नई दिल्ली। दिल्ली को मिला पहला महिला थाना, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर लगेगी लगाम। राजधानी दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के सब्जी मंडी इलाके में दिल्ली पुलिस का पहला महिला थाना शुरू हो गया है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इसका उद्घाटन किया। यह थाना महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले सभी अपराधों की जांच करेगा और पीड़ितों को सुरक्षित तथा संवेदनशील माहौल में न्याय दिलाने में मदद करेगा।
दिल्ली में पहला महिला थाना शुरू, सुरक्षा की नई दिशा
दिल्ली के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के सब्जी मंडी इलाके में शुक्रवार को दिल्ली पुलिस का पहला महिला थाना काम करने लगा है। यह थाना खासतौर पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने और उनकी जांच करने के लिए बनाया गया है। उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने इस थाने का उद्घाटन किया। इस मौके पर दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा, स्पेशल सीपी देवेश श्रीवास्तव और कई अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।
यह पहल महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार और पुलिस की प्रतिबद्धता को दिखाती है। पहले से चल रही क्राइम अगेंस्ट वुमेन सेल को भी अब इसी महिला थाने में शामिल कर दिया गया है। उपराज्यपाल द्वारा 25 मई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, इस थाने को पूरे नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट का अधिकार क्षेत्र दिया गया है।
महिला थाने का उद्घाटन और मौजूद अधिकारियों की भूमिका
उद्घाटन समारोह में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि यह थाना सिर्फ एक पुलिस स्टेशन नहीं है, बल्कि महिलाओं और बच्चों के परिवारों के लिए विश्वास का प्रतीक बनेगा। उन्होंने जोर दिया कि यह संस्था कानून को लागू करने के साथ-साथ महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान का एहसास कराने का काम भी करेगी।
दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने उपराज्यपाल का स्वागत किया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उपराज्यपाल ने स्मारक पट्टिका का अनावरण किया और फीता काटकर थाने का उद्घाटन किया। उन्होंने नए थाने और एनेक्सी भवन का भी निरीक्षण किया तथा वहां उपलब्ध सुविधाओं को देखा।
थाने का मकसद और काम का दायरा
यह महिला थाना महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले हर तरह के अपराधों की जांच करेगा। इसमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, स्टॉकिंग यानी पीछा करना, उत्पीड़न, बलात्कार और महिलाओं तथा बच्चों की गरिमा व सुरक्षा से जुड़े सभी गंभीर मामले शामिल हैं। थाने को महिलाओं और बच्चों के अनुकूल वातावरण को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यहां मुख्य रूप से महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि पीड़ित महिलाएं और बच्चे अपनी बात आसानी से रख सकें।
उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा सुनिश्चित करना सिर्फ सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के हर व्यक्ति की भी यह जिम्मेदारी है कि अगर कहीं किसी महिला या बच्चे के साथ अन्याय होता दिखे तो वह आवाज उठाए और पुलिस को सूचित करे। उन्होंने कहा, “अधिकारों के साथ जिम्मेदारी भी आती है। सबसे पहले उन लोगों की जिम्मेदारी है जिन्हें अधिकार दिए गए हैं कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”
उपराज्यपाल का संदेश और समाज की भूमिका
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने उद्घाटन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि इस थाने की सफलता सिर्फ दर्ज मामलों की संख्या से नहीं आंकी जाएगी। असली मापदंड यह होगा कि महिलाओं और लड़कियों के मन में यह थाना कितना विश्वास पैदा कर पाता है। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिलेगा तो वे शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और सार्वजनिक जीवन में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी, जिससे पूरा समाज और देश आगे बढ़ेगा।
उन्होंने दिल्ली पुलिस की अन्य पहलों की भी सराहना की। इनमें महिला हेल्पलाइन 1091, पिंक बूथ, छेड़छाड़ और स्टॉकिंग के खिलाफ शिष्टाचार अभियान, और महिलाओं-बच्चों के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। उपराज्यपाल ने उम्मीद जताई कि यह महिला थाना जेंडर-सेंसिटिव यानी लिंग के प्रति संवेदनशील और पीड़ित-केंद्रित पुलिसिंग का आदर्श मॉडल बनेगा। भविष्य में दिल्ली और अन्य जगहों पर ऐसे थानों की स्थापना के लिए यह उदाहरण बनेगा।
पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों के विचार
दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने समारोह में बताया कि पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए चार ‘P’ की रणनीति अपनाई है – Prevention (रोकथाम), Protection (सुरक्षा), Prompt Investigation (तेज जांच) और Participation (भागीदारी)। उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों में जल्दी जांच पूरी की जा रही है। कई रेप और POCSO मामलों में 15 से 20 दिनों में जांच पूरी हो रही है और दोषियों को समय पर सजा भी मिल रही है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में अभी 116 पिंक बूथ काम कर रहे हैं। अलग-अलग इलाकों में ऑल-वुमन पीसीआर वैन तैनात हैं। तीन करोड़ से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जो विश्व रिकॉर्ड भी है। नया महिला थाना ऐसी जगह बनेगा जहां महिलाएं बिना झिझक अपनी समस्याएं बता सकेंगी और उन्हें संवेदनशीलता से मदद मिलेगी।
स्पेशल सीपी देवेश श्रीवास्तव ने कहा कि नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें पिंक बूथ, रानी झांसी स्क्वाड और वामिका जैसी योजनाएं शामिल हैं। वामिका एक खास पेट्रोलिंग गाड़ी है जो दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा के लिए तैनात है। उन्होंने कहा कि यह पहला महिला थाना महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बनेगा और 24 घंटे उनकी मदद के लिए उपलब्ध रहेगा।
संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
महिला थाने की खास सुविधाएं और भविष्य की उम्मीद
इस थाने में पीड़ितों को संवेदनशील माहौल दिया जाएगा। यहां महिला अधिकारी ज्यादा होंगे ताकि शिकायतकर्ता सहज महसूस करें। थाना पूरे नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट में महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों की जांच करेगा। यह कदम दिल्ली में लैंगिक समानता और न्याय की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
दिल्ली पुलिस का मानना है कि इस थाने से राजधानी में और ज्यादा सुरक्षित, समावेशी और संवेदनशील पुलिस व्यवस्था बनेगी। हर महिला को समय पर सहायता, सुरक्षा और न्याय मिल सकेगा। समाज को भी इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए ताकि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध कम हों।
यह महिला थाना न सिर्फ अपराधों की जांच करेगा बल्कि जागरूकता फैलाने और रोकथाम के उपायों पर भी काम करेगा। आम लोगों से अपील है कि वे अपनी आंखें बंद न करें और किसी भी घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
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