भोपाल /अरविंद तिवारी । मध्यप्रदेश की चार पारंपरिक कृषि उपजों—सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैंगनी अरहर और छत्रिय धान—को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड तथा जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त प्रयासों से हासिल हुई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे किसानों को बेहतर मूल्य, कानूनी संरक्षण, ब्रांड वैल्यू, निर्यात के अवसर और आर्थिक समृद्धि का लाभ मिलेगा। सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा जैविक, प्राकृतिक और पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रमुख लाभ
- कृषि उपजों को कानूनी संरक्षण मिलेगा।
- राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में पहचान बढ़ेगी।
- किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
- कृषि निर्यात और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।
- महाकौशल एवं आदिवासी क्षेत्रों के किसानों की आय में वृद्धि होगी।
चारों कृषि उपजों की विशेषताएं
- सिताही कुटकी: लगभग 60 दिन में तैयार होने वाली लिटिल मिलेट की देशी किस्म, सूखा एवं रोग प्रतिरोधी, कम उपजाऊ और वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त। डिंडोरी सहित महाकौशल के हजारों आदिवासी किसानों के लिए आय और पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत।
- नागदमन कुटकी: डिंडोरी जिले की स्थानीय कुटकी किस्म, औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए प्रसिद्ध।
- बैंगनी अरहर: बैंगनी रंग की फलियों वाली विशेष अरहर किस्म, प्रोटीन से भरपूर, रोग प्रतिरोधी तथा अच्छी देखभाल में 15–20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम।
- छत्रिय धान: महाकौशल क्षेत्र की पारंपरिक धान किस्म, जिसे अब जीआई टैग के माध्यम से विशिष्ट पहचान प्राप्त हुई है।
इससे पहले मध्यप्रदेश की सीहोर शरबती गेहूं और रीवा सुन्दरजा आम को भी जीआई टैग मिल चुका है। कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना ने कहा कि भविष्य में प्रदेश की अन्य विशिष्ट कृषि उपजों के लिए भी जीआई टैग प्राप्त करने की पहल जारी रहेगी।

