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दिल्ली में पप्पू यादव के आवास पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: प्रेस कॉन्फ्रेंस में जूता फेंका गया और चाकू से हमले का दावा!

पप्पू यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस हमला मामला तूल पकड़ रहा है। दिल्ली आवास पर जूता फेंकने, मारपीट और चाकू से जानलेवा हमले के दावों के बीच पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

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नई दिल्ली। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान अचानक उस समय भारी बवाल खड़ा हो गया, जब विरोधियों ने उन पर हमला करने की कोशिश की। सांसद के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी झड़प हो गई। घटना के बीच जूता फेंके जाने, चाकू लाने के आरोप और एक संदिग्ध को हिरासत में लिए जाने से मामला और गंभीर हो गया।

संसद परिसर में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन और उससे जुड़े विवाद पर अपनी बात रखने के लिए पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। लेकिन मीडिया के सामने शुरू हुई बहस देखते ही देखते धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गई। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और पूरे घटनाक्रम के वीडियो फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अचानक कैसे बिगड़े हालात?

संसद परिसर के बाहर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों और खुद पर लग रहे गंभीर आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए सांसद पप्पू यादव ने अपने दिल्ली आवास पर मीडिया को आमंत्रित किया था। प्रेस वार्ता की शुरुआत में सांसद पत्रकारों के सवालों के बेबाकी से जवाब दे रहे थे। इसी बीच, प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कुछ अज्ञात लोगों ने बीच में टोकते हुए उन पर सवाल दागने शुरू कर दिए।

शुरुआत में मामला सिर्फ तीखी बहस तक सीमित रहा, लेकिन देखते ही देखते विरोधियों ने सांसद के खिलाफ नारेबाज़ी शुरू कर दी। अपने नेता के खिलाफ नारेबाजी होते देख वहां मौजूद पप्पू यादव के समर्थक भड़क गए। दोनों पक्षों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि मामला धक्का-मुक्की और मारपीट तक पहुंच गया। सांसद खुद मंच से लोगों को शांत रहने की अपील करते रहे, लेकिन भीड़ पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थी।

जूता फेंका गया और धारदार हथियार का दावा

हंगामे के दौरान ही भीड़ में से एक युवक ने सांसद पप्पू यादव की तरफ जूता फेंक दिया। इसके बाद समर्थकों ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी को तुरंत मौके पर ही दबोच लिया। स्थिति उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब सांसद और उनके समर्थकों ने यह सनसनीखेज दावा किया कि आरोपी अपने साथ एक धारदार चाकू लेकर आया था।

सांसद पप्पू यादव ने सुरक्षा पर बड़े सवाल उठाते हुए कहा कि वह युवक उनकी हत्या करने के इरादे से आया था। समर्थकों का कहना है कि जब आरोपी ने पीछे से हथियार निकालने की कोशिश की, तभी उसे दबोच लिया गया। अगर समय पर उसे काबू में न किया गया होता तो कोई बड़ी अनहोनी घट सकती थी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा घेरा

घटना की जानकारी मिलते ही दिल्ली पुलिस की टीम और सुरक्षाकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिसबल ने दोनों गुटों को एक-दूसरे से अलग किया और माहौल को नियंत्रित किया। सुरक्षाकर्मियों ने सांसद पप्पू यादव को तुरंत अपने सुरक्षा घेरे में लिया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

पुलिस ने मौके से जूता फेंकने वाले आरोपी को हिरासत में ले लिया है। साथ ही समर्थकों द्वारा सौंपा गया चाकू भी कब्जे में लेकर यह जांच की जा रही है कि क्या वह सचमुच हथियार लेकर अंदर दाखिल हुआ था या मामला कुछ और है।

कौन है आरोपी और क्यों था नाराज?

पुलिस पूछताछ में आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी सुमित के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सुमित साधु-संतों और धार्मिक प्रतीकों को लेकर पप्पू यादव द्वारा दिए गए हालिया बयानों से काफी आक्रोशित था। इसी गुस्से के तहत वह अपने साथी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचा था।

दूसरे आरोपी ‘हैप्पी शर्मा’ का अलग दावा

घटना के दौरान मौके से फरार हुए दूसरे साथी हैप्पी शर्मा ने मीडिया से फोन पर संपर्क कर अपना पक्ष रखा। उसका दावा है कि वे दोनों पूरी तरह निहत्थे थे और केवल यह सवाल पूछने गए थे कि सांसद सनातन धर्म और संतों का अपमान क्यों कर रहे हैं।

हैप्पी शर्मा का आरोप है कि सवाल पूछने पर पप्पू यादव के समर्थकों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसके बचाव में सुमित ने चप्पल उतारी। उसने चाकू से हमले के दावे को पूरी तरह से झूठा और फर्जी करार देते हुए कहा कि समर्थकों ने सुमित को पकड़ने के बाद खुद ही चाकू रखकर साजिश रची है।

विवाद की जड़: गेरुआ वस्त्र पहनकर संसद पर प्रदर्शन

इस पूरे विवाद की नींव दो दिन पहले संसद भवन परिसर में पड़ी थी। शुक्रवार को सांसद पप्पू यादव गेरुआ वस्त्र धारण कर साधु के वेश में संसद पहुंचे थे। उन्होंने संसद के मुख्य द्वार पर अयोध्या चंदा चोरी के मुद्दे को लेकर एक सांकेतिक नाटक प्रस्तुत किया था, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई अन्य नेता भी नजर आए थे।

इस प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वाराणसी में धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में याचिका दायर की गई, जिसके आधार पर प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज हुई। इसी एफआईआर और विवाद पर सफाई देने के लिए पप्पू यादव ने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई।

राजनीतिक बयानबाजी और पुलिस जांच तेज

घटना के बाद से राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। पप्पू यादव ने इसे अपने खिलाफ एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि वे संसद से लेकर सड़क तक जनता और गरीबों की आवाज उठा रहे हैं, इसलिए विरोधी ताकतें उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही हैं।

दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस घटना स्थल के सभी सीसीटीवी फुटेज और मीडिया कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाल रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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