रायपुर/संजय मिश्रा। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ पारित कर राज्य को जोखिम (रिस्क) आधारित कारोबारी मंजूरी व्यवस्था लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना दिया। इस कानून का उद्देश्य उद्योगों और व्यवसायों के लिए सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक कागजी कार्रवाई कम करना तथा कारोबार शुरू करने और संचालित करने में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। नए अधिनियम के तहत उद्योगों और कारोबारों को उनके आकार एवं गतिविधियों के आधार पर जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। कम जोखिम वाले छोटे कारोबारों को त्वरित और आसान मंजूरी मिलेगी, जबकि बड़े उद्योगों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर डीम्ड अप्रूवल (स्वतः स्वीकृति) का लाभ मिलेगा। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को लंबी एवं जटिल अनुमोदन प्रक्रिया से राहत मिलेगी।अधिनियम के अनुसार कम जोखिम वाले कारोबारों के लिए बार-बार सरकारी निरीक्षण के स्थान पर सेल्फ-सर्टिफिकेशन और थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन की सुविधा उपलब्ध होगी। कारोबारी स्वयं नियमों के पालन का प्रमाण दे सकेंगे या अधिकृत इंजीनियर, आर्किटेक्ट अथवा विशेषज्ञ से प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे स्वीकृति प्रक्रिया तेज होने के साथ जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
नई व्यवस्था में कारोबारियों को हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति का नवीनीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। जोखिम आधारित प्रणाली के लागू होने से व्यवसायियों का समय और लागत दोनों कम होंगे तथा वे अपने कारोबार के विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
सेल्फ-सर्टिफिकेशन या विशेषज्ञ प्रमाण-पत्र का विकल्प उपलब्ध
इस कानून के तहत पानी कनेक्शन के लिए स्व-घोषणा (सेल्फ डिक्लेरेशन), औद्योगिक सोसायटी के सरल एवं समयबद्ध पंजीकरण तथा भवन निर्माण योजनाओं की मंजूरी के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन या विशेषज्ञ प्रमाण-पत्र का विकल्प उपलब्ध होगा। यदि कोई विभाग निर्धारित समय-सीमा में आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है, तो कुछ मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी। अधिनियम के अंतर्गत प्रारंभिक चरण में 8 विभागों की 43 सेवाओं को जोखिम आधारित व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अन्य सेवाओं को भी इसमें जोड़ा जा सकेगा।
जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में निगरानी समितियां गठित की जाएंगी
कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में निगरानी समितियां गठित की जाएंगी। दोनों समितियां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में कार्य करेंगी। सरकार के अनुसार इस सुधार का लाभ राज्य के लगभग 15 लाख MSME कारोबारियों को मिलेगा। सरकार का मानना है कि भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित यह व्यवस्था राज्य में पारदर्शी, सरल और उद्योग-अनुकूल वातावरण तैयार करेगी तथा निवेश और रोजगार को भी नई गति मिलेगी।

