नई दिल्ली/जम्मू। जम्मू और कश्मीर में रेल कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 30 अप्रैल 2026 को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से श्रीनगर-जम्मू वंदे भारत एक्सप्रेस की विस्तारित सेवा को झंडी दिखाएंगे। पहले केवल कटरा तक चलने वाली इस ट्रेन को अब जम्मू तवी तक बढ़ाया गया है और इसकी क्षमता 8 कोच से बढ़ाकर 20 कोच कर दी गई है।
रेल मंत्री इस मौके पर USBRL कॉरिडोर पर स्थित अंजी खाद ब्रिज और चेनाब ब्रिज का भी निरीक्षण करेंगे। नियमित सेवा 2 मई 2026 से शुरू होगी, जो यात्रियों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को एक ही ट्रेन में बिना बदलाव के सफर का मौका देगी।
वंदे भारत ट्रेन का विस्तार: बढ़ी हुई क्षमता और नई सुविधा
भारतीय रेलवे ने जम्मू-कश्मीर में यात्रा को आसान बनाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। पहले 6 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कटरा-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई थी। तब यह ट्रेन सिर्फ 8 कोच की थी। लगातार फुल होने और यात्रियों की मांग को देखते हुए अब इसे 20 कोच का बनाया गया है। इससे सीटों की संख्या काफी बढ़ गई है, जिससे रिजर्वेशन और वेटिंग लिस्ट पर दबाव कम होगा।
30 अप्रैल को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जम्मू तवी स्टेशन से इस विस्तारित ट्रेन को फ्लैग ऑफ करेंगे। इसके बाद वे यूधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) प्रोजेक्ट के दो बड़े इंजीनियरिंग स्ट्रक्चर – अंजी खाद ब्रिज और चेनाब ब्रिज – का निरीक्षण भी करेंगे।
ट्रेन का समय सारणी और संचालन
विस्तारित जम्मू तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस की नियमित सेवा 2 मई 2026 से शुरू होगी। कुल दूरी लगभग 266 किलोमीटर है। दो पेयर ट्रेनें चलेंगी:
पहली जोड़ी (ट्रेन नंबर 26401) जम्मू तवी से सुबह 6:20 बजे रवाना होगी। यह कटरा, रियासी और बनिहाल स्टेशनों पर रुकेगी और श्रीनगर दोपहर 11:10 बजे पहुंचेगी। वापसी (ट्रेन नंबर 26402) श्रीनगर से दोपहर 2:00 बजे चलेगी और जम्मू तवी शाम 6:50 बजे पहुंचेगी। यह सेवा मंगलवार को छोड़कर हफ्ते में छह दिन चलेगी।
दूसरी जोड़ी (ट्रेन नंबर 26404) श्रीनगर से सुबह 8:00 बजे रवाना होगी। यह बनिहाल और कटरा पर रुककर जम्मू तवी दोपहर 12:40 बजे पहुंचेगी। वापसी (ट्रेन नंबर 26403) जम्मू तवी से दोपहर 1:20 बजे चलेगी और श्रीनगर शाम 6:00 बजे पहुंचेगी। यह बुधवार को छोड़कर हफ्ते में छह दिन चलेगी।
इस व्यवस्था से यात्रियों को सुबह और दोपहर दोनों समय में दोनों तरफ से ट्रेन मिल सकेगी। इससे प्लानिंग आसान हो जाएगी।
तीर्थयात्रियों के लिए आसान सफर
श्री माता वैष्णो देवी की यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह बदलाव बहुत फायदेमंद है। पहले कटरा पहुंचकर ट्रेन बदलनी पड़ती थी या अलग से सड़क का इंतजाम करना पड़ता था। अब जम्मू तवी से सीधे कटरा और फिर श्रीनगर तक एक ही ट्रेन में सफर हो सकेगा।
जो श्रद्धालु वैष्णो देवी दर्शन के साथ अमरनाथ यात्रा भी करना चाहते हैं, उनके लिए यह और भी सुविधाजनक है। पहलगाम और बालटाल बेस कैंप श्रीनगर से जुड़े हैं। अब पूरा सर्किट बिना ट्रेन बदलें पूरा किया जा सकता है। इससे समय बचता है और कनेक्शन मिस होने की टेंशन भी नहीं रहती।
पर्यटकों को मिलेगा नया अनुभव
