बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने राज्य की सार्वजनिक संपत्तियों और सरकारी परिसरों में बिना आधिकारिक अनुमति के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) व अन्य संगठनों की शाखाओं या सभाओं के आयोजन पर रोक लगाने के उद्देश्य से एक नया विधेयक लाने का फैसला किया है। राज्य कैबिनेट ने इस संबंध में ‘द कर्नाटक रेगुलेशन ऑफ यूज ऑफ गवर्नमेंट प्रिमाइसेज एंड पब्लिक प्रॉपर्टी बिल, 2026’ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब पूर्व में जारी एक प्रशासनिक आदेश को उच्च न्यायालय (High Court) द्वारा स्थगित किए जाने के बाद सरकार अब विधायी प्रक्रिया के जरिए स्थायी कानूनी ढांचा तैयार कर रही है।
हाईकोर्ट के स्थगादेश का निकाला विधायी तोड़
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के गृह मंत्रालय ने 18 अक्टूबर 2025 को एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर 10 या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई थी। हालांकि, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।
अदालत के इस फैसले के बाद, राज्य सरकार ने उस पुराने आदेश को वापस लेते हुए अब एक पूर्ण विधेयक लाने का मार्ग चुना है। नया कानून बनने के बाद यह सरकारी परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों, खेल मैदानों, पार्कों, सड़कों और जलाशयों के किनारों पर किसी भी प्रकार के जमावड़े या जुलूस पर प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करेगा।
विधेयक के मुख्य प्रावधान और पंजीकरण का दायरा
प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद, किसी भी संगठन को सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूल-कॉलेजों, खेल के मैदानों या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कोई भी गतिविधि आयोजित करने से पहले संबंधित प्रशासनिक प्राधिकरण से लिखित स्वीकृति लेनी होगी।
इसके अतिरिक्त, विधेयक में बिना पंजीकरण (Unregistered) वाले संगठनों द्वारा सरकारी संपत्तियों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी शामिल है। इसका सीधा प्रभाव RSS की दैनिक शाखाओं और आयोजनों पर पड़ने की संभावना है।
राहुल गांधी का तीखा हमला और प्रियंक खरगे की मांग
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कुछ लोग लंबे समय से इनके सामने डरपोक की तरह व्यवहार करते रहे हैं, जबकि मुकाबला ऐसे लोगों से है जिन्हें देश के दर्शन या इतिहास की सही समझ नहीं है।
दूसरी ओर, राज्य के मंत्री प्रियंक खरगे लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। उन्होंने पूर्व में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सरकारी जमीनों पर लगने वाली शाखाओं में बच्चों के मन में नकारात्मक विचार भरे जाते हैं, जो संविधान की भावना और देश की एकता के विपरीत हैं। इसके अलावा, खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र भेजकर संगठन के पंजीकरण, वित्तीय स्रोतों, पदाधिकारियों और टैक्स से जुड़ी जानकारियां भी मांगी थीं।
🛠️ राजनीतिक घमासान और कानूनी बहस
सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है:
- सरकार का रुख: राज्य के मंत्री संतोष लाड ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी विशेष संगठन को निशाना बनाने के लिए नहीं लाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी संपत्तियों का उचित रखरखाव और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है।
- विपक्ष एवं कानूनी विशेषज्ञों की आपत्ति: भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कानूनी विशेषज्ञों ने इसका कड़ा विरोध किया है। एडवोकेट गिरीश का तर्क है कि यह नया नियम असंवैधानिक है और नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
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