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राकेश कुमार शर्मा बने भारतीय रेल के ‘ग्रैंड मास्टर’: 1975 यात्रियों का खोया सामान लौटाकर रचा ईमानदारी का नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सेवानिवृत्त स्टेशन प्रबंधक राकेश कुमार शर्मा ने अपने सेवा काल में 1975 यात्रियों का खोया सामान वापस लौटाकर भारतीय रेल में ईमानदारी और जनसेवा का नया उदाहरण पेश किया है।

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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सेवानिवृत्त स्टेशन प्रबंधक राकेश कुमार शर्मा ने अपने सेवा काल में 1975 यात्रियों का खोया सामान वापस लौटाकर भारतीय रेल में ईमानदारी और जनसेवा का नया उदाहरण पेश किया है। 6 अप्रैल 2016 से 31 जनवरी 2026 तक 1963 मामलों और सेवानिवृत्ति के बाद 12 अतिरिक्त मामलों में उन्होंने यात्रियों का बहुमूल्य सामान सुरक्षित वापस पहुंचाया। इस उपलब्धि को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है तथा उन्हें ‘ग्रैंड मास्टर’ की उपाधि मिली है।

राकेश कुमार शर्मा की सेवा यात्रा: 1975 खोया-पाया मामले निपटाए

राकेश कुमार शर्मा ने भारतीय रेलवे में लंबे समय तक सेवा देते हुए खोए सामान को वापस लौटाने का लगातार प्रयास किया। उन्होंने न केवल औपचारिक प्रक्रिया पूरी की, बल्कि यात्रियों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित कर सामान सुरक्षित पहुंचाया। इन मामलों में मोबाइल, लैपटॉप, पासपोर्ट, विदेशी मुद्रा, आभूषण और नकदी जैसी महत्वपूर्ण वस्तुएं शामिल थीं। लौटाए गए सामान का कुल अनुमानित मूल्य पांच करोड़ रुपये से अधिक है।

सेवा काल में दर्ज की गई उपलब्धि

श्री राकेश कुमार शर्मा ने 6 अप्रैल 2016 से 31 जनवरी 2026 तक अपने कार्यकाल में कुल 1963 खोया-पाया प्रकरणों का सफलतापूर्वक निपटारा किया। इनमें 42 विदेशी यात्रियों के मामले भी शामिल थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी सेवा भावना जारी रही और उन्होंने 12 अतिरिक्त मामलों में यात्रियों की मदद की। इस तरह कुल 1975 प्रकरण पूरे हुए।

यह संख्या भारतीय रेलवे के इतिहास में खोए सामान को वापस लौटाने के मामले में उल्लेखनीय मानी जा रही है। उन्होंने हर मामले में पूरी जिम्मेदारी ली और यात्रियों तक सामान पहुंचाने के लिए आवश्यक प्रयास किए।

विदेशी यात्रियों का सामान लौटाकर बढ़ाई भारतीय रेल की साख

42 विदेशी यात्रियों के खोए सामान को वापस पहुंचाने से भारतीय रेल की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हुई। इन यात्रियों ने भारतीय रेल व्यवस्था और कर्मचारियों की ईमानदारी की सराहना की। ऐसे मामले तब महत्वपूर्ण होते हैं जब विदेशी पर्यटक भारत आकर अपनी यात्रा के दौरान सामान खो देते हैं। राकेश कुमार शर्मा के प्रयासों से उन्होंने भारत में अपनी वस्तुएं वापस पाकर राहत महसूस की।

राकेश कुमार शर्मा बने भारतीय रेल के ‘ग्रैंड मास्टर’: 1975 यात्रियों का खोया सामान लौटाकर रचा ईमानदारी का नया रिकॉर्ड
राकेश कुमार शर्मा बने भारतीय रेल के ‘ग्रैंड मास्टर’: 1975 यात्रियों का खोया सामान लौटाकर रचा ईमानदारी का नया रिकॉर्ड

खोया सामान लौटाने की प्रक्रिया कैसे काम करती है

रेलवे स्टेशनों पर खोया सामान आमतौर पर लावारिस माना जाता है, लेकिन श्री शर्मा ने इसे केवल फाइल में बंद करने के बजाय वास्तविक मालिक तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने यात्रियों की पहचान पता करने, संपर्क करने और सामान सौंपने की पूरी प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित किया। इस कार्य में संवेदनशीलता और धैर्य की जरूरत होती है, जो उन्होंने दिखाई।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान

राकेश कुमार शर्मा की सेवाओं को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है:

  • अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार (2023) – रेल मंत्री द्वारा प्रदान
  • राष्ट्रीय गौरव सम्मान (2025)
  • समाज रत्न पुरस्कार
  • प्रेरणादीप सम्मान
  • मार्तंड सम्मान
  • यात्री रेल संचालन क्षेत्र में “संसाधनशील सहयोगी” सम्मान
  • विजय दिवस पर वेटरन्स इंडिया द्वारा विशिष्ट अतिथि सम्मान

इसके अलावा उन्हें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया गया तथा ‘ग्रैंड मास्टर’ उपाधि प्रदान की गई।

भारतीय रेल कर्मचारियों के लिए प्रेरणा

राकेश कुमार शर्मा का कार्य नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं रहा। उनके उदाहरण से भारतीय रेल के कई कर्मचारी प्रेरित हुए हैं। अब अधिक संख्या में कर्मचारी खोए सामान को लावारिस मानने के बजाय यात्री तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे पूरे सिस्टम में मानवीय दृष्टिकोण बढ़ा है।

यात्रियों के विश्वास को मजबूत किया

आज के समय में सामान खो जाने पर लोग अक्सर निराश हो जाते हैं। ऐसे में राकेश कुमार शर्मा ने यात्रियों में विश्वास जगाया कि भारतीय रेल में खोई वस्तु वापस मिल सकती है। उन्होंने सिर्फ सामान नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीद और भरोसा भी लौटाया।

सरकारी सेवा में मानवीय मूल्य

श्री शर्मा का कार्य इस बात को दर्शाता है कि सरकारी नौकरी केवल नियम पूरे करना नहीं है। इसमें समाज के प्रति संवेदनशीलता भी शामिल होती है। उन्होंने अपने पूरे करियर में इस मूल्य को बनाए रखा।

भविष्य के लिए संदेश

यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के रेलवे कर्मचारियों को प्रेरित करेगी कि ईमानदारी और निष्ठा से किया गया काम समाज और राष्ट्र के लिए उदाहरण बनता है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त स्थान पर इतने मामलों को संभालना आसान काम नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।

राकेश कुमार शर्मा की यह सेवा यात्रा भारतीय रेल की अच्छी छवि को मजबूत करने वाली है। उनकी मेहनत और समर्पण आने वाले समय में भी कई लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

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