लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने, फीडर स्तर पर जवाबदेही तय करने और शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर दिया। इस वर्ष पीक बिजली मांग 30,339 मेगावाट तक पहुंच गई है, इसके बावजूद सरकार आम जन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को बिजली संकट से बचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है।
बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम के अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बहुत बढ़ जाती है। इसलिए सभी उत्पादन इकाइयों को पूरी क्षमता से चलाना जरूरी है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल उत्पादन क्षमता अब 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है। जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट बिजली मिल रही है। इसके अलावा मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के जरिए 3,742 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध है।
वर्ष 2022 की तुलना में 2026 तक उत्पादन क्षमता में 86 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से भी करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी संयंत्रों का नियमित रखरखाव किया जाए ताकि कोई तकनीकी समस्या न आए।
ट्रांसमिशन नेटवर्क को और भरोसेमंद बनाने पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने ट्रांसमिशन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने बताया कि बिजली उत्पादन के बाद उसे सही तरीके से पहुंचाना बहुत महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें हैं। प्रदेश में 715 उपकेंद्रों के माध्यम से 2,05,632 एमवीए क्षमता उपलब्ध है। ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत है और पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी में ट्रांसमिशन नेटवर्क की सतत मॉनिटरिंग होनी चाहिए। किसी भी तकनीकी बाधा को तुरंत दूर किया जाए।
वितरण व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फीडर वाइज मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने या फीडर बाधित होने पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आंधी-तूफान के दौरान भी विद्युत व्यवस्था जल्दी बहाल करने के लिए त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार रखने को कहा गया। 4, 7 और 15 मई को आए आंधी-तूफान में 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए थे, लेकिन मरम्मत का काम तेजी से पूरा किया गया।
ट्रांसफॉर्मर क्षति में काफी कमी आई है। वर्ष 2022-23 में 429 पावर ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, जो 2025-26 में घटकर 87 रह गए। बड़े वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति भी 39,177 से घटकर 20,292 हो गई है। सुरक्षा व्यवस्था, समय पर मरम्मत और जवाबदेही से यह सुधार हुआ है।
बढ़ती बिजली मांग और आपूर्ति प्रबंधन
इस वर्ष अप्रैल-मई में तापमान बढ़ने से बिजली की मांग भी बढ़ी है। 15 अप्रैल से 22 मई तक औसत डिमांड 501 मिलियन यूनिट से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन हो गया। पीक डिमांड 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट पहुंच गया।
20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने सभी स्रोतों से बिजली खरीदने और पावर बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
15 मई से कुछ पावर प्लांटों में समस्याएं आईं, फिर भी 12 राज्यों के साथ पावर बैंकिंग से आपूर्ति संभाली गई।
भविष्य की तैयारी और दीर्घकालिक योजना
मुख्यमंत्री ने भविष्य की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति पर बल दिया। वर्ष 2015 से 2026 तक 32,305 मेगावाट क्षमता के लिए टाई-अप किए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में 62 प्रतिशत क्षमता जोड़ी गई।
वर्ष 2029 तक अतिरिक्त 10,719 मेगावाट क्षमता जोड़ने की तैयारी है जिसमें विंड, बैटरी एनर्जी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो और हाइब्रिड परियोजनाएं शामिल हैं।
उपभोक्ता सेवाएं और शिकायत निस्तारण
मुख्यमंत्री ने उपभोक्ताओं को सही और समय पर जानकारी देने पर जोर दिया। नवंबर 2025 से नई 1912 कॉल सेंटर व्यवस्था शुरू हुई है। कॉल हैंडलिंग क्षमता अब 90 हजार प्रतिदिन है।
ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। शिकायत आने पर सिर्फ दर्ज करना काफी नहीं, समाधान कब तक होगा यह भी बताना जरूरी है।
स्मार्ट मीटर और बिलिंग व्यवस्था
प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड में बदल दिया गया है। जून 2026 से बिल हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच जारी किए जाएंगे।
बिल एसएमएस, व्हाट्सएप और ई-मेल से भेजे जाएंगे। 15 मई से 30 जून तक विशेष कैंप लगाकर स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतें निपटाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने बिलिंग और कलेक्शन दक्षता बढ़ाने को कहा।
सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बिजली आपूर्ति आम जन के जीवन, किसानों की सिंचाई, व्यापार और उद्योगों से जुड़ा मुद्दा है। फील्ड अधिकारियों की नियमित मॉनिटरिंग, शिकायतों का त्वरित समाधान और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रदेशवासियों को गर्मी में बेहतर बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी डिस्कॉम मिलकर इस लक्ष्य को पूरा करेंगे।
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