HomeStateChhattisgarhIIM रायपुर में साय कैबिनेट का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, मंत्रियों...

IIM रायपुर में साय कैबिनेट का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, मंत्रियों ने सीखे AI और डिजिटल गवर्नेंस के गुर

Cabinet Chintan Shivir Raipur: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में IIM रायपुर में कैबिनेट का दो दिवसीय चिंतन शिविर शुरू हुआ। मंत्रियों ने गौर गोपाल दास, अभय करंदीकर और नीति आयोग के सदस्यों से डिजिटल गवर्नेंस और AI के गुर सीखे।

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

रायपुर। लोकतंत्र में चुनाव जीतना सिर्फ एक शुरुआत है, लेकिन असली परीक्षा तब शुरू होती है जब सरकार को जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना होता है। बदलती चुनौतियों के बीच असरदार नेतृत्व देना और विकास की रफ्तार को तेज करना ही किसी भी सरकार की असली कामयाबी है। इसी उद्देश्य के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (CM Vishnudeo Sai) के नेतृत्व में राज्य मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन-प्रशिक्षण शिविर’ शनिवार से भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर में शुरू हुआ।

शिविर के पहले ही दिन मंत्रियों ने कुशल नेतृत्व, जीवन-मूल्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने जैसे गंभीर विषयों पर देश के जाने-माने विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लिया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सभी मंत्रियों के ठहरने का प्रबंध भी आईआईएम (IIM) परिसर के भीतर ही किया गया है, ताकि पूरा माहौल बिना किसी बाहरी भटकाव के एकाग्र, संवादपूर्ण और मंथन का मंच बन सके।

विकसित भारत के लक्ष्य के साथ छत्तीसगढ़ का नया खाका

केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ कदम मिलाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार भी अपनी प्रशासनिक व्यवस्था और शासन की तैयारी को एक बिल्कुल नए ढांचे में ढाल रही है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षा के मोर्चे पर स्थितियां बदलने के बाद, अब सरकार का पूरा ध्यान वहाँ के चौतरफा विकास, नए निवेश को आकर्षित करने, कृषि को बढ़ावा देने, पर्यटन को निखारने और दूर-दराज के आदिवासी इलाकों तक सरकारी योजनाओं की तेज व असरदार डिलीवरी करने पर है। यही कारण है कि साय सरकार अपने पूरे मंत्रिमंडल को नई पीढ़ी की चुनौतियों और जन-अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करने में पूरी ताकत से जुट गई है।

आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास से सीखा जीवन का संतुलन

इस महत्वपूर्ण चिंतन शिविर के पहले दिन के पहले सत्र की शुरुआत देश के प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास के व्याख्यान से हुई। उन्होंने मंत्रियों के साथ संवाद करते हुए कुशल नेतृत्व क्षमता, मानवीय जीवन-मूल्य, आंतरिक मानसिक संतुलन और सार्वजनिक जीवन में संवेदनशीलता बनाए रखने जैसे गूढ़ विषयों पर गहराई से चर्चा की। यह सत्र इस बात का साफ संकेत था कि आज के दौर में एक जनप्रतिनिधि या मंत्री की भूमिका केवल अपने मंत्रालयों की फाइलों और विभागीय कामकाज को निपटाने तक सीमित नहीं है।

उन्हें जनता के बीच अटूट भरोसे का केंद्र बनना होगा, कठिन परिस्थितियों व भारी दबाव के बीच संतुलित और सही निर्णय लेने होंगे तथा लगातार बदलती जन-आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक बेहद संवेदनशील नेतृत्व प्रदान करना होगा। क्योंकि, शासन की वास्तविक गुणवत्ता केवल कागजी योजनाओं से नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने वाले नेतृत्व की सोच और दृष्टिकोण से तय होती है।

Cabinet Chintan Shivir: IIM रायपुर में साय मंत्रिमंडल का प्रशिक्षण शिविर
Cabinet Chintan Shivir: IIM रायपुर में साय मंत्रिमंडल की ‘नई पाठशाला’; विकसित छत्तीसगढ़ और बस्तर के विकास के लिए मंत्रियों ने सीखे AI और डिजिटल गवर्नेंस के गुर

गवर्नेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा का उपयोग

शिविर में बदलते समय की मांग यानी आधुनिक तकनीक और भविष्य की शासन-व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया। तकनीकी विशेषज्ञ अभय करंदीकर ने पूरे मंत्रिमंडल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा-आधारित निर्णय (Data-driven decisions) लेने की प्रक्रिया और डिजिटल गवर्नेंस की तेजी से बदलती वैश्विक भूमिका के बारे में विस्तार से समझाया। इस सत्र का संदेश बेहद स्पष्ट था—आने वाले समय में केवल उसी सरकार को सबसे प्रभावी और जनहितैषी माना जाएगा, जो आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ अपनी सुविधा के लिए नहीं, बल्कि त्वरित फैसले लेने, योजनाओं की बेहतर निगरानी करने और आम जनता तक पूरी पारदर्शिता के साथ लाभ पहुँचाने के लिए करे।

छत्तीसगढ़ जैसे भौगोलिक विविधता वाले राज्य में, जहाँ दूरस्थ व नक्सल प्रभावित आदिवासी अंचलों तक सरकारी योजनाओं को पहुँचाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, वहाँ AI और मजबूत डिजिटल सिस्टम प्रशासनिक मशीनरी को अधिक सक्षम और उत्तरदायी बना सकते हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बस्तर का भविष्य

छत्तीसगढ़ की जमीनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद का सत्र बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, कृषि मूल्य श्रृंखला (Agriculture Value Chain) को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर लघु उद्योगों व ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने तथा पूरी तरह से गांव-केंद्रित विकास (Village-centric development) की आवश्यकता पर बल दिया।

चूंकि छत्तीसगढ़ की अधिकांश अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार गांव, पारंपरिक खेती और वनोपज (Forest Produce) हैं, इसलिए राज्य के विकास की दिशा तभी टिकाऊ और स्थायी मानी जाएगी जब उसमें किसान, ग्रामीण रोजगार और स्थानीय बाजारों को सबसे केंद्र में रखा जाएगा।

इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम की पृष्ठभूमि के केंद्र में बस्तर का इलाका भी प्रमुखता से शामिल है। बस्तर के लिए अब अगला चरण केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि तेज विकास, जनविश्वास की बहाली और युवाओं के लिए नए अवसरों के निर्माण का है। वहाँ सड़कों का जाल बिछाने, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने, पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों की आजीविका को सुरक्षित करने के लिए शासन की नई सोच और त्वरित डिलीवरी बेहद जरूरी है।

ऐसे में मंत्रियों को आधुनिक प्रशासन, लेटेस्ट तकनीक और जनकेंद्रित नीतियों की समझ से लैस करना सीधे तौर पर बस्तर के उज्जवल भविष्य को सुनिश्चित करता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस चिंतन शिविर को बदलते समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि सरकार को निरंतर सीखते रहना होगा, समय-समय पर स्वयं का मूल्यांकन करना होगा और भविष्य की सभी चुनौतियों के अनुरूप खुद को सदैव तैयार रखना होगा।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Women Express पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related News

Delhi epaper

Prayagraj epaper

Kurukshetra epaper

Ujjain epaper

Latest News