कुरुक्षेत्र/विनोद कुमार गर्ग । प्राकृतिक एवं पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दीनबंधु फाउंडेशन ने प्राकृतिक कृषि मिशन को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरेंद्र ढुल ने कहा कि संस्था आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने और उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित विशेष प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण शिविर में किसानों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा दीनबंधु फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान पद्मश्री डॉ. हरिओम ने प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए इसके वैज्ञानिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों पर विस्तार से जानकारी दी तथा किसानों से रसायन मुक्त खेती अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में महान किसान नेता दीनबंधु सर छोटूराम के किसान हित में किए गए ऐतिहासिक योगदान और उनके प्रेरणादायी जीवन पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि किसानों के अधिकारों की रक्षा और कृषि सुधारों के लिए उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. शिवेंदु प्रताप सोलंकी ने कृषि विविधीकरण, बागवानी, कृषि वानिकी और सागवान जैसी वृक्ष आधारित खेती के आर्थिक लाभों की जानकारी देते हुए किसानों को प्राकृतिक कृषि के साथ इन विकल्पों को अपनाने की सलाह दी।
शिविर की विशेषता यह रही कि एक ओर किचन गार्डन से जुड़े माली मंगल यादव प्रशिक्षण लेने पहुंचे, वहीं कैथल जिले के बड़े कृषि फार्म के संचालक संजीत जुलानी खेड़ा भी अपने दोनों बेटों के साथ प्राकृतिक कृषि का प्रशिक्षण लेने आए। इससे स्पष्ट हुआ कि प्राकृतिक खेती के प्रति छोटे और बड़े दोनों वर्गों के किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्राकृतिक कृषि फार्म और गोशाला का भ्रमण किया तथा देसी गाय आधारित प्राकृतिक कृषि मॉडल को नजदीक से समझा। किसानों ने इन प्रयोगों को अपने खेतों में अपनाने का संकल्प भी लिया।
प्राकृतिक कृषि रिसर्च एवं ट्रेनिंग सेंटर
सुरेंद्र ढुल ने बताया कि दीनबंधु फाउंडेशन शीघ्र ही तितरम क्षेत्र में प्राकृतिक कृषि रिसर्च एवं ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करेगा। इस केंद्र के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती की नई तकनीकों, देसी गाय आधारित कृषि पद्धतियों तथा कम लागत में अधिक उत्पादन के उपायों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर डीएपी, के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति और पर्यावरण प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में प्राकृतिक खेती ही टिकाऊ कृषि का प्रभावी विकल्प है। फाउंडेशन प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाएगी और किसानों को रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करेगी।
‘फैमिली फार्मर पायलट प्रोजेक्ट’
सुरेंद्र ढुल ने अपने अनुभव साझा करते हुए किचन गार्डन से लेकर बड़े खेतों तक प्राकृतिक खेती शुरू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘Family Farmer Pilot Project’ भविष्य में मील का पत्थर साबित हो सकता है, जिससे गांवों, शहरों और महानगरों के परिवारों को प्राकृतिक खाद्य उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। कार्यक्रम के सफल आयोजन की व्यवस्थाएं रामनिवास आर्य ने संभाली। समापन अवसर पर सुरेंद्र ढुल ने गुरुकुल प्रबंधन समिति, पद्मश्री डॉ. हरिओम, डॉ. शिवेंदु प्रताप सोलंकी, प्रशिक्षकों और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि आचार्य देवव्रत के मार्गदर्शन में यह अभियान देशभर में प्राकृतिक कृषि, किसानों की आय वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देगा।
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