नई दिल्ली/चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने सोमवार को उच्च सदन (राज्यसभा) में शून्यकाल के दौरान पंजाब राज्य में तेजी से बिगड़ती कानून व्यवस्था और पैर पसारते नशीले पदार्थों के कारोबार पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गुरुओं, पीरों और स्वतंत्रता सेनानियों की पावन धरा पंजाब आज मादक पदार्थों के तस्करों, संगठित आपराधिक गिरोहों (गैंगस्टरों) और सीमा पार की विरोधी ताकतों के निशाने पर है। चुग ने आम आदमी पार्टी (AAP) नीत राज्य सरकार पर विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं, बल्कि पंजाब के नौजवानों के भविष्य और भारत की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।
NCRB आंकड़ों के हवाले से चुग का हमला
तरुण चुग ने मई 2026 में जारी गृह मंत्रालय की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ (NCRB) रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए सदन में आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत किए:
- मादक पदार्थ जब्ती व मामले: नशा तस्करी और नशीले पदार्थ रखने के 6,060 मामलों के साथ पंजाब देश भर में शीर्ष स्थान पर है।
- ड्रग ओवरडोज से मौतें: नशे की अत्यधिक खुराक (ओवरडोज) के कारण होने वाली मौतें वर्ष 2023 के 89 मामलों से बढ़कर वर्ष 2024 में 106 हो गईं।
- अपराध और स्नेचिंग: राज्य में झपटमारी (स्नैचिंग) की 1,356 घटनाएं दर्ज की गईं, जो देश में सबसे अधिक हैं। इसके अलावा 1,079 हत्याएं और एक ही साल के भीतर जेल से भागने की 48 घटनाएं सामने आई हैं।
चुग ने जोर देकर कहा कि यह विपक्षी दलों का मनगढ़ंत दावा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के प्रामाणिक आंकड़े हैं जो राज्य की गंभीर स्थिति को उजागर करते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पैदा हुआ खतरा
सदन का ध्यान सीमा पार से होने वाली घुसपैठ की ओर आकर्षित करते हुए चुग ने कहा कि पंजाब में नशीले पदार्थों का संकट अब केवल स्थानीय पुलिस प्रणाली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
सीमा सुरक्षा बल (BSF) की रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पंजाब सीमा पर मार गिराए या रोके गए ड्रोनों की संख्या वर्ष 2022 के 21 से बढ़कर वर्ष 2024 में 294 तक पहुँच गई। इन ड्रोनों के जरिए केवल हेरोइन ही नहीं, बल्कि आधुनिक हथियार, हैंड ग्रेनेड और RDX जैसे घातक विस्फोटक भी भेजे जा रहे हैं। सितंबर 2024 के बाद से सीमावर्ती जिलों के पुलिस थानों को निशाना बनाते हुए 21 से अधिक विस्फोट और ग्रेनेड हमले दर्ज किए गए हैं।
विशेष NDPS अदालतों का अभाव और न्यायपालिका की टिप्पणी
तरुण चुग ने स्मरण कराया कि नवंबर 2025 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी पंजाब में नशे की भयावहता को गंभीर संकट करार दिया था। गृह मंत्रालय की हालिया समीक्षा बैठकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 60 हजार NDPS मामले अदालतों में लंबित हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार ने एक भी ‘विशेष NDPS न्यायालय’ का गठन नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पूर्व बड़े-बड़े वादे करने वाली सरकार न तो न्याय प्रणाली सुदृढ़ कर पाई और न ही पीड़ितों के पुनर्वास की कोई प्रभावी नीति बना पाई।
केंद्र सरकार से तीन मुख्य मांगें
राज्यसभा के माध्यम से चुग ने केंद्र सरकार से तीन ठोस और त्वरित कदम उठाने की अपील की:
- विशेष अदालतों की स्थापना: नशा प्रभावित सभी जिलों में लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष NDPS न्यायालयों का गठन सुनिश्चित किया जाए।
- एंटी-ड्रोन सुरक्षा प्रणाली: पंजाब की 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक तैनात करने को प्राथमिकता दी जाए।
- विशेष पुनर्वास पैकेज: सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को अपराध और नशे से दूर रखने के लिए रोजगार और पुनर्वास का एक विशेष केंद्रीय पैकेज जारी किया जाए।
उन्होंने अंत में कहा कि यद्यपि कानून व्यवस्था राज्य का संवैधानिक विषय है, परंतु सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब की सुरक्षा से समझौता पूरे राष्ट्र की अखंडता को प्रभावित करता है।
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