कोलकाता। पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें लगभग 15,105 वोटों के अंतर से हराया। यह सीट लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती थी, लेकिन 2026 के चुनाव परिणाम ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए। ममता बनर्जी 2021 में नंदीग्राम से हारने के बाद भवानीपुर उपचुनाव से विधानसभा पहुंची थीं, लेकिन इस बार सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें लगातार दूसरी बार पराजित किया।
भवानीपुर चुनाव परिणाम: वोटों का आंकड़ा
सभी 20 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद सुवेंदु अधिकारी को 73,463 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,349 वोट प्राप्त हुए। इस तरह अंतर 15,105 वोट रहा। मतदान 29 अप्रैल को दूसरे चरण में हुआ था। काउंटिंग केंद्र के बाहर कुछ देर तनाव की स्थिति भी बनी रही, जिसमें ममता बनर्जी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर आरोप लगाए।

सुवेंदु अधिकारी का सफर और पुरानी प्रतिद्वंद्विता
सुवेंदु अधिकारी एक समय ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी थे। सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए और सुवेंदु ने भाजपा का साथ चुना। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। इसके बाद ममता भवानीपुर से उपचुनाव लड़कर जीतीं।
2026 में सुवेंदु ने नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। उन्होंने पहले से ही भवानीपुर में जीत का दावा किया था, जो नतीजों में सही साबित हुआ।
भवानीपुर सीट का राजनीतिक इतिहास
भवानीपुर सीट 1951 से अस्तित्व में है। शुरुआती दिनों में कांग्रेस का यहां दबदबा था। एक बार वामपंथी दल भी जीते। बाद में यह कालीघाट नाम से जानी गई। 2011 के बाद से यह तृणमूल कांग्रेस का गढ़ बन गई थी। ममता बनर्जी इसी सीट से विधायक रहकर मुख्यमंत्री पद संभाल रही थीं। 2026 का नतीजा इस सीट के इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
चुनावी नतीजे का राजनीतिक प्रभाव
यह हार ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। भवानीपुर कोलकाता का महत्वपूर्ण क्षेत्र है और लंबे समय से टीएमसी का मजबूत आधार रहा है। सुवेंदु अधिकारी अब भाजपा के मजबूत चेहरे के रूप में उभरे हैं। इस जीत से बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
ममता बनर्जी ने हार के बाद भी अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे हिम्मत न हारें। वहीं भाजपा कार्यकर्ता इस जीत का जश्न मना रहे हैं। पूरे पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे अभी आ रहे हैं, लेकिन भवानीपुर का परिणाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि बंगाल की राजनीति में बदलाव हो रहा है। पुरानी दोस्ती और प्रतिद्वंद्विता दोनों ही अब नई लड़ाई में बदल चुकी हैं। आम voters की पसंद ने इस बार पारंपरिक गणित को बदल दिया।
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