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Heart Disease in Women: दिल की बीमारी अब महिलाओं के लिए भी बड़ा खतरा, पुरुषों से अलग हैं लक्षण, जानें बचाव के तरीके

Heart Disease in Women: दिल की बीमारी सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए भी यह एक बड़ा खतरा बन चुकी है। दुनिया भर में हृदय रोग मौत का प्रमुख कारण है और महिलाओं में इसकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।

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Heart Disease in Women: दिल की बीमारी सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए भी यह एक बड़ा खतरा बन चुकी है। दुनिया भर में हृदय रोग मौत का प्रमुख कारण है और महिलाओं में इसकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई महिलाएं अपने जोखिम को लेकर जागरूक नहीं होतीं, क्योंकि लक्षण अक्सर पुरुषों से अलग और कम स्पष्ट होते हैं। इससे पहचान में देरी होती है और इलाज प्रभावित होता है।

चिकित्सा अध्ययनों में महिलाओं की भागीदारी कम होने के कारण समझ मुख्य रूप से पुरुष-केंद्रित रही है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर ज्यादातर मामलों में इस बीमारी से बचाव संभव है।

महिलाओं में दिल की बीमारी (Heart Disease in Women): बढ़ता जोखिम

आज के समय में दिल की बीमारी (heart disease in women) महिलाओं की मौत का एक प्रमुख कारण बन गई है। भारत में भी हृदय रोग महिलाओं में महत्वपूर्ण मौत का कारण है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में हार्ट अटैक या अन्य हृदय संबंधी समस्याओं की पहचान अक्सर देर से होती है। इसका मुख्य कारण लक्षणों की अलग प्रकृति है, जो पुरुषों में देखे जाने वाले क्लासिक लक्षणों से भिन्न होते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं में हृदय रोग की घटनाएं बढ़ रही हैं। भारत में महिलाओं में इस्केमिक हार्ट डिजीज (ischemic heart disease) मौत के प्रमुख कारणों में शामिल है। कई बार महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य थकान, गैस या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।

महिलाओं और पुरुषों में दिल के लक्षणों में अंतर

पुरुषों में हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण सीने में तेज दर्द या दबाव होता है। वहीं महिलाओं में लक्षण अक्सर atypical होते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • सांस फूलना या shortness of breath
  • अत्यधिक थकान या unusual fatigue
  • जी मिचलाना, उल्टी जैसा महसूस होना
  • पीठ, गर्दन, जबड़े या कंधे में असहजता या दर्द
  • पेट में जलन या अपच जैसी समस्या

ये लक्षण कभी-कभी सीने के दर्द के बिना भी दिख सकते हैं। महिलाओं में छोटी रक्त वाहिकाओं की समस्या (coronary microvascular disease) भी अधिक देखी जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि ये संकेत अक्सर गैस, तनाव या मांसपेशियों की समस्या समझ लिए जाते हैं। परिणामस्वरूप, समय पर इलाज नहीं मिल पाता और जटिलताएं बढ़ जाती हैं।

क्लिनिकल ट्रायल्स और डायग्नोस्टिक तरीके लंबे समय तक पुरुषों पर आधारित रहे हैं। इसलिए महिलाओं में दिल की बीमारी की समझ अभी विकसित हो रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि महिला और पुरुष का हृदय पूरी तरह एक समान तरीके से काम नहीं करता। महिलाओं के हृदय और रक्त वाहिकाएं आकार में छोटी हो सकती हैं, जिससे बीमारी का पैटर्न अलग होता है।

महिलाओं में दिल की बीमारी के खास जोखिम कारक

कुछ जोखिम कारक महिलाओं में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इनमें शामिल हैं:

  • उच्च रक्तचाप (hypertension)
  • डायबिटीज (diabetes), जो महिलाओं में हृदय रोग का जोखिम कई गुना बढ़ा सकता है
  • मोटापा और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली
  • धूम्रपान या तंबाकू का उपयोग
  • लंबे समय का तनाव

भारतीय महिलाओं में गर्भावस्था से जुड़ी समस्याएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्री-एक्लेम्प्सिया, गेस्टेशनल डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां बाद में हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती हैं। कई महिलाएं प्रसव के बाद अपनी दिल की जांच को प्राथमिकता नहीं देतीं। ऑटोइम्यून बीमारियां भी कुछ मामलों में जोखिम बढ़ाती हैं।

बचाव के प्रभावी उपाय: स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं

अच्छी बात यह है कि दिल की ज्यादातर बीमारियों से बचाव संभव है। ये बीमारियां अक्सर जीवनशैली से जुड़ी होती हैं।

स्वस्थ आहार सबसे जरूरी है। इसमें ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और कम वसा वाले प्रोटीन शामिल करें। तला-भुना, ज्यादा नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाने से बचें। रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि, जैसे brisk walking या हल्का व्यायाम, दिल को मजबूत रखती है।

पर्याप्त नींद लें, धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दें और तनाव को नियंत्रित करने के तरीके अपनाएं। योग, ध्यान या हल्की सैर तनाव कम करने में मदद कर सकती है।

नियमित जांच और जागरूकता की जरूरत

महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को समझना चाहिए। अगर ऊपर बताए कोई भी लक्षण बार-बार महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और दिल की जांच करवाएं।

भारत में महिलाओं में दिल की बीमारी की जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। परिवार के सदस्यों को भी इसमें सहयोग करना चाहिए। डॉक्टरों का सुझाव है कि गर्भावस्था के बाद या मेनोपॉज के आसपास महिलाएं अपनी हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें।

समय पर पहचान और सही इलाज से ज्यादातर मामलों में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। महिलाओं को खुद को प्राथमिकता देनी चाहिए और अनदेखे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए। स्वस्थ आदतें अपनाकर वे न सिर्फ खुद को, बल्कि पूरे परिवार को सुरक्षित रख सकती हैं।

डिस्क्लेमर: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

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