रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन यानी ‘बिहान’ योजना ग्रामीण अंचल की महिलाओं के जीवन में तरक्की का एक नया सवेरा लेकर आ रही है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का सबसे सशक्त और असरदार माध्यम साबित हो रही है। इस मुहिम की एक बेहद गौरवमयी और प्रेरक मिसाल मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से सामने आई है।
यहाँ मनेंद्रगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम चनवारीडांड की निवासी श्रीमती रीता मिंज ने सीमित संसाधनों और गंभीर आर्थिक चुनौतियों के बीच महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने न केवल खुद का बस परिवहन व्यवसाय स्थापित किया, बल्कि आज वे समूचे क्षेत्र की महिलाओं के लिए स्वावलंबन का एक बड़ा प्रतीक बन गई हैं।
‘वसुंधरा स्व-सहायता समूह’ से शुरू हुआ सफर
रीता मिंज वर्ष 2017 में अपने गांव में गठित ‘वसुंधरा महिला स्व-सहायता समूह’ की एक बेहद सक्रिय और जागरूक सदस्य हैं। बिहान मिशन से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। इस मिशन के तहत उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता (पैसों का प्रबंधन) और स्वरोजगार शुरू करने के लिए जरूरी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। समूह से मिले इसी हौसले और सही दिशा-निर्देशों के दम पर रीता ने खुद का कोई बड़ा काम शुरू करने का साहसिक फैसला लिया।
सरकारी मदद और खुद की मेहनत से खड़ी की ‘मिंज बस ट्रांसपोर्ट’
बिहान योजना के नियमों के अनुसार, वसुंधरा समूह को आगे बढ़ने के लिए रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) और बैंक लिंकेज के माध्यम से आसान ऋण (लोन) के रूप में वित्तीय सहायता दी गई। इसी आर्थिक सहयोग और अपनी खुद की कुछ जमा-पूंजी को मिलाकर रीता मिंज ने ‘मिंज बस ट्रांसपोर्ट’ की नींव रखी। आज उनका यह बस परिवहन व्यवसाय बेहद सफलता के साथ संचालित हो रहा है। इस बिजनेस के जरिए उन्हें हर महीने करीब 80 हजार रुपये की शानदार शुद्ध आय (मुनाफा) हासिल हो रही है।
परिवार को मिला आर्थिक संबल, साहूकारों के कर्ज से मुक्ति
अपनी इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए रीता मिंज बताती हैं कि बस का काम शुरू होने के बाद से उनके परिवार के हालात पूरी तरह सुधर गए हैं।
- बच्चों की पढ़ाई: अब बच्चों को अच्छी और उच्च शिक्षा दिलाना बहुत आसान हो गया है।
- घरेलू खर्च: घर की सभी जरूरतें और आकस्मिक खर्च बिना किसी चिंता के पूरे हो रहे हैं।
- साहूकारों से मुक्ति: अब उन्हें घर चलाने या व्यवसाय के लिए किसी भी निजी ऋणदाता या ऊंची ब्याज दर वाले साहूकारों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
रीता की इस अभूतपूर्व सफलता को देखकर आसपास के गांवों की सैकड़ों महिलाएं भी बेहद प्रभावित हो रही हैं। वे भी अब स्व-सहायता समूहों से जुड़कर अपने स्तर पर कोई न कोई स्वरोजगार अपनाने के लिए कदम बढ़ा रही हैं। रीता खुद भी समूह की नियमित बैठकों में जाकर महिलाओं को बचत करने, व्यापार की बारीकियां सीखने और आत्मनिर्भर बनने के लिए लगातार प्रेरित करती हैं।
रीता मिंज का साफ कहना है कि बिहान योजना ने उन्हें सिर्फ पैसे का सहारा ही नहीं दिया, बल्कि समाज में सिर उठाकर अपने पैरों पर खड़े होने का अटूट आत्मविश्वास भी दिया है। उनकी यह शानदार सफलता साबित करती है कि अगर सरकारी योजनाओं का सही तरीके से फायदा उठाया जाए और पूरी लगन से मेहनत की जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों की साधारण महिलाएं भी बेहतरीन और बड़ी उद्यमी बन सकती हैं।
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