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मत्स्य पालन के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़: अमारू गाँव बनेगा मत्स्य उत्पादन का बड़ा क्लस्टर

Chhattisgarh Fish Farming: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के अमारू गाँव को 'बिहान' और जिला प्रशासन द्वारा मत्स्य उत्पादन क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। जानिए पूरी खबर।

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, आजीविका के नए साधन तैयार करने और ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार अभिनव योजनाएं लागू की जा रही हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से पेंड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत अमारू को इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (IFC) के तहत एक प्रमुख मत्स्य उत्पादन क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह पहल ग्रामीण स्वरोजगार, महिला सशक्तीकरण और मत्स्य उद्यमिता को एक नई दिशा दे रही है।

जिला कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे के निर्देशन में अमारू के तालाब में लगभग 10 से 12 हजार मत्स्य स्पॉन (मछली के बीज) का संचयन किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज का उत्पादन कर मत्स्य पालन को एक टिकाऊ व लाभदायक आजीविका बनाना है।

बिहान योजना से स्थानीय स्तर पर मिलेगा गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से संचालित यह नवाचार ग्रामीण संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर रहा है।

अमारू मत्स्य क्लस्टर: कार्यप्रणाली

  1. तालाब में 10-12 हजार मत्स्य स्पॉन का संचयन
  2. स्पॉन के संवर्धन से गुणवत्तापूर्ण फिंगरलिंग (मत्स्य बीज) का निर्माण
  3. महिला स्व-सहायता समूहों व स्थानीय उद्यमियों को वितरण
  4. लागत में कमी, उत्पादन में वृद्धि और आत्मनिर्भरता

मत्स्य स्पॉन के विकसित होकर फिंगरलिंग (मत्स्य बीज) बनने के बाद इन्हें इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर से जुड़े मत्स्य पालकों, महिला स्व-सहायता समूहों और अन्य हितग्राहियों को दिया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर ही उत्तम गुणवत्ता के बीज मिलेंगे, जिससे परिवहन और उत्पादन लागत में कमी आएगी तथा मछली उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बहुआयामी आधार

यह योजना केवल मछली पालन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने का एक बहुआयामी प्रयास है:

  • स्थानीय रोजगार: ग्रामीणों को गांव में ही अतिरिक्त आय और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
  • महिलाओं की भागीदारी: स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनेंगी।
  • एकीकृत विकास मॉडल: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच के अनुसार कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन को जोड़कर ग्रामीण विकास का एक एकीकृत मॉडल (Integrated Model) तैयार किया जा रहा है।

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने दिया तकनीकी मार्गदर्शन

कार्यक्रम के दौरान जिला व विकासखंड स्तरीय अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, तालाबों के रखरखाव और इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के प्रबंधन की पूरी जानकारी दी। अधिकारियों का मानना है कि यह मॉडल आने वाले समय में अमारू को मत्स्य उत्पादन का एक बड़ा केंद्र बनाएगा और राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक आदर्श प्रेरणास्रोत साबित होगा।

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