लखनऊ/शीतल नेहरा। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत विजिलेंस विभाग को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। आगरा से सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर विजिलेंस की टीम ने एक बड़ा छापा मारा। लगभग 26 घंटे तक चली इस मैराथन छापेमारी में ललित कुमार के घर से करीब 35 करोड़ रुपये की अघोषित और काली संपत्ति का पर्दाफाश हुआ है।
इस शानदार और सफल कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने छापेमारी दल में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
दीवारों और कमरों से निकला ₹1.62 करोड़ का कैश
विजिलेंस की टीम जब अदालत से सर्च वारंट लेकर 7 जुलाई को दोपहर 12 बजे ललित कुमार के लखनऊ के अलीगंज, चंद्रलोक कॉलोनी (सी-143) स्थित निवास पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। घर के चप्पे-चप्पे की सघन तलाशी के दौरान टीम को अलग-अलग कमरों और दीवारों के भीतर पैकेटों में छिपाकर रखे गए कुल 1 करोड़ 62 लाख रुपये नकद (कैश) बरामद हुए।
20 करोड़ के सोने-चांदी और हीरे के जेवरात
नकद रुपयों के अलावा ललित कुमार के आलीशान मकान से भारी मात्रा में कीमती आभूषण मिले हैं। विजिलेंस के अनुसार, घर से 13 किलोग्राम सोना, लगभग 9 किलोग्राम चांदी और बेशकीमती हीरे के गहने जब्त किए गए हैं। इन बरामद हुए जेवरातों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा, घर की बेहद महंगी साज-सज्जा और आलीशान घरेलू सामानों पर भी पानी की तरह पैसा बहाए जाने के पुख्ता सबूत मिले हैं।

लखनऊ, नोएडा और बाराबंकी में करोड़ों के मकान-प्लॉट
जांच एजेंसी को छापेमारी के दौरान 15 अलग-अलग जगहों पर मौजूद आलीशान मकानों, फ्लैटों और कृषि भूमियों के मालिकाना दस्तावेज भी हाथ लगे हैं। इन अचल संपत्तियों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 13 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
- लखनऊ में संपत्तियां: अलीगंज, वृंदावन योजना, इस्माइलगंज, मोहनलालगंज और बालकगंज जैसे प्रमुख इलाकों में मकान, प्लॉट और खेती की जमीन के कागजात।
- अन्य शहरों में निवेश: नोएडा में दो शानदार फ्लैटों की बुकिंग के दस्तावेज, साथ ही बाराबंकी और उनके पैतृक जिले रायबरेली में भी जमीन के कागजात मिले हैं।
- वाहनों और निवेश का ब्योरा: ललित कुमार के पास से एक टोयोटा इनोवा और एक हुंडई i20 कार के साथ-साथ एक रिवॉल्वर भी मिली है। इसके अलावा बैंक खातों, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में एक करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के पेपर भी जब्त किए गए हैं।
कैसे शुरू हुई भ्रष्टाचार की जांच?
आरोपी ललित कुमार मूल रूप से रायबरेली के सेंगहो कोठी के रहने वाले हैं। आईजी विजिलेंस मंजिल सैनी ने बताया कि साल 2020 में परिवहन आयुक्त द्वारा ललित कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। इसके बाद, भ्रष्टाचार निवारण संगठन (ACO) के कानपुर सेक्टर ने मामले की शुरुआती जांच की। साल 2024 में जब वह कानपुर में संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) यानी रीजनल इंस्पेक्टर टेक्निकल के पद पर तैनात थे, तब भी उनके खिलाफ शिकायतें आईं। इसके बाद 11 जून 2024 को कानपुर सेक्टर के थाने में उनके विरुद्ध एफआईआर (FIR) दर्ज की गई, जिसकी आगे की विवेचना शासन ने विजिलेंस विभाग को सौंप दी थी।

वैध कमाई से 73.6% अधिक मिला खर्च
विजिलेंस और एसीओ की विस्तृत जांच में सामने आया कि ललित कुमार की कुल वैध सरकारी कमाई केवल 93.26 लाख रुपये थी। इसके विपरीत, उनके द्वारा चल-अचल संपत्तियों की खरीद, उनके रख-रखाव और अन्य पारिवारिक मदों पर किया गया कुल खर्च 1.61 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया। इस प्रकार उन्होंने अपनी कानूनी आय के ज्ञात स्रोतों से करीब 68.66 लाख रुपये (यानी लगभग 73.6 प्रतिशत) अधिक धन खर्च किया था। इस अत्यधिक खर्च और अकूत संपत्ति के संबंध में जब ललित कुमार से पूछताछ की गई, तो वह जांच एजेंसी के सामने कोई भी संतोषजनक या वैध स्पष्टीकरण नहीं दे सके। इसके बाद उन्हें आय से अधिक संपत्ति का दोषी मानते हुए यह बड़ी कार्रवाई की गई।
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