नई दिल्ली। Vinod Tawde Appointed UP BJP Incharge: भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सांगठनिक चक्रव्यूह रचना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी ने मंगलवार को अपने राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है, जबकि जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सांगठनिक मजबूती और सामाजिक समीकरण साधने की कवायद
भाजपा का मुख्य ध्यान प्रदेश में जमीनी संगठन को पुनर्जीवित करने और सामाजिक व जातीय संतुलन को साधने पर है। पार्टी उत्तर प्रदेश से गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रमुख स्थान देकर राज्य के वोट बैंक को साधने में जुटी है।
विनोद तावड़े की नियुक्ति को इसी रणनीतिक कदम का मुख्य हिस्सा माना जा रहा है। गठबंधन के सहयोगियों के साथ संवाद स्थापित करने और आंतरिक गुटबाजी को समाप्त करने में तावड़े की महारत को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व ने उन पर यह बड़ा दांव खेला है।
हरियाणा से बिहार तक साबित किया अपनी रणनीति का लोहा
विनोद तावड़े के पास विभिन्न राज्यों में सांगठनिक ढांचे को खड़ा करने और कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन सहेजने का वृहद अनुभव है:
- हरियाणा में संगठन विस्तार (2020): वर्ष 2020 में हरियाणा का प्रभार मिलने के बाद उन्होंने पार्टी की अंदरूनी चुनौतियों को दूर कर संगठन को नए सिरे से गतिशील बनाया।
- बिहार में एनडीए की वापसी (2022 से आगे): 2022 में बिहार का प्रभार संभालने के बाद तावड़े ने ही 2023 के राजनीतिक उलटफेर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे राज्य में राजद-जदयू गठबंधन गिरा और एनडीए की सरकार बनी।
- चुनावी सफलताएँ: उनके मार्गदर्शन में एनडीए ने बिहार में 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की।
राष्ट्रीय अभियानों का सफल समन्वय
संसदीय और शीर्ष स्तर के चुनावों में भी तावड़े की प्रबंधकीय क्षमता पर पार्टी भरोसा जताती रही है:
- राष्ट्रपति चुनाव 2022: द्रौपदी मुर्मु के चुनाव प्रभारी के रूप में उन्होंने देशभर में सहयोगी और गैर-सहयोगी राजनीतिक दलों से संवाद साधकर उनके समर्थन का समन्वय किया।
- उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: सी.पी. राधाकृष्णन के चुनाव अभियान की पूरी बागडोर संभालते हुए उन्होंने विभिन्न राजनीतिक मोर्चों के बीच समन्वय का जिम्मा बखूबी निभाया।
2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश के राजनीतिक महासमर को देखते हुए भाजपा का यह कदम चुनावी बिसात पर अपनी पकड़ और अधिक मजबूत करने की दिशा में सबसे अहम माना जा रहा है।
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