भारत में मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के लक्षणों से जूझ रही लाखों महिलाओं के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। दुनिया की जानी-मानी दवा निर्माता कंपनी फाइजर (Pfizer) ने भारतीय बाजार में अपनी बेहद लोकप्रिय और भरोसेमंद दवा ‘प्रेमारिन वेजाइनल क्रीम’ (Premarin Vaginal Cream) की सप्लाई को कुछ समय के लिए पूरी तरह रोक दिया है। फाइजर के इस अचानक लिए गए फैसले ने न केवल मरीजों बल्कि स्त्री रोग विशेषज्ञों (गाइनेकोलॉजिस्ट्स) की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि हमारे देश में महिलाओं के इस रोग के इलाज के लिए पहले से ही दवाओं के विकल्प बहुत सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।
फाइजर ने क्यों रोका प्रेमारिन क्रीम का आयात?
कंपनी की एशिया-पैसिफिक (APAC) मीडिया रिलेशंस की सीनियर डायरेक्टर तृप्ति वाघ ने गुरुवार को इस मामले पर आधिकारिक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) में आ रही कुछ अपरिहार्य तकनीकी दिक्कतों (Supply Challenges) के कारण कंपनी को भारत में अस्थाई रूप से इस क्रीम की सप्लाई रोकने का कठिन फैसला लेना पड़ा है। हालांकि, उन्होंने भारतीय उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए यह भी साफ किया कि फाइजर इस समस्या को जल्द से जल्द सुलझाने की पूरी कोशिश कर रही है, ताकि भारतीय बाजार में इस जरूरी क्रीम की उपलब्धता को दोबारा बहाल किया जा सके।
महिलाओं के लिए क्यों इतनी जरूरी है यह क्रीम?
प्रेमारिन क्रीम वास्तव में कई तरह के प्राकृतिक एस्ट्रोजन हार्मोन्स का एक प्रभावी मिश्रण होती है। 45 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में जब मेनोपॉज का दौर शुरू होता है, तो उनके शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से गिरने लगता है। इस हार्मोनल असंतुलन के कारण महिलाओं को कई तरह की गंभीर शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
यह क्रीम मुख्य रूप से वेजाइनल ड्राइनेस (सूखापन), संबंध बनाते समय होने वाले असहनीय दर्द और मेनोपॉज से जुड़े अन्य कष्टदायक लक्षणों को ठीक करने के लिए डॉक्टरों द्वारा पहली पसंद के रूप में प्रिस्क्राइब की जाती है। भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा और सिंगापुर जैसे विकसित देशों में भी इस क्रीम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।
भारतीय बाजार में था इस दवा का एकतरफा दबदबा
पुणे की प्रसिद्ध फार्मास्युटिकल मार्केट रिसर्च फर्म ‘फार्मारैक’ (Pharmarack) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक के पिछले 12 महीनों में भारत में इस क्रीम की 6 लाख 20 हजार से अधिक यूनिट्स की बंपर बिक्री हुई थी। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस थेरेपी श्रेणी में बिकने वाली कुल दवाओं में से आधे से अधिक हिस्सेदारी अकेले फाइजर की प्रेमारिन क्रीम की ही थी।
कमाई के लिहाज से भी इसका मार्केट में जबरदस्त दबदबा रहा है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान इस क्रीम ने भारतीय बाजार में करीब 26.6 करोड़ रुपये (2.76 मिलियन डॉलर) का कारोबार किया, जो भारत के पूरे कॉन्जुगेटेड एस्ट्रोजन मार्केट का अकेले 37% हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि साल 2022 में इसकी सालाना बिक्री महज 6.2 करोड़ रुपये थी, जो अब चार गुना से भी ज्यादा बढ़ चुकी है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय महिलाएं इस इलाज और ब्रांड पर कितना भरोसा कर रही थीं।
अब महिलाओं के पास क्या-क्या विकल्प बचे हैं?
भारत में मेनोपॉज के लक्षणों के इलाज के लिए चिकित्सा विकल्प पहले से ही बेहद सीमित हैं। मेनोपॉज के प्रति जागरूकता फैलाने वाले प्रमुख प्लेटफॉर्म ‘मेनोपॉजवाइज’ की संस्थापक और देश की जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुखप्रीत पटेल ने इस गंभीर स्थिति पर प्रकाश डाला।
विकल्पों की तुलना:
डॉ. पटेल के अनुसार, वैश्विक स्तर पर मेनोपॉज से राहत के लिए महिलाओं के पास एस्ट्रोजन क्रीम, रिंग्स और ओव्यूल्स जैसे ढेरों आधुनिक विकल्प मौजूद हैं। लेकिन अगर हम भारत की बात करें, तो यहां मुख्य रूप से सिर्फ दो ही बड़े ब्रांड उपलब्ध थे— पहला फाइजर की ‘प्रेमारिन’ और दूसरा टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स की ‘इवलॉन’ (Evalon) क्रीम।
डॉ. पटेल ने बताया कि पिछले साल के अंत से ही कई मरीज लगातार यह शिकायत कर रहे थे कि उन्हें केमिस्ट की दुकानों पर प्रेमारिन क्रीम नहीं मिल पा रही है। शुरुआती दौर में लगा कि यह पूरी दुनिया में चल रही हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) की कमी का ही एक हिस्सा है, क्योंकि अमेरिका जैसे बड़े देशों में भी इन दिनों एस्ट्रोजन पैच और प्रोजेस्टेरोन कैप्सूल की भारी किल्लत देखी जा रही है। वर्तमान में यदि आप टाटा 1MG, नेटमेड्स (Netmeds), मेडप्लस मार्ट (MedPlus Mart) या ट्रूमैड्स (Truemeds) जैसी प्रमुख ऑनलाइन फार्मेसी वेबसाइट्स पर इस क्रीम को खोजेंगे, तो यह आपको हर जगह ‘आउट ऑफ स्टॉक’ (Out of Stock) ही मिलेगी।
भारत में मेनोपॉज के मामलों में भारी बढ़ोतरी
मार्केट रिसर्च फर्म ‘ग्रैंड व्यू रिसर्च’ के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में वैश्विक एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 2.8% आंकी गई थी। यह पूरा मार्केट वर्ष 2025 में 334.5 मिलियन डॉलर का था, जिसके वर्ष 2033 तक बढ़कर 604.6 मिलियन डॉलर होने का अनुमान है।
इधर, ‘इंडियन मेनोपॉज सोसाइटी’ का आकलन है कि वर्ष 2026 तक भारत में 45 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं की आबादी करीब 40 करोड़ (400 मिलियन) के विशाल आंकड़े को पार कर जाएगी। इतनी विशाल महिला आबादी होने के बावजूद, आज भी हमारे समाज में मेनोपॉज और उससे जुड़ी मानसिक व शारीरिक तकलीफों को लेकर जागरूकता और इलाज की दर बहुत कम है। ऐसे में बाजार से एक अत्यंत आवश्यक और भरोसेमंद दवा का अचानक गायब हो जाना भारतीय महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Women Express पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

