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यूपी में शुरू हुआ फैक्ट्रियों और नौकरियों का महाजाल! 9 जोन में ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर बनेंगे सरदार पटेल औद्योगिक क्षेत्र

यूपी सरकार ने 'सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र' (SVPEIZ) योजना को मंजूरी दी है। जानें 9 हब एंड स्पोक जोन, प्लग एंड प्ले शेड्स और युवाओं को मिलने वाले फायदे।

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं को कुशल बनाने, उन्हें रोजगार देने और राज्य में उद्योगों की स्थापना को एक ही मंच पर लाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक और महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस वर्ष ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ के अवसर पर घोषित की गई सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र (SVPEIZ) परियोजना को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

इस योजना के पहले चरण के तहत प्रदेश में कुल 16 विशेष औद्योगिक केंद्रों (SVPEIZ) की स्थापना, विकास और संचालन किया जाएगा। युवाओं और उद्यमियों के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होने वाली है, क्योंकि इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश को 9 विशेष ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर आधारित औद्योगिक और कौशल विकास नेटवर्क के रूप में ढाला जा रहा है।

पहले चरण में किस विभाग और विकास प्राधिकरण को मिला क्या जिम्मा?

उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) हब बनाने के लिए सरकार ने पहले चरण में 16 केंद्रों को अलग-अलग विभागों और औद्योगिक प्राधिकरणों के माध्यम से विकसित करने का निर्णय लिया है:

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग: 05 केंद्र
  • उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA): 05 केंद्र
  • उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA): 02 केंद्र
  • यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA): 02 केंद्र
  • ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण: 01 केंद्र
  • गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GIDA): 01 केंद्र

क्या है 9 ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल और इसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्र?

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील के अनुसार, साल 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में वैश्विक निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। नए उद्योगों की जरूरत और आधुनिक तकनीकी बदलावों को देखते हुए राज्य को कुशल कामगारों (मैनपावर) की बड़ी जरूरत होगी। इसी मांग को समय रहते पूरा करने के लिए पूरे प्रदेश को 9 अलग-अलग ‘हब एंड स्पोक’ जोन में विभाजित किया गया है।

ये 9 जोन इस प्रकार निर्धारित किए गए हैं:

  1. गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद एवं हापुड़
  2. मेरठ, बागपत और बुलंदशहर (सहारनपुर मंडल के साथ)
  3. मुरादाबाद एवं बरेली मंडल
  4. आगरा एवं अलीगढ़ मंडल
  5. लखनऊ एवं अयोध्या मंडल
  6. कानपुर एवं प्रयागराज मंडल
  7. चित्रकूट, झांसी एवं विंध्याचल मंडल
  8. वाराणसी एवं आजमगढ़ मंडल
  9. गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडल

प्रत्येक जोन को वहां की स्थानीय औद्योगिक क्षमता, उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और नए निवेश की संभावनाओं को ध्यान में रखकर ही विशेष रूप से विकसित किया जाएगा।

‘वन स्टॉप’ इकोसिस्टम: ट्रेनिंग से लेकर उद्योग लगाने तक सब कुछ एक जगह

परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रत्येक SVPEIZ केंद्र को एक ‘वन स्टॉप इंडस्ट्रियल, स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट इकोसिस्टम’ के रूप में तैयार किया जा रहा है।

युवाओं और उद्यमियों को मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं:

  • कौशल विकास केंद्र: अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • तैयार भूखंड और प्लग एंड प्ले शेड: उद्यमियों को जमीन के साथ-साथ पहले से बने-बनाए कारखाने (शेड) मिलेंगे।
  • रोजगार और उद्यमिता सहायता केंद्र: युवाओं को नौकरी खोजने और नया स्टार्टअप शुरू करने में मदद की जाएगी।
  • विदेशी भाषा प्रशिक्षण व डिजिटल साक्षरता: वैश्विक स्तर पर रोजगार के लिए युवाओं को भाषा और डिजिटल स्किल्स सिखाई जाएंगी।
  • साझा सुविधा केंद्र (Common Facility Centers): परीक्षण और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए साझा मशीनरी उपलब्ध होगी।

प्लग एंड प्ले (Plug and Play) व्यवस्था के तहत नए आने वाले उद्यमियों को बिजली, पानी, सड़क और अन्य सभी बुनियादी ढांचे से लैस तैयार परिसर दिया जाएगा। इससे उन्हें खुद बुनियादी ढांचा बनाने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा और वे बेहद कम समय में अपना उत्पादन (प्रोडक्शन) शुरू कर सकेंगे।

कम जमीन वाले क्षेत्रों में बनेगा ‘फ्लैटेड फैक्ट्री’ मॉडल

परियोजना के तहत भूमि के उपयोग को बेहद आधुनिक और व्यवस्थित रखा गया है। विभिन्न गतिविधियों के लिए जैसे कौशल विकास केंद्र, व्यावसायिक जोन, औद्योगिक इकाइयां और हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) के लिए अलग-अलग हिस्से तय होंगे। जिन इलाकों में पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं होगी, वहां जगह का सही इस्तेमाल करने के लिए बहुमंजिला औद्योगिक परिसर (Multi-storey Industrial Complexes) और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल को अपनाया जाएगा।

टाटा ग्रुप के मॉडल का अध्ययन और कुशल प्रबंधन

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने से पहले उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के एक उच्च स्तरीय दल ने गुजरात और महाराष्ट्र का दौरा किया था। वहां उन्होंने टाटा समूह (Tata Group) द्वारा विकसित किए गए बेहद सफल औद्योगिक और कौशल विकास मॉडल का गहन अध्ययन किया। उसी सफल मॉडल और वैश्विक मानकों के आधार पर उत्तर प्रदेश की परिस्थितियों के अनुकूल यह अनूठा ढांचा तैयार किया गया है।

परियोजना के संचालन को अत्यधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए हर हब के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV – Special Purpose Vehicle) का गठन किया जाएगा। इस एसपीवी की कमान यानी इसका अध्यक्ष उस हब के मुख्य (प्रमुख) निवेशक को बनाया जाएगा। इससे सरकारी निर्णयों में उद्योगों की सीधी और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

जमीन मिलते ही शुरू होगा निर्माण कार्य

प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि जिन चिन्हित स्थानों पर जमीन पहले से उपलब्ध है, वहां बहुत जल्द निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। वहीं अन्य क्षेत्रों में यूपीसीडा, यीडा और यूपीईडा जैसे विकास प्राधिकरणों के माध्यम से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। ढांचागत निर्माण कार्य चलने के साथ ही युवाओं की ट्रेनिंग और स्किलिंग का काम भी समानांतर रूप से शुरू कर दिया जाएगा, ताकि जब तक उद्योग बनकर तैयार हों, तब तक फैक्ट्रियों को चलाने के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित और तैयार वर्कफोर्स मौजूद रहे।

यह परियोजना उत्तर प्रदेश को देश का सबसे मजबूत कौशल विकास, रोजगार सृजन और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम सिद्ध होने वाली है।

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