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पीएम स्वनिधि योजना: 75.5 लाख रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को मिले 112 लाख से ज्यादा लोन, 46% महिलाएं लाभान्वित

पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी वंचित और कमजोर वर्गों से आते हैं। इस योजना ने सूक्ष्म उद्यमों को मजबूती दी है और स्ट्रीट वेंडर्स को स्थानीय बाजार तथा शहरी निकायों से बेहतर तरीके से जोड़ा है।

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के अंतर्गत अब तक 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 112 लाख से ज्यादा लोन दिए गए हैं। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, देशभर में इन विक्रेताओं को कुल 17,800 करोड़ रुपये से अधिक का लोन वितरित किया गया है। साथ ही, ब्याज सब्सिडी और डिजिटल कैशबैक के रूप में करीब 800 करोड़ रुपये अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।

योजना की मुख्य उपलब्धियां

पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी वंचित और कमजोर वर्गों से आते हैं। इस योजना ने सूक्ष्म उद्यमों को मजबूती दी है और स्ट्रीट वेंडर्स को स्थानीय बाजार तथा शहरी निकायों से बेहतर तरीके से जोड़ा है।

योजना की शुरुआत और उद्देश्य

कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना का मुख्य लक्ष्य उन रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को सहायता पहुंचाना था, जिनका व्यवसाय महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। यह देश की पहली ऐसी सूक्ष्म ऋण योजना है जो विशेष रूप से स्ट्रीट वेंडर्स के लिए बनाई गई। असंगठित क्षेत्र के इन विक्रेताओं को औपचारिक बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाने और उनके कारोबार को बढ़ावा देने के लिए यह योजना लागू की गई।

लोन की सुविधाएं और पात्रता

इस योजना के तहत सड़क, फुटपाथ, पगडंडी या सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी ढांचे से सामान बेचने वाले या घूम-घूमकर सेवाएं देने वाले सभी लोग पात्र हैं। इसमें सब्जी-फल विक्रेता, तैयार खाने की चीजें बेचने वाले, नाई, मोची और कपड़ा धुलाई जैसी सेवाएं देने वाले लोग शामिल हैं।

योजना में बिना गारंटी के तीन चरणों में लोन उपलब्ध है:

  • पहला चरण: 10,000 रुपये
  • दूसरा चरण: 20,000 रुपये
  • तीसरा चरण: 50,000 रुपये तक

समय पर लोन चुकाने पर अगले चरण के लिए ज्यादा राशि का लोन मिल सकता है। योजना में 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, ऋण गारंटी सहायता और 30,000 रुपये तक का यूपीआई आधारित रुपे क्रेडिट कार्ड भी दिया जाता है।

डिजिटल लेन-देन और प्रशिक्षण

पीएम स्वनिधि योजना डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देती है। अब तक 55 लाख से अधिक विक्रेताओं ने 8.96 लाख करोड़ रुपये के 841 करोड़ से ज्यादा डिजिटल लेन-देन किए हैं। इन विक्रेताओं को 1,600 रुपये तक का कैशबैक भी मिला है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के साथ मिलकर योजना के तहत वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक करीब 6 लाख स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता का प्रशिक्षण मिल चुका है।

योजना का विस्तार

योजना की अच्छी प्रगति को देखते हुए सरकार ने इसे पुनर्गठित और विस्तारित करने की मंजूरी दे दी है। अब लोन वितरण की समय सीमा मार्च 2030 तक बढ़ा दी गई है। इससे और अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी।

यह योजना न केवल रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है बल्कि उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पीएम स्वनिधि योजना ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में ठोस योगदान दिया है।

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