जैसलमेर/देवप्रयाग। उत्तराखंड के देवप्रयाग में अलकनंदा नदी के तेज बहाव में समाई जैसलमेर के एक ही परिवार की इनोवा कार का रेस्क्यू ऑपरेशन सातवें दिन सोमवार को बेहद दर्दनाक मोड़ पर खत्म हुआ। नदी की उफनती लहरों में लापता चल रहीं मां और उनकी दोनों बेटियों के शव आखिरकार घटनास्थल से 15 किलोमीटर दूर गंगा नदी से बरामद कर लिए गए हैं।
इस भीषण और रूह कंपा देने वाले हादसे में कार सवार 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि किस्मत की बदौलत 12 साल का मासूम आयुष (आयुष्मान) मौत के मुंह से जिंदा बच निकला है, जिसका इलाज एम्स ऋषिकेश में चल रहा है। आज मंगलवार को मां-बेटी के शवों का हरिद्वार में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर लौट रहा था परिवार, देवप्रयाग के पास काल बनी अलकनंदा। जैसलमेर का यह परिवार 26 मई को बेहद उत्साह के साथ चारधाम यात्रा के लिए रवाना हुआ था। 2 जून को बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने के बाद सभी लोग वापस लौट रहे थे, तभी टिहरी जिले के देवप्रयाग के समीप उनकी इनोवा कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई को लांघते हुए सीधे अलकनंदा नदी में जा गिरी।
कार में डॉ. दिनेश माली (27), उनकी मां कमला देवी (67), बड़ी बहन गुड्डी देवी (40), भांजी अश्लेषा (18), भांजा आयुष्मान (12), गुड्डी देवी की बेटियां नम्रता (20) और ज्योत्सना (16) सवार थे।
गंगा की तेज धाराओं के बीच 7 दिन चला ‘डीप डाइविंग’ सर्च ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने मोर्चे संभाले। नदी के खतरनाक बहाव और जलस्तर के बीच गोताखोरों ने जान जोखिम में डालकर लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया:
पूरी तरह पिचक चुकी थी कार: रेस्क्यू टीम ने सबसे पहले नदी की गहराई से दुर्घटनाग्रस्त इनोवा कार को बाहर निकाला। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी पूरी तरह पिचक चुकी थी और उसके अंदर कोई नहीं था।
शुरुआती दौर में मिले 4 शव: शुरुआती सर्च में डॉ. दिनेश कुमार माली, उनकी बुजुर्ग मां कमला देवी, भांजी अश्लेषा और कार ड्राइवर अमित के शव मिल गए थे, जिनका 5 जून को ही हरिद्वार में अंतिम संस्कार कर दिया गया था।
15 किमी दूर बहे शव: तीन महिलाएं (मां और दो बेटियां) लापता थीं। कड़े संघर्ष के बाद रविवार को छोटी बेटी ज्योत्सना (16) का शव व्यास घाट से मिला। इसके बाद सोमवार को देर शाम रेस्क्यू टीम ने व्यास घाट से ही मां गुड्डी देवी (40) और ताज होटल के समीप से दूसरी बड़ी बेटी नम्रता (20) का शव भी ढूंढ निकाला।
पूरा घर उजड़ गया… अब सिर्फ 12 साल के आयुष के सिर पर बची है जिंदगी
देवप्रयाग के कोतवाल प्रशांत बहुगुणा ने बताया कि तीनों शवों को पूरी कानूनी प्रक्रिया और शिनाख्त के बाद जैसलमेर से पहुँचे शोकाकुल और रोते-बिलखते परिजनों को सौंप दिया गया है।
तबाही का मंजर: इस भीषण हादसे ने पूरे परिवार को खत्म कर दिया। गुड्डी देवी और उनकी तीनों बेटियों (नम्रता, ज्योत्सना, अश्लेषा) की इस हादसे में असमय मौत हो गई। अब इस परिवार में सिर्फ 12 साल का आयुष्मान जिंदा बचा है, जिसे हादसे के तुरंत बाद देवप्रयाग में बचाकर पहले श्रीनगर बेस हॉस्पिटल और फिर वहां से एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश एम्स (AIIMS) शिफ्ट किया गया था, जहां उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Women Express पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

