अयोध्या/हरदोई। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में एक बहुत बड़ा फेरबदल हुआ है। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की एक बेहद अहम बैठक बुलाई गई। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। चंपत राय की जगह अब भारतीय वन सेवा (IFS) के पूर्व अधिकारी कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का नया अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है।
जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने मंदिर के प्रबंधन को दुरुस्त करने के लिए अपनी तीन बड़ी प्राथमिकताओं का भी एलान कर दिया है। गौरतलब है कि कृष्ण मोहन वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने इस चढ़ावा चोरी मामले में सबसे पहले एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई थी।
जानिए कौन हैं राम मंदिर ट्रस्ट के नए अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन
कृष्ण मोहन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चंद्रपुर गांव के निवासी हैं। वर्तमान में वे हरदोई शहर के सिनेमा रोड स्थित अपने निवास स्थान से विभिन्न सामाजिक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।
उनकी शैक्षणिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत रही है:
- शिक्षा: कृष्ण मोहन ने अपनी उच्च शिक्षा लखनऊ यूनिवर्सिटी से पूरी की है।
- शुरुआती करियर: पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ वर्षों तक परमाणु ऊर्जा विभाग (Atomic Energy Department) में अपनी सेवाएं दीं।
- प्रशासनिक अनुभव: इसके बाद उनका चयन भारतीय वन सेवा (IFS) में हुआ, जहाँ उन्होंने महाराष्ट्र कैडर के अधिकारी के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- सेवानिवृत्ति और समाजसेवा: साल 2012 में वन सेवा से रिटायर होने के बाद से वे लगातार हरदोई और आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं।
ट्रस्ट में कैसे मिली जगह?
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद ट्रस्ट में एक पद रिक्त हुआ था। सितंबर 2025 में कृष्ण मोहन को सर्वसम्मति से ट्रस्ट का नया ट्रस्टी मनोनीत किया गया। ट्रस्ट द्वारा कृष्ण मोहन का चयन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि न्यास में दलित समाज का प्रतिनिधित्व पूरी तरह बरकरार रखा गया है। ट्रस्ट ने अपनी औपचारिक घोषणा में भी यह साफ किया है कि उनका जुड़ना समाज के व्यापक और समावेशी प्रतिनिधित्व की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कमान संभालते ही कृष्ण मोहन ने गिनाईं ये 3 बड़ी प्राथमिकताएं
अंतरिम महासचिव का पदभार ग्रहण करते ही कृष्ण मोहन ने मंदिर में हुई चोरी की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस घटना से देश-दुनिया के तमाम रामभक्तों को बहुत ठेस पहुंची है। उन्होंने साफ तौर पर स्वीकार किया कि मंदिर के प्रबंधन और संचालन में कुछ खामियां (लूपहोल्स) रह गई थीं, जिनका गलत तत्वों ने फायदा उठाया।
भविष्य की कार्ययोजना को लेकर उन्होंने अपनी 3 मुख्य प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं:
- प्रबंधन के लूपहोल्स को बंद करना: उनका पहला और सबसे प्रमुख लक्ष्य उन सभी तकनीकी और प्रशासनिक कमियों को तुरंत दूर करना है, जिनकी वजह से यह घटना घटी, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसा कभी न हो सके।
- दोषियों को कड़ी सजा दिलाना: चढ़ावा चोरी की इस वारदात को अंजाम देने वाले सभी आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा कर उन्हें सख्त से सख्त सजा दिलवाना उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है।
- ट्रस्ट की छवि और जन-विश्वास को बहाल करना: इस विवाद से समाज में जो अविश्वास पैदा हुआ है और ट्रस्ट की छवि धूमिल हुई है, उसे सभी ट्रस्टियों के सहयोग से दोबारा ठीक करना और रामभक्तों का अटूट विश्वास फिर से स्थापित करना उनका अंतिम लक्ष्य है।
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