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यूपी में आंगनबाड़ी व्यवस्था हुई हाईटेक, पोषण ट्रैकर से बदली तस्वीर, महिलाओं और बच्चों तक सीधे पहुंच रहा योजनाओं का लाभ

उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी और पोषण सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया है। राज्य में लागू पोषण ट्रैकर प्रणाली और फेस रिकग्निशन आधारित सत्यापन प्रक्रिया के जरिए 98.76 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है।

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी और पोषण सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया है। राज्य में लागू पोषण ट्रैकर प्रणाली और फेस रिकग्निशन आधारित सत्यापन प्रक्रिया के जरिए 98.76 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है। इससे योजनाओं का लाभ सही पात्र महिलाओं और बच्चों तक पहुंचाने में मदद मिली है। डिजिटल निगरानी व्यवस्था के कारण पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सेवाओं की मॉनिटरिंग भी पहले की तुलना में अधिक आसान हुई है।

पोषण योजनाओं में बढ़ी पारदर्शिता

बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तथा राज्य पोषण मिशन द्वारा संचालित पोषण ट्रैकर प्रणाली ने आंगनबाड़ी सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। अब लाभार्थियों का पंजीकरण, रिकॉर्ड प्रबंधन और सेवा वितरण डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ी है और डेटा को वास्तविक समय में अपडेट करना संभव हुआ है।

डिजिटल रिकॉर्डिंग के कारण विभागीय अधिकारियों को योजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी करने में सुविधा मिल रही है। इससे जरूरतमंद लोगों तक समय पर सेवाएं पहुंचाने में भी मदद मिल रही है।

फेस रिकग्निशन से हुआ लाभार्थियों का सत्यापन

महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार प्रदेश में फेस रिकग्निशन सिस्टम के माध्यम से 98.76 प्रतिशत लाभार्थियों का सत्यापित पंजीकरण पूरा किया जा चुका है। यह तकनीक लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही है।

इस व्यवस्था से फर्जी नामों और गलत प्रविष्टियों पर प्रभावी नियंत्रण लगा है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों को ही मिले। विभाग का मानना है कि तकनीक आधारित सत्यापन से योजनाओं की विश्वसनीयता भी मजबूत हुई है।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों का रिकॉर्ड ऑनलाइन

पोषण ट्रैकर प्रणाली के जरिए गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों से संबंधित आवश्यक जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है। इससे उनके स्वास्थ्य, पोषण और विकास से जुड़ी सेवाओं की निगरानी आसान हो गई है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अधिकारियों को समय-समय पर समीक्षा करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिल रही है। इससे सेवा वितरण की गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया है।

निगरानी और समीक्षा प्रक्रिया हुई आसान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में लागू की गई तकनीक आधारित व्यवस्थाओं ने आंगनबाड़ी और पोषण योजनाओं की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाया है। विभागीय स्तर पर अब लाभार्थियों की स्थिति, सेवाओं की उपलब्धता और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा तेजी से की जा सकती है।

सरकार का लक्ष्य महिलाओं और बच्चों को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण उपलब्ध कराना है। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।

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