नई दिल्ली। भारत को तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में ‘सेमीकॉन 1.0’ की शानदार सफलता के बाद अब ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।
इस नई और महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर ही सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के पूरे इकोसिस्टम को अत्यधिक मजबूत बनाना है। सरकार ने इस विशाल प्रोजेक्ट के लिए 1,27,500 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट तय किया है।
अब तक 12 परियोजनाओं को मंजूरी, 1.64 लाख करोड़ का निवेश
सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, देश में अब तक कुल 12 सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों (मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स) को मंजूरी दी जा चुकी है। इन सभी परियोजनाओं में 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कुल निवेश प्रस्तावित है।
मंजूर की गई इन इकाइयों में विभिन्न प्रकार की उन्नत तकनीकें शामिल हैं, जैसे:
- एक सिलिकॉन फैब
- एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब
- एक इंटीग्रेटेड गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब
- नौ पैकेजिंग यूनिट्स
ये सभी अत्याधुनिक इकाइयां देश में बनने वाले उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक उपकरण, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार (टेलीकॉम) और एयरोस्पेस समेत कई प्रमुख क्षेत्रों की चिप संबंधी जरूरतों को पूरा करेंगी।
केयन्स, माइक्रोन और सीजी सेमी में उत्पादन शुरू
एक बड़ी उपलब्धि यह भी है कि स्वीकृत 12 परियोजनाओं में से माइक्रोन, केयन्स और सीजी सेमी जैसी बड़ी कंपनियों ने पहले ही अपना व्यावसायिक उत्पादन (कमर्शियल प्रोडक्शन) शुरू कर दिया है। वहीं, एक अन्य प्रमुख यूनिट के वर्ष 2026 में अपना उत्पादन शुरू कर देने की पूरी उम्मीद जताई गई है।
इसके अलावा, सरकार ने देश के स्टार्टअप और एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को भी इस क्रांति से जोड़ा है। अब तक 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को सरकार की ओर से वित्तीय सहायता देने की मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही, 105 नए स्टार्टअप और एमएसएमई को इस उद्योग में उपयोग होने वाले बेहद आधुनिक ‘इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन’ (EDA) टूल्स तक मुफ्त पहुंच उपलब्ध कराई गई है।
सेमीकॉन 2.0 के 6 प्रमुख स्तंभ (पिलर्स)
कैबिनेट के आधिकारिक बयान के मुताबिक, सेमीकॉन 2.0 मुख्य रूप से छह बड़े स्तंभों पर आधारित होकर काम करेगा, ताकि भारत इस उद्योग का वैश्विक केंद्र बन सके:
- चिप डिजाइन को मजबूती: वर्तमान में 105 स्टार्टअप पहले से ही चिप डिजाइनिंग पर काम कर रहे हैं। अब इस तंत्र को और मजबूत बनाते हुए पूरी तरह स्वदेशी चिप, सिस्टम डिजाइन और बौद्धिक संपदा (IP) विकसित करने पर पूरा फोकस रहेगा।
- मशीनें और कच्चा माल: सेमीकंडक्टर बनाने में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों, कच्चे माल, विशेष रसायनों (केमिकल्स) और गैसों के घरेलू निर्माण व अनुसंधान (आरएंडडी) से जुड़ी कंपनियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे देश में प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग की नींव मजबूत होगी।
- नई फैब इकाइयों की स्थापना: देश की पहली सेमीकंडक्टर फैब इकाई के वर्ष 2028 तक चालू होने की संभावना है। भारत की इस नीति पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है, इसलिए अधिक से अधिक वैश्विक कंपनियों को यहां फैब लगाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
- एटीएमपी और ओसैट का विस्तार: भारत में एटीएमपी (ATMP) इकाइयों की सफलता को देखते हुए पूरी दुनिया अब देश को एक बड़े वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रही है। इसलिए अत्याधुनिक पैकेजिंग तकनीकों को भारत लाने पर जोर रहेगा।
- अनुसंधान एवं विकास (R&D): भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा 28 नैनोमीटर से लेकर 110 नैनोमीटर तकनीक के साथ शुरू हुई है। अब देश-विदेश के बड़े रिसर्च संस्थानों के साथ मिलकर इससे भी ज्यादा उन्नत तकनीकों और नए नोड्स के विकास पर काम किया जाएगा।
- कुशल मानव संसाधन (स्किल्ड मैनपावर): देश के 315 विश्वविद्यालयों में लेटेस्ट ईडीए टूल्स के जरिए छात्रों को चिप डिजाइन की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे अब तक 68,000 छात्र प्रशिक्षित हो चुके हैं। अब कॉलेज स्तर पर इस ट्रेनिंग को और गहरा व व्यापक बनाया जाएगा।
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