफा पहना था।
- वर्ष 2018: बारीक लाल डिजाइन वाला चमकीला केसरिया साफा चुना।
- वर्ष 2017: चमकीले लाल और पीले रंग का साफा, जिस पर बारीक सुनहरा क्रॉस पैटर्न बना था।
- वर्ष 2016: गुलाबी और पीले रंग का आकर्षक बांधेज साफा धारण किया।
- वर्ष 2015: पीले रंग के आधार पर लाल और गहरे हरे रंग के क्रॉस पैटर्न वाला साफा।
- वर्ष 2014: अपने पहले संबोधन के दौरान गहरे हरे रंग के कंट्रास्ट वाला चमकीला लाल जोधपुरी साफा पहना था।
हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री का साफा केवल परिधान नहीं, बल्कि भारत की भाषाई, प्रांतीय और सांस्कृतिक विविधताओं को एक सूत्र में पिरोने का एक माध्यम साबित हुआ।
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