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महिलाओं की भागीदारी अनुसंधान और विकास में बढ़ी, मोदी सरकार ने की पहल

नई दिल्ली/ अदिति सिंह। केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अनुसंधान एवं विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएँ लागू की हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने करियर के विभिन्न चरणों में एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित […]

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नई दिल्ली/ अदिति सिंह। केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अनुसंधान एवं विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएँ लागू की हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने करियर के विभिन्न चरणों में एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए ‘विज्ञान और इंजीनियरिंग में महिलाएँ-किरण (वाइज-किरण)’ पहल शुरू की है। वाइज-किरण के अंतर्गत, वाइज-पीएचडी कार्यक्रम बुनियादी और अनुप्रयुक्त विज्ञान में डॉक्टरेट अनुसंधान करने वाली महिलाओं का सहयोग करता है। वाइज-पीडीएफ और वाइज-स्कोप कार्यक्रम महिलाओं को क्रमशः पोस्ट-डॉक्टरल अनुसंधान, प्रयोगशाला-आधारित अध्ययन और प्रयोगशाला से भूमि तक अनुवादात्मक अनुसंधान में संलग्न होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

— विभिन्न योजनाएँ लागू की, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महिलाओं की रुचि बढ़ाई

बौद्धिक संपदा अधिकारों में वाइज इंटर्नशिप (वाइज-आईपीआर) कार्यक्रम बौद्धिक संपदा अधिकारों में विशेषज्ञता विकसित करने के लिए एक साल, नौकरी के साथ प्रशिक्षण प्रदान करता है। डब्लूआईडीयूएसएचआई (वैज्ञानिक ऊंचाइयों और नवाचारों को विकसित करने और आगे बढ़ाने की महिलाओं की प्रवृत्ति) एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त हो रही या सेवानिवृत्त हो चुकी, वरिष्ठ महिला वैज्ञानिकों को सक्षम बनाता है ताकि वे अपने वैज्ञानिक करियर को जारी रख सकें और आगे बढ़ा सकें। फेलोशिप कार्यक्रमों के अलावा, डीएसटी सीयूआरआईई (महिला विश्वविद्यालयों में नवाचार और उत्कृष्टता के लिए विश्वविद्यालय अनुसंधान का समेकन ) जैसी पहलों के माध्यम से संस्थागत और नीतिगत समर्थन भी प्रदान करता है. जो अनुसंधान और विकास में भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला संस्थानों में अनुसंधान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करता है; गति (संस्थानों के परिवर्तन के लिए लैंगिक उन्नति) जो संस्थानों को स्टेम करियर में महिलाओं को नेतृत्व के पदों तक बनाए रखने के लिए साक्ष्य-आधारित नीतियों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने एक विशेष योजना “जैव प्रौद्योगिकी कैरियर उन्नति और पुन: अभिविन्यास (बायोकेयर)” फेलोशिप कार्यक्रम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी और संबद्ध क्षेत्रों में महिला वैज्ञानिकों की भागीदारी को बढ़ाना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, ‘स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए मानव संसाधन विकास’ नामक केंद्रीय क्षेत्र योजना के अंतर्गत महिला वैज्ञानिक योजना (डब्लूएसएस) का क्रियान्वयन करता है। यह पहल विशेष रूप से उन महिला शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिन्होंने मातृत्व, पारिवारिक ज़िम्मेदारियों या इसी तरह के अन्य कारणों से अपने करियर में रुकावट का अनुभव किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जैव चिकित्सा और स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में अवसर प्रदान करके उन्हें सक्रिय अनुसंधान में वापस लौटने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभाशाली महिला वैज्ञानिकों को मुख्यधारा के अनुसंधान में पुनः शामिल करना है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी महिलाओं तथा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के बीच प्रौद्योगिकी अपनाने और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं के लिए प्रौद्योगिकी विकास एवं उपयोग कार्यक्रम (टीडीयूपीडब्ल्यू) योजना का क्रियान्वयन करता है। 2023 में, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने नवाचार, ग्रामीण उद्योग एवं उद्यमिता संवर्धन योजना (एस्पायर) शुरू की, जिसके अंतर्गत 301 अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएँ विशेष रूप से महिला वैज्ञानिकों के लिए स्वीकृत की गईं।

योजनाओं ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महिलाओं की रुचि बढ़ाई

इन योजनाओं ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महिलाओं की रुचि बढ़ाई है। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा जारी अनुसंधान एवं विकास सांख्यिकी 2023 में दी गई रिपोर्ट के अनुसार, बाह्य अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि से स्पष्ट है, जो 2000-01 में 13 प्रतिशत से बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई है। इस वृद्धि का श्रेय विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों को दिया जा सकता है। इसके अलावा, अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (एआईएसएचई) रिपोर्ट 2021-22 बताती है कि अब विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विषयों में कुल पीएचडी नामांकन में महिलाओं की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत है, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महिलाओं की बढ़ती रुचि और जुड़ाव को दर्शाता है। लोक सभा में एक लिखित उत्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी।

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