जम्मू और कश्मीर पर्यटन के लिए मशहूर है। अब जम्मू एयरपोर्ट पर उतरने वाले पर्यटक सीधे जम्मू तवी स्टेशन से वंदे भारत में बैठकर श्रीनगर पहुंच सकेंगे। रास्ते में शिवालिक की पहाड़ियां, चेनाब और अंजी ब्रिज जैसे इंजीनियरिंग के कमाल, हिमालय की सुरंगें और खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे।
सड़क यात्रा में होने वाली देरी, मौसम की समस्या या बंद सड़कों से अब राहत मिलेगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। देश-विदेश के ज्यादा से ज्यादा पर्यटक घाटी की सुंदरता का लुत्फ उठा सकेंगे।
स्थानीय लोगों के लिए सुविधा
जम्मू, कटरा, रियासी और कश्मीर घाटी के निवासियों के लिए यह विस्तार लंबे समय से चली आ रही परेशानी को दूर करेगा। पहले श्रीनगर से जम्मू कॉलेज जाने वाले छात्र, दोनों राजधानियों के बीच काम करने वाले अधिकारी या अस्पताल जाने वाले मरीजों को कटरा में ट्रेन बदलनी पड़ती थी। अब यह झंझट खत्म हो गई है।
खासकर सर्दियों में जब जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे बर्फबारी से बंद हो जाता है, तब रेलवे लाइन जीवन रेखा बन जाती है। वंदे भारत ट्रेन माइनस 20 डिग्री तापमान में भी चलने के लिए तैयार है। इसमें हीटेड विंडशील्ड और एडवांस हीटिंग सिस्टम लगे हैं।
व्यापार और अर्थव्यवस्था को फायदा
कश्मीर की अर्थव्यवस्था पशमीना शॉल, अखरोट की लकड़ी की नक्काशी, हैंड नॉटेड कार्पेट और केसर जैसे उत्पादों पर टिकी है। व्यापारी और कारीगर अब जम्मू और श्रीनगर के बीच तेजी से आ-जा सकेंगे। समय और खर्च दोनों बचेंगे।
ट्रेड फेयर में जाने वाले कारीगर, फल निर्यातक या हैंडीक्राफ्ट सोर्स करने वाले बिजनेसमैन को फायदा होगा। छोटे व्यापारियों के लिए भी यात्रा आसान हो गई है। रास्ते के स्टेशनों पर भी बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार बढ़ सकता है।
अंजी और चेनाब ब्रिज: इंजीनियरिंग के अनोखे नमूने
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अपने दौरे में अंजी खाद ब्रिज और चेनाब ब्रिज का निरीक्षण करेंगे। अंजी खाद ब्रिज भारत का पहला केबल स्टेड रेलवे ब्रिज है। यह अंजी नदी की घाटी से 331 मीटर ऊंचाई पर है और 96 हाई टेंसाइल केबल्स से लटका हुआ है।
चेनाब रेल ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। यह नदी तल से 359 मीटर ऊंचा है, जो एफिल टावर से भी ज्यादा है। दोनों ब्रिज यूएसबीआरएल प्रोजेक्ट की रीढ़ हैं।
यूएसबीआरएल (USBRL) प्रोजेक्ट: एक दशक की मेहनत
उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक प्रोजेक्ट पर पिछले कई सालों से काम चल रहा है। इसकी कुल लागत लगभग 43,780 करोड़ रुपये है। इसमें 36 सुरंगें (कुल 119 किलोमीटर) और 943 पुल शामिल हैं।
यूधमपुर-कटरा सेक्शन 2014 में शुरू हुआ था। कश्मीर घाटी में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन फरवरी 2024 में चली। जनवरी 2025 में जम्मू रेलवे डिवीजन बनाया गया। जम्मू तवी, कटरा, उधमपुर और बुदगाम स्टेशनों का अमृत भारत स्टेशन स्कीम के तहत विकास हो रहा है।
यह प्रोजेक्ट हिमालय की चुनौतीपूर्ण भूगोल में बना है। अब वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन इसके फायदे लोगों तक पहुंचा रही है।
जम्मू तवी से श्रीनगर तक वंदे भारत का विस्तार जम्मू और कश्मीर के आम लोगों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और व्यापारियों के लिए एक बड़ा सुधार है। बढ़ी हुई क्षमता और सीधा कनेक्शन यात्रा को आरामदायक और विश्वसनीय बनाएगा। सर्दियों में भी यह सेवा भरोसेमंद रहेगी। रेल मंत्री का दौरा और ब्रिजों का निरीक्षण इस प्रोजेक्ट की प्रगति को और मजबूत करेगा।
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