भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश के नौजवानों का आह्वान किया है कि वे चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे पेशेवर क्षेत्रों में करियर बनाने के साथ-साथ सक्रिय राजनीति में पदार्पण करें, ताकि देश का लोकतंत्र और अधिक सशक्त हो सके। भोपाल स्थित विधानसभा भवन के विधान परिषद सभागार में आयोजित ‘संसद यूथ पार्लियामेंट 2026’ के भव्य उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की नीति-निर्माण और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सीधी भागीदारी ही उज्ज्वल भारत का आधार है।
इस राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम में देश के 12 अलग-अलग राज्यों और 58 शहरों से आए युवा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और दिलीप बिल्डकॉन के सीएमडी दिलीप सूर्यवंशी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
सुभाष चंद्र बोस के बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम का स्मरण
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत की स्वाधीनता के लिए अनगिनत शूरवीरों ने हंसते-हंसते अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने उस दौर की सबसे प्रतिष्ठित आईसीएस (ICS) परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद अंग्रेजों की गुलामी वाली नौकरी को ठुकरा दिया था। नेताजी का यह कदम ब्रिटिश हुकूमत को करारा तमाचा था, जिसके बाद वे देश को औपनिवेशिक दासता से मुक्त कराने के लिए स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का युवा जब देश के भविष्य, संसदीय परंपराओं और नीति-निर्माण जैसे गंभीर विषयों पर विचार-विमर्श करने एकत्र होता है, तो यह राष्ट्र के लिए एक सुखद और अनुकरणीय अनुभूति होती है। यह आयोजन साकार दृष्टि सोशल फाउंडेशन और कैलिडोहोप नागपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित किया गया।
समान नागरिक संहिता (UCC) पर मध्य प्रदेश का बड़ा कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र तथा ‘जियो और जीने दो’ के मानवीय भाव से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये केवल कागजी शब्द नहीं हैं, बल्कि इन्हें धरातल पर उतारने के लिए दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और संकल्प शक्ति की आवश्यकता होती है।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) के संदर्भ में बोलते हुए डॉ. यादव ने बताया कि राज्य में इसके लिए व्यापक स्तर पर जन-सुझाव आमंत्रित किए गए थे। प्रदेश के सभी जिलों और सभी धर्मों के नागरिकों ने इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लिया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि यूसीसी के सर्वे में 76 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं (बहनों) ने समान नागरिक संहिता का खुला समर्थन किया है। मध्य प्रदेश देश के उन अग्रणी बड़े राज्यों में शामिल है, जिसने यूसीसी को लागू करने के लिए जरूरी विधेयक पारित किया है।
मातृसत्ता, सनातन परंपरा और न्यायपालिका का सम्मान
सनातन संस्कृति के स्वर्णिम मूल्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी परंपरा में मातृसत्ता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भाव हमें सिखाता है कि पूरी दुनिया एक परिवार की तरह है और मां इस परिवार की धुरी होती है। उन्होंने कहा कि माताओं के बिना तो स्वयं ईश्वर भी अधूरे माने गए हैं।
इस युवा संसद में बेटियों की बड़ी संख्या में भागीदारी को उन्होंने महिला सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष और प्रभावी प्रमाण बताया। साथ ही, न्यायपालिका की सर्वोच्चता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश की जनता न्यायपालिका के फैसलों का अक्षरशः सम्मान करती है, और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद ही अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण संभव हो पाया है।
‘युवा संसद लघु भारत की झलक’: नरेंद्र सिंह तोमर
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने वक्तव्य में कहा कि मध्य प्रदेश देश का हृदय प्रदेश होने के साथ-साथ सभी सांस्कृतिक और प्राकृतिक समृद्धियों से परिपूर्ण है। यह राज्य देश को सक्षम नेतृत्व देने वाली संस्कारधानी के रूप में पहचाना जाता है। विधान परिषद में हो रहे इस आयोजन को उन्होंने ‘लघु भारत’ की संज्ञा दी।
विधानसभा अध्यक्ष ने ऐतिहासिक और वैचारिक संदर्भ देते हुए कहा:
- आदिगुरु शंकराचार्य का योगदान: उन्होंने अत्यंत छोटी आयु में पूरे भारतवर्ष की पैदल यात्रा कर देश को सांस्कृतिक सूत्र में पिरोया और चारों दिशाओं में सनातन मठों की स्थापना की।
- 1857 की क्रांति और युवा क्रांतिकारी: देश की पहली स्वाधीनता क्रांति का नेतृत्व युवाओं ने किया था। चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, अशफाक उल्लाह खां और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जैसे अनगिनत हुतात्माओं ने युवावस्था में ही देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया।
- एक देश, एक विधान की अवधारणा: पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे विचारकों ने हमेशा समान नागरिक संहिता का समर्थन किया। डॉ. मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के लिए संघर्ष किया और ‘एक देश में दो निशान, दो विधान, दो प्रधान नहीं चलेंगे’ का नारा दिया। आज देश उसी दिशा में सशक्त कदम बढ़ा रहा है।
औद्योगिक विकास, रोजगार और शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम में मौजूद उद्योगपति और दिलीप बिल्डकॉन के सीएमडी दिलीप सूर्यवंशी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की औद्योगिक नीतियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़े उद्योगों के साथ-साथ सूक्ष्म और मध्यम इकाइयों (MSME) में भी भारी निवेश आ रहा है, जिससे आने वाले समय में युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने युवाओं से सेवा और समर्पण की भावना से समाज निर्माण में जुटने की अपील की।
युवा सांसद के रूप में अपनी बात रखते हुए प्रतिभागी आरब सिंह शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच युवाओं को केवल ‘नौकरी मांगने वाला’ नहीं, बल्कि ‘रोजगार देने वाला’ (Job Creator) बनाने की है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए वर्तमान में 274 सांदीपनि विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 200 नए सांदीपनि विद्यालयों की स्थापना की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।
समारोह के अंत में पूर्व राज्यसभा सांसद पद्मश्री डॉ. विकास महात्मे और मध्य प्रदेश विधानसभा के सचिव अरविंद शर्मा का विशेष सम्मान किया गया। इस दौरान आयोजक विश्वजीत चोपड़े, देवयानी चोपड़े, वैशाली खोबड़े सहित देश भर से आए सैकड़ों युवा प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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