प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी प्रयागराज में लोक संस्कृति विकास संस्थान द्वारा संस्कृति विभाग के विशेष सहयोग से आयोजित 10 दिवसीय लोक गायन एवं कथक नृत्य कार्यशाला का भव्य समापन हो गया। इस प्रस्तुतिपरक कार्यशाला का समापन समारोह आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के ‘दयानंद सभागार’ में बेहद गरिमामय और उत्सवपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
समापन कार्यक्रम के दौरान कार्यशाला के युवा प्रतिभागियों ने मंच पर लोक गायन और कथक नृत्य की एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें देखकर वहां उपस्थित पूरा जनसमुदाय भावविभोर हो उठा। सभागार में मौजूद दर्शकों ने लगातार तालियों की गड़गड़ाहट से नन्हें और युवा कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
यह पूरा सांस्कृतिक आयोजन लोक संस्कृति विकास संस्थान के चेयरमैन शरद कुमार मिश्र के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की संयोजिका आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के संगीत विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रंजना त्रिपाठी रहीं। इस भव्य समापन समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रयागराज के महापौर गणेश केसरवानी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में जानी-मानी मोटिवेशनल स्पीकर ऋचा सिंह उपस्थित रहीं। इस खास मौके पर पूर्व आईएएस अधिकारी आर.एस. वर्मा, पूर्व सीएमओ डॉ. पी.के. सिन्हा और सुप्रसिद्ध कवयित्री प्रीता बाजपेयी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ाया।

प्रशिक्षकों की मेहनत लाई रंग, अतिथियों ने की मुक्त कंठ से सराहना
इस 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान प्रतिभागियों को लोक गायन की बारीकियां गुरु मनोज कुमार ने सिखाईं, जबकि पारंपरिक कथक नृत्य का गहन प्रशिक्षण प्रिया शांति द्वारा दिया गया। इन दोनों अनुभवी प्रशिक्षकों के बेहतरीन मार्गदर्शन का ही नतीजा था कि बेहद कम समय (महज 10 दिनों) में ही प्रतिभागियों ने कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय दक्षता हासिल कर ली। मंच पर बच्चों के आत्मविश्वास और मंचीय प्रस्तुति को देखकर समारोह में आए सभी अतिथियों ने उनकी मुक्त कंठ से सराहना की।
मुख्य अतिथि और महापौर गणेश केसरवानी ने अपने संबोधन में कहा, “लोक संस्कृति हमारी वास्तविक पहचान और अमूल्य विरासत है। इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम बनते हैं। बच्चों की प्रस्तुतियां वाकई सराहनीय और अद्भुत रहीं।”
कला से बढ़ता है बच्चों का आत्मविश्वास
विशिष्ट अतिथि ऋचा सिंह ने युवा कलाकारों को प्रेरित करते हुए कहा, “कला किसी भी व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास जगाने का सबसे सुंदर माध्यम है। इन दस दिनों में बच्चों ने जिस समर्पण, लगन और कड़े अनुशासन के साथ अपनी छिपी हुई प्रतिभा का प्रदर्शन किया है, वह बेहद प्रशंसनीय है।”
महाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि आर्य कन्या डिग्री कॉलेज सदैव देश की पारंपरिक संस्कृति और कला के संरक्षण व संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस तरह की व्यावहारिक कार्यशालाएं विद्यार्थियों के सर्वांगीण और मानसिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
संस्थान के चेयरमैन शरद कुमार मिश्र ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य लोक संस्कृति की लुप्त होती अमूल्य परंपराओं को सुरक्षित रखकर नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने बच्चों के उत्साह को इस कार्यशाला की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के सफल समापन पर संयोजिका डॉ. रंजना त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, आर्य कन्या डिग्री कॉलेज परिवार, संस्कृति विभाग और उपस्थित जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
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