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Tuesday, March 2, 2021

चंबल के बीहड़ और पिछड़े क्षेत्र की बदलेगी ‘तस्वीर’… जाने कैसे

चम्बल एक्सप्रेस-वे के लिए 781 करोड़ स्वीकृत
—अब चम्बल एक्सप्रेस-वे नहीं, चम्बल प्रोग्रेस-वे है
— परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से की चंबल एक्सप्रेस-वे पर चर्चा

नई दिल्‍ली / टीम डिजिटल: मध्य प्रदेश के चंबल और इससे सटे भिण्ड और मुरैना का नाम आते ही एक बार पुरानी खूंखार तस्वीर जेहन में आ जाती है, और डाकुओं का जिक्र होने लगता है, लेकिन अब मध्य प्रदेश की सरकार इसी चंबल के बीहडों में कुछ ऐसा करने जा रही है, जिससे चंबल की पूरी तस्वीर बदल जाएगी। जी हां, मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने चंबल क्षेत्र के विकास के लिए एक चम्बल एक्सप्रेस-वे बनाने जा रही है। इसके लिए 781 करोड़ स्वीकृत कर दिए हैं। केंद्र सरकार की मदद से बनने इस 309 किलोमीटर लंबे चम्बल एक्सप्रेस-वे से सब कुछ बदल जाएगा। साथ ही पडोसी राज्यों उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान का सफर भी बेहद आसान हो जाएगा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चंबल एक्सप्रेस-वे के बनने से प्रदेश के बीहड़ एवं पिछड़े क्षेत्र को औद्योगिक सेक्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे इस प्रोजेक्ट को ‘चम्बल एक्सप्रेस-वे’ नहीं ‘चम्बल प्रोग्रेस-वे’ के रूप में देखते हैं। केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी चंबल एक्सप्रेस-वे पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि यह सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसमें भारतमाला के अंतर्गत मात्र 50 प्रतिशत भूमि नि:शुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान है। मध्यप्रदेश सरकार इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 421 करोड़ की 100 प्रतिशत भूमि नि:शुल्क उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा प्रदेश सरकार आर्थिक सहयोग के रूप में मिट्टी एवं मुरम की रायल्टी के रूप में 330 करोड़ प्रदान करेगा और वन भूमि की अनुमतियों पर होने वाले व्यय के रूप में 30 करोड़ का व्यय भी स्वयं वहन करेगा। इस प्रकार राज्य शासन 781 करोड़ का सहयोग प्रदान करेगा।

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सपना चम्बल एक्सप्रेस-वे से चंबल क्षेत्र की तस्वीर बदलने का है। मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान कहा कि वे चाहते हैं कि यह प्रोग्रेस-वे पूरे चम्बल के लिए अवसर में बदले। दिल्ली जैसे महानगरों से उद्योगपति चंबल का रूख करें, इसलिए प्रयास होगा कि कम से कम समय में मुरैना पहुँचा जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगपति यहाँ आएँ और उद्योग लगाएं। उन्होंने कहा कि हम उद्योगों के लिए विशेष पैकेज देंगे। स्पेशल इकॉनामिक जोन बनाने के लिए भारत सरकार से पहल करेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि एक ऐसा कॉरीडोर बनाएंगे जिसमें रक्षा, खाद्य प्रसंस्करण, भारी उद्योग, वेयर हाउसिंग, लॉजिस्टिक एवं ट्रांसपोर्ट क्षेत्र के लिए अधोसंरचना का विकास होगा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि सचमुच में यह प्रोगेस-वे चंबल संभाग के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। तस्वीर बदलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई पावर कमेटी बनाई है, जिससे कार्यों में कोई देरी न हो।
मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि ‘एक्सप्रेस वे’ प्रदेश में 309 किलोमीटर लंबा होगा। यह श्योपुर, मुरैना एवं भिण्ड से होते हुए राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश की सीमाओं को जोड़ेगा। यह मार्ग भिण्ड में गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल (आगरा-कानपुर) मार्ग, मुरैना में नार्थ-साउथ कॉरीडोर एवं राजस्थान में दिल्ली मुम्बई कॉरीडोर से जोड़ा जायेगा। आवागमन का मार्ग सहज एवं सुविधाजनक होने से क्षेत्र को औद्योगिक निवेश प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि राज्य शासन द्वारा आर्थिक/औद्योगिक विकास के लिए रक्षा उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, भारी उद्योग, वेयर हाउसिंग, लॉजिस्टिक एवं ट्रांसपोर्ट उद्योग के रूप में विकसित किया जाएगा।

एक्सप्रेस-वे के बनने से पिछड़े क्षेत्र के विकास में मदद मिलेगी : तोमर

केन्द्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत मुख्ममंत्री चौहान ने वर्ष 2017 में भी की थी। एक्सप्रेस-वे के बनने से इस पिछड़े क्षेत्र के विकास में बहुत मदद मिलेगी।
वीडियो कान्फ्रेंस में राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चम्बल एक्सप्रेस-वे को भिण्ड-कोटा रेल्वे लाइन के साथ-साथ बनाने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि चम्बल एक्सप्रेस-वे के लिए हमारे पास 52 प्रतिशत सरकारी जमीन उपलब्ध है। इस प्रोजेक्ट के लिए शेष 48 प्रतिशत भूमि अदला-बदली मॉडल के तहत उपलब्ध करायी जायेगी। एलाइनमेंट होते ही यह जमीन निर्माण कार्य के लिए सौंप दी जायेगी।

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1 COMMENT

  1. सही मायने में यह काम शिवराज सरकार ही कर सकती थी। शिवराज चौहान जी का सपना था जो अब साकार होने जा रहा है इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं इससे चंबल क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदल जाएगी।

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