गांधीनगर। गुजरात में कृषि क्रांति तथा किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक नया इतिहास रचा गया है। ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ (PM Kisan Yojana) के तहत शुरुआत से लेकर अब तक अर्थात कुल 22 किश्तों में राज्य के 69.25 लाख से अधिक किसान परिवारों को 23,083 करोड़ रुपए से अधिक की बड़ी सहायता सीधे उनके बैंक खातों में जमा कराई गई है।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के सुशासन के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यह योजना भारत के कृषि क्षेत्र के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच सिद्ध हो रही है। राष्ट्रीय स्तर पर भी इस योजना का विस्तार अभूतपूर्व रहा है, जिसके अंतर्गत देश के 11 करोड़ से अधिक किसानों को कुल 4.27 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक की सहायता का भुगतान कर देश के अन्नदाता को आर्थिक रूप से सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाया गया है।
गुजरात में इस यात्रा की शुरुआत प्रथम किश्त के समय राज्य के 28.65 लाख से अधिक किसानों को 572.21 करोड़ रुपए के भुगतान के साथ हुई थी, जो आज 22 किश्तें पूर्ण होने तक 69.25 लाख लाभार्थी परिवारों तक विस्तृत हो चुकी है। हाल ही में 22वीं किश्त में गुजरात के 50.54 लाख से अधिक किसान परिवारों को 1,010 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि सीधे उनके खातों में जमा की गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि योजना का विस्तार एवं उसकी सफलता हर वर्ष निरंतर बढ़ रही है, जिससे सुदूरवर्ती किसान तक सरकारी सहायता किसी भी बाधा के बिना पारदर्शी ढंग से पहुंच रही है।
राज्य के कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने पीएम किसान योजना के विषय में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, ”पीएम किसान सम्मान निधि योजना ने धरतीपुत्रों को आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान किया है। इस सहायता के कारण छोटे और सीमांत किसानों को खेती में आवश्यक बीज, उर्वरक जैसे इनपुट के लिए आर्थिक मदद प्राप्त होती है।”
सामान्यत: खरीफ या रबी फसल की बुवाई के समय किसानों को बीज, उर्वरक तथा कीटनाशक दवाएं खरीदने के लिए बड़ी वित्तीय कठिनाई का सामना करना पड़ता था, जिसके कारण पूर्व में किसान ब्याजखोरों के चक्रव्यूह में फंस जाते थे, परंतु पीएम किसान योजना अंतर्गत हर चार महीने के अंतराल पर दी जाने वाली 2,000 रुपए की किश्त किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच बनी है।
गांधीनगर जिले के दशेला गांव के किसान गोविंदभाई पटेल कहते हैं, “सरकार की ओर से वर्ष में जो तीन किश्तें सीधे बैंक खाते में मिलती हैं, उससे हमें खेती के लिए खाद, बीज तथा कीटनाशक जैसी वस्तुएँ लेने में समय पर मदद मिल जाती है, इस राशि के कारण हम मूंगफली और कपास जैसी फसलों की बुवाई निश्चिंत होकर कर पाते हैं।”
किसान रमेशभाई पटेल कहते हैं, ”मजदूरी, डीजल और मैंटेनेंस जैसे छोटे खर्चों से निपटने में ऐसी सरकारी योजनाएं ही किसान को खेत में अडिग बने रहने के लिए मजबूत आधार प्रदान करती हैं।”
इस वित्तीय समर्थन के कारण गुजरात के छोटे एवं मध्यम वर्ग के किसान समय पर उत्तम गुणवत्ता का बीज ला सके हैं, जिसके कारण भूमि की उत्पादकता तथा फसल के स्वास्थ्य में बड़ा सुधार दर्ज हुआ है। और फिर, योजना की शुरुआत में रखी गई 2 हेक्टेयर तक की भूमि सीमा को प्रधानमंत्री द्वारा व्यापक जनहित में पूर्णतः समाप्त कर दिए जाने से अब राज्य के सभी भूमिधारक किसानों को इस समान आर्थिक न्याय का लाभ मिल रहा है।
इस योजना की सबसे बड़ी और मूलभूत विशेषता यह है कि इसमें बिचौलियों या भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं है और 100 प्रतिशत राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से किसानों के खातों में जमा होती है। योजना में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने तथा वास्तविक अन्नदाता तक ही लाभ पहुँचाने के लिए सरकार ने टेक्नोलॉजी का सुदृढ़ उपयोग किया है।
इसके अंतर्गत 12वीं किश्त से भूमि के डिजिटल रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया, अर्थात ‘लैंड सीडिंग,’ अनिवार्य की गई। इसके बाद 13वीं किश्त से बैंक खाते के साथ ‘आधार सीडिंग’ और डीबीटी प्रक्रिया अनिवार्य की गई, जबकि 15वीं किश्त से ‘ई-केवाईसी’ अनिवार्य किया गया है। इस थ्री-लेयर सुरक्षा प्रक्रिया के कारण बिचौलियों की भूमिका पूर्णतः समाप्त हो गई तथा योजना का लाभ केवल और केवल वास्तविक धरतीपुत्रों को ही मिल रहा है।
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