भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में भव्य पंचायतन मंदिर का शिलान्यास किया, जो आने वाले समय में भारत की सनातन ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 से पहले एक विशाल एकात्म यात्रा निकाली जाएगी, जिसका भव्य समापन महाकुंभ के दौरान उज्जैन में होगा।
संतों की मौजूदगी में वैदिक अनुष्ठान के साथ भूमि पूजन
पवित्र तीर्थ क्षेत्र ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर आयोजित इस धार्मिक समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ हिस्सा लिया। देश की दिव्य संन्यास परंपरा और षड्दर्शन संत मंडल के वरिष्ठ आचार्यों के सानिध्य में 45 पवित्र शिलाओं का विधि-विधान से पूजन किया गया।
इस अवसर पर श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम् (धर्मगिरि, आंध्र प्रदेश) और दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठम् (कर्नाटक) के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर निर्माण का पावन शुभारंभ कराया।
सनातन ज्ञान और एकात्मता का प्रतीक बनेगा एकात्म धाम
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य जी ने समाज में विभिन्न उपासना पद्धतियों के बीच समरसता स्थापित करने के लिए पंचायतन पूजन की परंपरा को पुनर्जीवित किया था।
उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वाद और मां नर्मदा की कृपा से समाज में मौजूद सभी आसुरी शक्तियां और बाधाएं पराजित होंगी। मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य के सभी धार्मिक स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।
सिंहस्थ-2028 से पहले निकलेगी भव्य ‘एकात्म यात्रा’
मुख्यमंत्री ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि साल 2028 में आयोजित होने वाले उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ से पहले पूरे देश में ‘एकात्म यात्रा’ आयोजित की जाएगी।
यह यात्रा भारतीय संत परंपरा, सनातन दर्शन और आदि शंकराचार्य के अद्वैत संदेश को जन-जन तक पहुंचाएगी। यात्रा का समापन सिंहस्थ के दौरान होगा। डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि ओंकारेश्वर और उज्जैन दोनों ही धाम देश और दुनिया के लिए आंतरिक चेतना और आत्मिक शांति के नए वैश्विक केंद्र बनकर उभरेंगे।
पंचायतन मंदिर की स्थापत्य कला और वास्तुकला की खासियत
मांधाता पर्वत पर 16 फीट ऊंचे आधारभूत अधिष्ठान (जगति) पर आकार ले रहा यह मंदिर प्राचीन भारतीय वास्तुकला और मूर्तिकला के पुनरुत्थान का अनूठा उदाहरण है:
- सर्वतोभद्र गर्भगृह: मंदिर में चारों दिशाओं से प्रवेश की सुगम व्यवस्था रहेगी और मुख्य गर्भगृह सर्वतोभद्र शैली में बनेगा।
- सोमतिलक शिखर व गुंबद: मंदिर के मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का विशाल अलंकृत गुंबद होगा और शिखर सोमतिलक शैली में तैयार किया जाएगा।
- गुलाबी बलुआ पत्थर: मंदिर के निर्माण में लगभग 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का प्रयोग किया जा रहा है।
- कलात्मक स्तंभ व कलश: पूरे परिसर में 100 नक्काशीदार स्तंभ, 8 लघु संवर्णा और कुल 121 कलश स्थापित किए जाएंगे।
यह मंदिर पंचायतन शैली का जीवंत उदाहरण होगा, जहां केंद्र में महादेव और चारों कोनों पर सूर्य, विष्णु, गणेश और शक्ति स्वरूप विराजमान होंगे, जो यह संदेश देता है कि अलग-अलग देव रूपों में एक ही परम ब्रह्म की आराधना की जाती है।
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