नई दिल्ली। केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आज मीडिया को संबोधित करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका विरोध किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे हमेशा आतंकवाद, हिंसा और रक्तपात के विरोधी रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि महान सिख धर्म हमेशा दुनिया को शांति, साहस, सर्वोच्च बलिदान और मानवता की निस्वार्थ सेवा का संदेश देता है। इसलिए, सिख धर्म को किसी भी रूप में आतंकवाद के साथ जोड़कर देखना पूरी तरह से अनुचित और गलत है।
सिख समुदाय का योगदान ही धर्म का वास्तविक आदर्श
केंद्रीय मंत्री ने न्यायपालिका, सशस्त्र सेनाओं, लोक प्रशासन, व्यापार, खेल, साहित्य और विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में सिख समुदाय के अद्वितीय और ऐतिहासिक योगदान का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मेहनत से बड़ा सम्मान हासिल करने वाले सिख व्यक्तित्व ही सिख धर्म के सच्चे और वास्तविक आदर्श हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि पंजाब में फैले आतंकवाद के काले दौर में हजारों निर्दोष नागरिकों, बस यात्रियों, पुलिस के जवानों और ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों ने अपनी जान गंवाई थी। यही कारण है कि आतंकवाद को कभी भी सिख धर्म के साथ जोड़कर नहीं देखा जा सकता। इस दौरान श्री बिट्टू ने उन प्रतिष्ठित और सम्मानित सिख हस्तियों के चित्र भी प्रदर्शित किए, जिन्हें वे स्वयं का और पूरे विश्व का असली प्रेरणास्रोत मानते हैं।
जसवंत सिंह खालड़ा मामले की स्वतंत्र जांच का पूर्ण समर्थन
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा से जुड़े मामलों की जांच के लिए उनकी पत्नी बीबी परमजीत कौर खालड़ा द्वारा एक स्वतंत्र आयोग गठित करने की मांग का श्री बिट्टू ने पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वे इस मांग के साथ खड़े हैं और उस दौर में मारे गए निर्दोष नागरिकों, बस यात्रियों, पुलिस कर्मियों तथा अन्य सभी लोगों की हत्याओं सहित सभी हिंसक घटनाओं की एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध (टाइम-बाउंड) जांच होनी जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि सभी विवादित तथ्यों की विधिसम्मत कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच कराई जानी चाहिए ताकि एक विश्वसनीय संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से पूरा सच समाज के सामने आ सके।
फिल्म ‘सतलुज’ के आंकड़ों पर उठाए सवाल
हालिया फिल्म ‘सतलुज’ के संदर्भ में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इतिहास को हमेशा संतुलित, निष्पक्ष और पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने फिल्म के भीतर दर्शाए गए उन दावों पर गंभीर प्रश्न उठाए, जिसमें 25,000 लोगों के कथित रूप से लापता होने अथवा अवैध रूप से अंतिम संस्कार किए जाने की बात कही गई है। श्री बिट्टू ने इस आंकड़े के स्रोत पर सवाल खड़ा किया और फिल्म में कुछ ऐतिहासिक व्यक्तियों तथा महत्वपूर्ण घटनाओं के चित्रण पर भी अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त की।
पीड़ितों के दुख का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए
अपने परिवार के व्यक्तिगत और दर्दनाक अनुभव को साझा करते हुए श्री बिट्टू ने कहा कि उनके दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह की 31 अगस्त 1995 को एक भीषण आतंकवादी हमले में हत्या कर दी गई थी। इसके ठीक कुछ ही दिनों बाद, सितंबर 1995 में जसवंत सिंह खालड़ा भी अचानक लापता हो गए थे। हिंसा के उस भयावह दौर में दोनों ही परिवारों ने गहरी पीड़ा और अपनों को खोने का दर्द झेला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ितों के इस गहरे दुख का किसी भी स्तर पर राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वे बहुत जल्द बीबी परमजीत कौर खालड़ा से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने जाएंगे। श्री बिट्टू ने आगे कहा कि वर्ष 1992 से 1995 के बीच जसवंत सिंह खालड़ा ने अपने सभी संवैधानिक अधिकारों का पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से उपयोग किया था; उस पूरी अवधि के दौरान उन्हें न तो कभी किसी गतिविधि से रोका गया और न ही उनके खिलाफ कोई एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज की गई थी।
अकाल तख्त के जत्थेदार से भावुक अपील
श्री बिट्टू ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से, जो आगामी 14 जुलाई को विशेष अरदास करने जा रहे हैं, एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि जत्थेदार साहब पंजाब में हिंसा और आतंकवाद के उस दौर में मारे गए सभी निर्दोष नागरिकों, बस यात्रियों, पुलिस के जवानों और अन्य सभी पीड़ितों की आत्मिक शांति के लिए भी पवित्र अरदास करें। उस दौर में जिन-जिन लोगों ने भी अपनी जान गंवाई, उन सभी को एक समान श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए। साथ ही, ईश्वर से यह सामूहिक प्रार्थना की जानी चाहिए कि पंजाब को भविष्य में फिर कभी ऐसे काले और हिंसक दौर का सामना न करना पड़े।
अपने संबोधन के समापन पर श्री बिट्टू ने कहा कि इतिहास का हमेशा निष्पक्ष और न्यायपूर्ण मूल्यांकन होना चाहिए। जिन भी तथ्यों पर विवाद है, उनकी कानून के दायरे में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। उन्होंने अंत में कहा कि पंजाब का सुनहरा भविष्य केवल शांति, आपसी मेल-मिलाप, सांप्रदायिक सद्भाव और हर प्रकार के आतंकवाद को पूरी तरह से नकारने में ही सुरक्षित है।
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