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सरकार ने जारी किया महिला आरक्षण संशोधन मसौदा, महिलाओं को 33% आरक्षण, लोकसभा में 850 सीटें

केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को सांसदों के साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा साझा किया गया, जिसमें लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को सांसदों के साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा साझा किया गया, जिसमें लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इससे 33 प्रतिशत महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने का रास्ता साफ हो सकेगा। सरकार 16 से 18 अप्रैल तक विशेष संसद सत्र बुलाई है, जिसमें यह विधेयक पेश किया जाएगा।

महिला आरक्षण और लोकसभा सीट विस्तार का प्रस्ताव

केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून को प्रभावी बनाने के लिए संविधान में जरूरी बदलाव का मसौदा तैयार किया है। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिनमें राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य चुने जाते हैं। नए प्रस्ताव के तहत कुल सीटें 850 तक बढ़ाई जा सकती हैं, जिसमें राज्यों से सीधे चुनाव द्वारा 815 सदस्य और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्य होंगे।

यह बदलाव अनुच्छेद 81 में किया जाएगा। बिल में साफ कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व 35 से ज्यादा नहीं होगा, और उनका चुनाव संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार होगा। इससे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं दोनों में महिलाओं को एक तिहाई सीटें मिल सकेंगी, बिना मौजूदा सीटों पर असर डाले।

आबादी और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण बदलाव

विधेयक में आबादी की परिभाषा बदलने का भी प्रस्ताव है। अनुच्छेद 81 के क्लॉज (3) में संशोधन कर संसद को अधिकार दिया जाएगा कि वह सीटों के आवंटन के लिए किस जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाए। अब ‘आबादी’ का मतलब ऐसी जनगणना से होगा, जिसे संसद कानून बनाकर तय करे और जिसके आंकड़े सार्वजनिक हो चुके हों।

अनुच्छेद 82 में भी बदलाव प्रस्तावित है। पहले हर जनगणना के बाद सीटों का आवंटन होता था, अब इसे सरल बनाया जाएगा। परिसीमन आयोग की भूमिका को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि महिला आरक्षण को 2027 की नई जनगणना से अलग रखा जाए और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाए, ताकि 2029 के आम चुनाव से पहले इसे लागू किया जा सके।

रोटेशन आधार पर आरक्षण और समय सीमा

प्रस्तावित संशोधन में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण रोटेशन के आधार पर होगा। यानी कुछ समय बाद आरक्षित सीटें बदलेंगी। आरक्षण की अवधि 15 साल तय की गई है, लेकिन संसद इसे आगे बढ़ा भी सकती है। इससे महिलाओं को लंबे समय तक पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक में कोई विवादित बात नहीं है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक रंग न दें। रिजिजू ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलीय राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन करने की अपील की है। उन्होंने कहा, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम सभी दलों के समर्थन से पारित हुआ था। अब इसे लागू करने का समय है।”

विशेष संसद सत्र और राजनीतिक तैयारियां

सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा और पारित करने के लिए 16 अप्रैल से तीन दिवसीय विशेष संसद सत्र बुलाया है। भाजपा ने लोकसभा और राज्यसभा में अपने सभी सांसदों के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया है, जिसमें 16 से 18 अप्रैल तक सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

यह संशोधन विधेयक अनुच्छेद 82, 170, 330, 332 और 334A जैसे कई महत्वपूर्ण अनुच्छेदों में बदलाव लाएगा। इससे लोकसभा के साथ-साथ राज्य विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जा सकेंगी और महिला आरक्षण को सुचारू रूप से लागू किया जा सकेगा।

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कदम

यह प्रस्ताव महिलाओं को राजनीति में ज्यादा भागीदारी देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। पिछले कई दशकों से महिला आरक्षण की मांग उठ रही थी। 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ, लेकिन उसका क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन पर निर्भर था। अब सरकार इसे 2011 की जनगणना के आधार पर आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि देरी न हो।

किरेन रिजिजू ने जोर दिया कि महिला आरक्षण किसी भी रूप में राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। अगर इसमें देरी हुई तो महिलाओं के साथ अन्याय होगा। उन्होंने सभी दलों से सर्वसम्मति से समर्थन करने की बात कही।

यह बदलाव लागू होने पर लोकसभा की संरचना काफी हद तक बदलेगी। सीटों के नए आवंटन से विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व भी प्रभावित होगा। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था संतुलित है और किसी भी राज्य या समुदाय को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।

कुल मिलाकर, यह विधेयक महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने और लोकतंत्र को ज्यादा समावेशी बनाने का प्रयास है। विशेष सत्र में चर्चा के बाद विधेयक के पारित होने पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। (

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