नई दिल्ली। रविवार 10 मई 2026 को देशभर में एक साथ दस हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मी और चिकित्सा पेशेवर नवजात शिशुओं की देखभाल और जीवन रक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। नेशनल नियोनेटल फोरम (एनएनएफ) इंडिया के नेतृत्व में आयोजित यह राष्ट्रव्यापी एनआरपी प्रशिक्षण कार्यक्रम नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने और जन्म के समय शिशुओं की जान बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य
यह कार्यक्रम एनएनएफ इंडिया की प्रेसिडेंशियल एक्शन प्लान 2026 का हिस्सा है। इसका मुख्य लक्ष्य देश के स्वास्थ्यकर्मियों को बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम (NRP) का प्रशिक्षण देकर नवजात शिशुओं की देखभाल प्रणाली को मजबूत करना है। जन्म के तुरंत बाद के महत्वपूर्ण ‘गोल्डन मिनट’ में सही हस्तक्षेप से कई शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।
भारत में हर दस में से एक नवजात शिशु को जन्म के समय सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसे में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। इस पहल से शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) को और कम करने में मदद मिलेगी।
सहयोगी संस्थाएं और संगठन
यह राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम भारत सरकार, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, भारतीय फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनीकॉलॉजिस्ट्स, ट्रेंड नर्सेज एसोसिएशन ऑफ इंडिया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
एनएनएफ इंडिया के कोर्स समन्वयक डॉ. बलराज सिंह यादव ने बताया कि रविवार को एक ही दिन में पूरे देश के दस हजार से ज्यादा स्वास्थ्य पेशेवरों को यह प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह अभियान 18 से अधिक राज्यों में अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में चलाया जाएगा।
गुरुग्राम में कार्यक्रम की तैयारी
गुरुग्राम में यह प्रशिक्षण कृष्णा मेडिकेयर के सहयोग से आयोजित हो रहा है। डॉ. बलराज सिंह यादव यहां के समन्वयक हैं। इस कार्यक्रम में डॉ. जे.पी. दधीचि, डॉ. गोपाल अग्रवाल और डॉ. विनीता यादव भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।
प्रशिक्षण में क्या शामिल होगा
प्रशिक्षण का पूरा फोकस व्यावहारिक कौशल पर है। इसमें शामिल मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- भारत सरकार के एनएनएसके मॉड्यूल के अनुसार पाठ्यक्रम
- मैनिकिन पर हाथों से करने वाला सिमुलेशन प्रशिक्षण
- छोटे समूहों में एक-से-एक प्रशिक्षक मार्गदर्शन
- प्रारंभिक नवजात जीवन रक्षा तकनीकें
- बैग-एंड-मास्क वेंटिलेशन का अभ्यास
प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से पहले ऑनलाइन परीक्षा पास करनी होगी और पाठ्य सामग्री पढ़नी होगी। सफल होने पर उन्हें नेशनल नियोनेटल फोरम का बेसिक एनआरपी प्रोवाइडर प्रमाणपत्र मिलेगा, जो दो साल तक मान्य रहेगा।
किसके लिए है यह कोर्स
यह निःशुल्क बेसिक एनआरपी कोर्स निम्नलिखित लोगों के लिए तैयार किया गया है:
- बाल रोग विशेषज्ञ और नियोनेटोलॉजिस्ट
- स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
- सामान्य चिकित्सक, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट
- मेडिकल अधिकारी और रेजिडेंट डॉक्टर
- नर्स, दाई और प्रसव कक्ष से जुड़े स्वास्थ्यकर्मी
प्रतिभागियों को सत्यापन के लिए वैध पहचान पत्र साथ लाना जरूरी है।
नेतृत्व और टीम
एनएनएफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. ललन के भारती इस पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ महासचिव डॉ. अमित उपाध्याय, नेशनल चेयर पर्सन डॉ. एस. निम्बालकर, नेशनल कोऑर्डिनेटर डॉ. विकास गोयल और कन्वीनर डॉ. शरण्या मैनिकराज सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।
भविष्य की योजना
आयोजकों ने बताया कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों और कोर्स समन्वयकों को नियोकॉन-2026 में बेसिक एनआरपी ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिलेगा।
डॉ. बलराज सिंह यादव ने कहा कि प्रसव और नवजात देखभाल से जुड़े हर व्यक्ति को प्रशिक्षित होना चाहिए। जन्म के समय सही और त्वरित कार्रवाई से शिशुओं के स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होते हैं और नवजात मृत्यु दर घटाई जा सकती है।
यह अभियान “एक दिन- एक राष्ट्र-एक मिशन-हर सांस के साथ नवजात जीवन की रक्षा” के संदेश के साथ आगे बढ़ रहा है।
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