लखनऊ। मायावती का बड़ा एक्शन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के खिलाफ एक बार फिर देखने को मिला है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ और वरिष्ठ नेता रणधीर सिंह बेनीवाल को तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दोनों नेताओं पर पार्टी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने और संगठन में गुटबाजी को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगे हैं।
अशोक सिद्धार्थ पर दोबारा गिरी गाज, वापसी के सारे रास्ते बंद
बसपा अध्यक्ष मायावती ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इस बड़े राजनीतिक फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अशोक सिद्धार्थ को पहले भी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी उम्मीदवारों के चयन में गड़बड़ी और प्रदेश अध्यक्ष के साथ सही तालमेल न बिठाने के कारण निष्कासित किया गया था। हालांकि, बाद में इस सख्त शर्त पर उनकी वापसी हुई थी कि वे ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराएंगे और उन्हें केवल उत्तर प्रदेश के बाहर अन्य राज्यों में पार्टी के विस्तार की जिम्मेदारी दी जाएगी।
मायावती के अनुसार, शर्त के बावजूद अशोक सिद्धार्थ के आचरण में कोई बदलाव नहीं आया। उन्हें जिन-जिन राज्यों का कोऑर्डिनेटर बनाया गया, वहां से लगातार शिकायतें मिलती रहीं। कर्नाटक के अलावा ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से भी उनके द्वारा पार्टी निर्देशों के उल्लंघन की खबरें आती रहीं। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो बसपा नेतृत्व ने पहले उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त किया और अब हमेशा के लिए निष्कासित कर दिया।
भ्रम फैलाने और षड्यंत्र रचने का आरोप
बसपा प्रमुख ने खुलासा किया कि अशोक सिद्धार्थ के यूपी लौटने और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभियान में शामिल होने की फर्जी खबरें जानबूझकर फैलाई जा रही थीं। उनका मानना है कि यह पार्टी कैडर में भ्रम की स्थिति पैदा करने और चुनाव की तैयारियों को बाधित करने का एक सुव्यवस्थित षड्यंत्र था।
पार्टी और बहुजन मूवमेंट के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए बसपा नेतृत्व ने फैसला लिया है कि अशोक सिद्धार्थ की पार्टी में कभी भी दोबारा वापसी नहीं होगी।
रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई
अशोक सिद्धार्थ के अलावा सहारनपुर निवासी रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। रणधीर बेनीवाल के पास बसपा कोऑर्डिनेटर के रूप में पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों की कमान थी।
मायावती ने बताया कि बेनीवाल के खिलाफ भी लगातार अनुशासनहीनता और पार्टी के नीतिगत फैसलों की अनदेखी की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद संगठन के हित में उनके खिलाफ भी तत्काल प्रभाव से निष्कासन की कार्रवाई की गई।
संगठन में फेरबदल: राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को मिली बड़ी जिम्मेदारी
पार्टी संगठन को नए सिरे से मजबूत करने के लिए बसपा ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़े बदलाव किए हैं।
बसपा के नए नीतिगत फैसले:
- रामजी गौतम को कमान: राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को अन्य राज्यों के साथ-साथ पंजाब का पुनः प्रभारी बनाया गया है। वे आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनावों तक इस जिम्मेदारी को संभालेंगे।
- यूपी से बाहर काम करने वालों के लिए नियम: बसपा ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश का जो भी पदाधिकारी या कोऑर्डिनेटर राज्य से बाहर काम कर रहा है, उसे यूपी में संगठन की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
कार्यकर्ताओं और मीडिया के लिए मायावती की विशेष अपील
अपने बयान के अंत में मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की बसपा सरकार बनाने के लक्ष्य से ध्यान भटकाने वाले शरारती और षड्यंत्रकारी तत्वों से पूरी तरह सतर्क रहें।
साथ ही, उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया कि वह गरीबों, दलितों और शोषितों की प्रतिनिधि पार्टी बीएसपी के खिलाफ विरोधी दलों के हथकंडे का हिस्सा न बने और बिना पुष्टि के भ्रामक या असत्य खबरों को प्रचारित करने से बचे।
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